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रायपुर में CM साय ने किया ‘कोहरा’ का विमोचन, नक्सलवाद समेत संवेदनशील मुद्दों पर आधारित है करुणा सागर पांडा का उपन्यास
छत्तीसगढ़
महंत घासीदास संग्रहालय सभागार में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवा लेखक को बधाई दी, उन्होंने साहित्य को सामाजिक जागरूकता और समकालीन मुद्दों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम बताया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागार में युवा लेखक करुणा सागर पांडा के हिंदी उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों ने हिस्सा लिया। विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य केवल समाज का प्रतिबिंब नहीं है, बल्कि सामाजिक वास्तविकताओं और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों के सामने रखने का माध्यम भी है। उन्होंने पांडा को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं दीं और संवेदनशील विषयों पर लिखने के प्रयास की सराहना की।
नक्सलवाद के प्रभाव को सामने लाने की अपील
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के संघर्ष और पीड़ा को साहित्य के माध्यम से सामने लाने की बात कही। उन्होंने लेखकों और रचनाकारों से ऐसे अनुभवों को अपनी रचनाओं में स्थान देने का आग्रह किया। ‘कोहरा’ को समकालीन सामाजिक विषयों पर केंद्रित उपन्यास के तौर पर प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इसकी विषयवस्तु को लेकर चर्चा की और साहित्य के जरिए सामाजिक सवालों पर संवाद की जरूरत बताई।
‘द केरला स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने संवेदनशील विषयों पर बनने वाली फिल्मों और साहित्यिक कृतियों का उल्लेख करते हुए ‘द केरला स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कठिन विषयों पर रचनाएं सामने आने पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन रचनाकारों की अपनी दृष्टि और संवेदनशीलता के साथ विषय प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी होती है।
घरों में छोटी लाइब्रेरी बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने परिवारों से घरों में छोटी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किताबें अलग-अलग पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कृति और अनुभव को जोड़ने का काम करती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने की। राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
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