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एनालॉग पनीर क्या है? असली पनीर से अंतर और घर पर पहचानने का तरीका
Digital desk
छत्तीसगढ़ में 200 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त हुआ। जानिए Analogue Paneer क्या है, असली पनीर से कैसे अलग है, इसकी बिक्री कब कानूनी है और ग्राहक इसे कैसे पहचान सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया गया है। राजस्व विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार देर रात भलेसर रोड स्थित एक खाद्य इकाई पर छापा मारा। अधिकारियों को वहां पनीर तैयार होता मिला और उत्पाद की गुणवत्ता तथा इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे माल को लेकर संदेह के बाद नमूने और अन्य जानकारी जुटाई गई। मामले की आगे जांच की जा रही है। (The Times of India)
इस कार्रवाई के बीच 'एनालॉग पनीर' एक बार फिर चर्चा में है। सवाल है कि यह असली पनीर से कैसे अलग है, क्या इसे बेचना कानूनी है और ग्राहक खरीदते समय इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं?
क्या होता है एनालॉग पनीर?
सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाने वाला डेयरी उत्पाद है। दूध को गर्म करने के बाद किसी उपयुक्त अम्लीय पदार्थ की मदद से प्रोटीन को जमाया जाता है और उससे पनीर तैयार होता है।
इसके विपरीत एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जिसे असली पनीर जैसा दिखने और इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन इसमें दूध के कुछ या सभी घटकों की जगह गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसमें उत्पाद के फॉर्मूलेशन के अनुसार वनस्पति तेल या वसा, मिल्क सॉलिड्स, प्लांट प्रोटीन, स्टार्च, स्टेबलाइजर और इमल्सीफायर जैसी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है। (Seniors Today)
असली पनीर से क्या अंतर?
असली पनीर की पहचान उसका दूध आधारित होना है। इसमें दूध से मिलने वाले प्रोटीन और वसा जैसे घटक होते हैं।
एनालॉग पनीर में इसके बजाय गैर-दुग्ध वसा या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से दोनों उत्पाद दिखने और पकाने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनकी संरचना और पोषण संबंधी प्रोफाइल समान नहीं होती।
एनालॉग उत्पादों की कीमत भी कई मामलों में कम हो सकती है, क्योंकि वनस्पति वसा और अन्य विकल्प दूध की तुलना में उत्पादन लागत कम कर सकते हैं।
क्या एनालॉग पनीर बेचना गैरकानूनी है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
एनालॉग पनीर अपने आप में हर जगह प्रतिबंधित उत्पाद नहीं है। केंद्र स्तर पर खाद्य नियमों के तहत ऐसे उत्पादों की बिक्री और लेबलिंग के लिए प्रावधान हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से स्पष्ट लेबलिंग पर जोर दिया जाता है ताकि ग्राहक को पता हो कि वह वास्तविक डेयरी पनीर के बजाय एनालॉग उत्पाद खरीद रहा है। (Facebook)
लेकिन किसी एनालॉग उत्पाद को असली पनीर बताकर बेचना या उसकी प्रकृति छिपाना उपभोक्ता को गुमराह करने वाला मामला बन सकता है।
इसके अलावा, हाल के दिनों में कई राज्यों ने अपने स्तर पर एनालॉग पनीर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इस उत्पाद को लेकर प्रतिबंध या कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। (Gujarat Samachar)
इसलिए किसी विशेष राज्य में इसकी बिक्री की वैधता वहां लागू मौजूदा आदेश और नियमों पर भी निर्भर करती है।
घर पर कैसे पहचानें?
घर पर केवल देखकर यह निश्चित रूप से बताना मुश्किल है कि पनीर असली है या एनालॉग। सबसे भरोसेमंद तरीका लेबल और सामग्री की सूची देखना है।
अगर पैकेट पर vegetable fat, vegetable oil, starch, plant protein, emulsifier या इसी तरह की गैर-दुग्ध सामग्री प्रमुख रूप से दर्ज है, तो ग्राहक को उत्पाद की प्रकृति समझने में मदद मिल सकती है।
ढीला या बिना लेबल वाला पनीर खरीदते समय पहचान और भी मुश्किल हो जाती है। केवल रंग, कीमत या मुलायमपन देखकर फैसला करना विश्वसनीय तरीका नहीं है।
क्या घर का आयोडीन टेस्ट सही है?
