- Hindi News
- देश विदेश
- डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव
नेशनल डेस्क
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर पहुंचा, क्रूड 110 डॉलर पार। सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, FIIs की भारी बिकवाली जारी।
सोमवार, 18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।
इसी बीच, भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि, फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में FII ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए, लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है, तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं, जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।
उधर, ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला, कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव
नेशनल डेस्क
सोमवार, 18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।
इसी बीच, भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि, फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में FII ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए, लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है, तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं, जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।
उधर, ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला, कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।
