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स्वीडन के बाद नॉर्वे रवाना हुए पीएम मोदी, ये है 5 देशों के दौरे का अहम चरण
नेशनल डेस्क
प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन के बाद नॉर्वे पहुंचे। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, 30+ समझौतों की उम्मीद।
PM Modi Norway visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि वे अपने पांच देशों के दौरे के चौथे पड़ाव पर हैं। स्वीडन से दौरा खत्म करने के बाद पीएम मोदी अब नॉर्वे की ओर बढ़ गए हैं। यह यात्रा खास इसलिए भी है क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे जाना हो रहा है। मौजूदा समय में, जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को लेकर नई संभावनाएं बन रही हैं, इस दौरे का महत्व बढ़ जाता है।
पीएम मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 19 मई को होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके साथ ही, वे भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस दौरे में दोनों देशों के बीच 30 से अधिक व्यापारिक और तकनीकी समझौतों पर सहमति बनने की संभावना है। खासतौर पर ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा सहयोग और एलपीजी सप्लाई जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि नॉर्वे की बड़ी निवेश योजनाएं भारत में विस्तार पा सकती हैं, क्योंकि वहां का सरकारी फंड पहले से ही भारतीय शेयर बाजार में करीब 28 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। इस पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले, पीएम मोदी का स्वीडन दौरा काफी सुर्खियों में रहा। स्वीडन में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और वहां के प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर जाकर उन्हें रिसीव किया। पीएम मोदी को वहां 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा गया। कारोबारी कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का कड़ा रुख भी दोहराया।
इसके अलावा, इस पूरे पांच देशों के दौरे में पीएम मोदी ने पहले संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड का दौरा किया था, जहां कई स्तरों पर द्विपक्षीय बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, इन दौरों का उद्देश्य भारत के लिए नई निवेश संभावनाएं, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। नॉर्वे दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी लगातार नजर बनाए हुए हैं, और इसे भारत-नॉर्डिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
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स्वीडन के बाद नॉर्वे रवाना हुए पीएम मोदी, ये है 5 देशों के दौरे का अहम चरण
नेशनल डेस्क
PM Modi Norway visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि वे अपने पांच देशों के दौरे के चौथे पड़ाव पर हैं। स्वीडन से दौरा खत्म करने के बाद पीएम मोदी अब नॉर्वे की ओर बढ़ गए हैं। यह यात्रा खास इसलिए भी है क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे जाना हो रहा है। मौजूदा समय में, जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को लेकर नई संभावनाएं बन रही हैं, इस दौरे का महत्व बढ़ जाता है।
पीएम मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 19 मई को होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके साथ ही, वे भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस दौरे में दोनों देशों के बीच 30 से अधिक व्यापारिक और तकनीकी समझौतों पर सहमति बनने की संभावना है। खासतौर पर ग्रीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा सहयोग और एलपीजी सप्लाई जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि नॉर्वे की बड़ी निवेश योजनाएं भारत में विस्तार पा सकती हैं, क्योंकि वहां का सरकारी फंड पहले से ही भारतीय शेयर बाजार में करीब 28 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। इस पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले, पीएम मोदी का स्वीडन दौरा काफी सुर्खियों में रहा। स्वीडन में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और वहां के प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर जाकर उन्हें रिसीव किया। पीएम मोदी को वहां 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा गया। कारोबारी कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का कड़ा रुख भी दोहराया।
इसके अलावा, इस पूरे पांच देशों के दौरे में पीएम मोदी ने पहले संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड का दौरा किया था, जहां कई स्तरों पर द्विपक्षीय बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, इन दौरों का उद्देश्य भारत के लिए नई निवेश संभावनाएं, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। नॉर्वे दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी लगातार नजर बनाए हुए हैं, और इसे भारत-नॉर्डिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