इंटरनेट पर पनीर में स्टार्च की मौजूदगी जांचने के लिए आयोडीन टेस्ट का सुझाव दिया जाता है। स्टार्च मौजूद होने पर आयोडीन के साथ गहरा नीला रंग दिखाई दे सकता है।
लेकिन ऐसा घरेलू परीक्षण यह साबित नहीं करता कि पूरा उत्पाद एनालॉग पनीर है। स्टार्च की मौजूदगी और एनालॉग पनीर की पहचान एक ही बात नहीं है।
इसलिए किसी घरेलू टेस्ट के आधार पर उत्पाद को 'नकली' घोषित करना सही नहीं होगा। संदिग्ध उत्पाद की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है।
स्वास्थ्य के लिए कितना चिंताजनक?
एनालॉग पनीर को सिर्फ इसलिए स्वतः 'जहरीला' या 'हानिकारक' कहना सही नहीं है। इसकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें कौन-सी सामग्री इस्तेमाल हुई है, उत्पाद किस मानक के तहत बनाया गया है और उसकी सही लेबलिंग हुई है या नहीं।
हालांकि, इसे असली पनीर का पोषणात्मक विकल्प मानना भी सही नहीं है। दोनों की सामग्री और पोषण संरचना अलग हो सकती है। (Aditya Birla Capital)
सबसे बड़ी उपभोक्ता चिंता तब पैदा होती है जब किसी व्यक्ति को वास्तविक डेयरी पनीर समझकर ऐसा उत्पाद बेच दिया जाए जिसकी प्रकृति अलग हो।
महासमुंद की कार्रवाई क्यों अहम?
महासमुंद में करीब 200 किलो संदिग्ध उत्पाद की जब्ती ने खाद्य कारोबार में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों ने उत्पाद के साथ-साथ इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी जुटाई है। (The Times of India)
अब जांच और नमूनों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि जब्त किया गया उत्पाद वास्तव में किस प्रकार का था और क्या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था।
ग्राहक क्या सावधानी बरतें?
पनीर खरीदते समय ग्राहक पैकेट पर ingredients, product name, manufacturer details और food licence information जरूर देखें।
अगर किसी उत्पाद को वास्तविक पनीर के रूप में बेचा जा रहा है लेकिन उसकी सामग्री में गैर-दुग्ध वसा या अन्य विकल्पों का उल्लेख मिलता है, तो उसे लेकर सवाल उठाना उचित है।
और सबसे महत्वपूर्ण बात—सिर्फ कम कीमत देखकर पनीर खरीदना हमेशा फायदे का सौदा नहीं हो सकता। उत्पाद की पहचान और लेबलिंग को समझना ही उपभोक्ता के लिए सबसे सुरक्षित पहला कदम है।
एनालॉग पनीर क्या है? असली पनीर से अंतर और घर पर पहचानने का तरीका
Digital desk
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया गया है। राजस्व विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार देर रात भलेसर रोड स्थित एक खाद्य इकाई पर छापा मारा। अधिकारियों को वहां पनीर तैयार होता मिला और उत्पाद की गुणवत्ता तथा इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे माल को लेकर संदेह के बाद नमूने और अन्य जानकारी जुटाई गई। मामले की आगे जांच की जा रही है। (The Times of India)
इस कार्रवाई के बीच 'एनालॉग पनीर' एक बार फिर चर्चा में है। सवाल है कि यह असली पनीर से कैसे अलग है, क्या इसे बेचना कानूनी है और ग्राहक खरीदते समय इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं?
क्या होता है एनालॉग पनीर?
सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाने वाला डेयरी उत्पाद है। दूध को गर्म करने के बाद किसी उपयुक्त अम्लीय पदार्थ की मदद से प्रोटीन को जमाया जाता है और उससे पनीर तैयार होता है।
इसके विपरीत एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जिसे असली पनीर जैसा दिखने और इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन इसमें दूध के कुछ या सभी घटकों की जगह गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसमें उत्पाद के फॉर्मूलेशन के अनुसार वनस्पति तेल या वसा, मिल्क सॉलिड्स, प्लांट प्रोटीन, स्टार्च, स्टेबलाइजर और इमल्सीफायर जैसी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है। (Seniors Today)
असली पनीर से क्या अंतर?
असली पनीर की पहचान उसका दूध आधारित होना है। इसमें दूध से मिलने वाले प्रोटीन और वसा जैसे घटक होते हैं।
एनालॉग पनीर में इसके बजाय गैर-दुग्ध वसा या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से दोनों उत्पाद दिखने और पकाने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनकी संरचना और पोषण संबंधी प्रोफाइल समान नहीं होती।
एनालॉग उत्पादों की कीमत भी कई मामलों में कम हो सकती है, क्योंकि वनस्पति वसा और अन्य विकल्प दूध की तुलना में उत्पादन लागत कम कर सकते हैं।
क्या एनालॉग पनीर बेचना गैरकानूनी है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
एनालॉग पनीर अपने आप में हर जगह प्रतिबंधित उत्पाद नहीं है। केंद्र स्तर पर खाद्य नियमों के तहत ऐसे उत्पादों की बिक्री और लेबलिंग के लिए प्रावधान हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से स्पष्ट लेबलिंग पर जोर दिया जाता है ताकि ग्राहक को पता हो कि वह वास्तविक डेयरी पनीर के बजाय एनालॉग उत्पाद खरीद रहा है। (Facebook)
लेकिन किसी एनालॉग उत्पाद को असली पनीर बताकर बेचना या उसकी प्रकृति छिपाना उपभोक्ता को गुमराह करने वाला मामला बन सकता है।
इसके अलावा, हाल के दिनों में कई राज्यों ने अपने स्तर पर एनालॉग पनीर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इस उत्पाद को लेकर प्रतिबंध या कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। (Gujarat Samachar)
इसलिए किसी विशेष राज्य में इसकी बिक्री की वैधता वहां लागू मौजूदा आदेश और नियमों पर भी निर्भर करती है।
घर पर कैसे पहचानें?
घर पर केवल देखकर यह निश्चित रूप से बताना मुश्किल है कि पनीर असली है या एनालॉग। सबसे भरोसेमंद तरीका लेबल और सामग्री की सूची देखना है।
अगर पैकेट पर vegetable fat, vegetable oil, starch, plant protein, emulsifier या इसी तरह की गैर-दुग्ध सामग्री प्रमुख रूप से दर्ज है, तो ग्राहक को उत्पाद की प्रकृति समझने में मदद मिल सकती है।
ढीला या बिना लेबल वाला पनीर खरीदते समय पहचान और भी मुश्किल हो जाती है। केवल रंग, कीमत या मुलायमपन देखकर फैसला करना विश्वसनीय तरीका नहीं है।
क्या घर का आयोडीन टेस्ट सही है?
इंटरनेट पर पनीर में स्टार्च की मौजूदगी जांचने के लिए आयोडीन टेस्ट का सुझाव दिया जाता है। स्टार्च मौजूद होने पर आयोडीन के साथ गहरा नीला रंग दिखाई दे सकता है।
लेकिन ऐसा घरेलू परीक्षण यह साबित नहीं करता कि पूरा उत्पाद एनालॉग पनीर है। स्टार्च की मौजूदगी और एनालॉग पनीर की पहचान एक ही बात नहीं है।
इसलिए किसी घरेलू टेस्ट के आधार पर उत्पाद को 'नकली' घोषित करना सही नहीं होगा। संदिग्ध उत्पाद की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है।
स्वास्थ्य के लिए कितना चिंताजनक?
एनालॉग पनीर को सिर्फ इसलिए स्वतः 'जहरीला' या 'हानिकारक' कहना सही नहीं है। इसकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें कौन-सी सामग्री इस्तेमाल हुई है, उत्पाद किस मानक के तहत बनाया गया है और उसकी सही लेबलिंग हुई है या नहीं।
हालांकि, इसे असली पनीर का पोषणात्मक विकल्प मानना भी सही नहीं है। दोनों की सामग्री और पोषण संरचना अलग हो सकती है। (Aditya Birla Capital)
सबसे बड़ी उपभोक्ता चिंता तब पैदा होती है जब किसी व्यक्ति को वास्तविक डेयरी पनीर समझकर ऐसा उत्पाद बेच दिया जाए जिसकी प्रकृति अलग हो।
महासमुंद की कार्रवाई क्यों अहम?
महासमुंद में करीब 200 किलो संदिग्ध उत्पाद की जब्ती ने खाद्य कारोबार में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों ने उत्पाद के साथ-साथ इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी जुटाई है। (The Times of India)
अब जांच और नमूनों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि जब्त किया गया उत्पाद वास्तव में किस प्रकार का था और क्या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था।
ग्राहक क्या सावधानी बरतें?
पनीर खरीदते समय ग्राहक पैकेट पर ingredients, product name, manufacturer details और food licence information जरूर देखें।
अगर किसी उत्पाद को वास्तविक पनीर के रूप में बेचा जा रहा है लेकिन उसकी सामग्री में गैर-दुग्ध वसा या अन्य विकल्पों का उल्लेख मिलता है, तो उसे लेकर सवाल उठाना उचित है।
और सबसे महत्वपूर्ण बात—सिर्फ कम कीमत देखकर पनीर खरीदना हमेशा फायदे का सौदा नहीं हो सकता। उत्पाद की पहचान और लेबलिंग को समझना ही उपभोक्ता के लिए सबसे सुरक्षित पहला कदम है।
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