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छत्तीसगढ़ में 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कार्रवाई, 10 हजार नंबरों की पहचान
छत्तीसगढ़
साइबर फ्रॉड रोकने के लिए सरकार की सख्ती, एक नाम पर जारी अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन किए जा रहे ब्लॉक
छत्तीसगढ़ में मोबाइल सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए दूरसंचार विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। राज्य में ऐसे 10 हजार से ज्यादा लोगों की पहचान हुई है, जिनके नाम पर 9 से अधिक मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, तय सीमा से ज्यादा सिम कार्ड रखने वाले कनेक्शनों की जांच की जा रही है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिरिक्त नंबरों को बंद किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य एक ही पहचान पत्र के जरिए बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराकर किए जाने वाले साइबर अपराधों पर रोक लगाना है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे नंबरों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है। कई मामलों में लोगों को यह जानकारी भी नहीं होती कि उनके दस्तावेजों के आधार पर अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन जारी हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग भरोसे में अपना आधार कार्ड और बायोमेट्रिक जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में 2 करोड़ से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बल्क में जारी किए गए सिम कार्ड से जुड़े मामले भी सामने आ चुके हैं। रायपुर सहित कई जिलों में बिना जानकारी के मोबाइल नंबर जारी होने की शिकायतें दर्ज हुई हैं।
अपने नाम पर कितने SIM हैं, ऐसे करें जांच
केंद्र सरकार ने मोबाइल कनेक्शन की जानकारी और सुरक्षा के लिए संचार साथी पोर्टल की सुविधा उपलब्ध कराई है। इसके जरिए लोग यह पता कर सकते हैं कि उनके पहचान पत्र पर कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं। पोर्टल पर उपलब्ध TAFCOP (Telecom Analytics for Fraud Management and Consumer Protection) सुविधा के माध्यम से अपने नाम से जारी मोबाइल कनेक्शन की सूची देखी जा सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को कोई अनजान नंबर दिखाई देता है तो वह उसकी रिपोर्ट भी कर सकता है। इससे पहचान पत्र के गलत इस्तेमाल की जानकारी समय रहते मिल सकती है। कुछ विशेष क्षेत्रों जैसे असम, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में मोबाइल कनेक्शन रखने की सीमा अलग निर्धारित है, जहां एक व्यक्ति के लिए अधिकतम 6 सिम की व्यवस्था लागू है।
साइबर सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है जांच
आज मोबाइल नंबर बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर चल रहा फर्जी नंबर आर्थिक और डिजिटल अपराधों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से नए मोबाइल कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में एक साथ सिम जारी करने पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
टेलीकॉम नियमों के तहत बंद हो चुके मोबाइल नंबरों को दोबारा जारी करने से पहले भी समय सीमा तय की गई है। निष्क्रिय नंबरों को नए ग्राहक को देने से पहले 90 दिन का इंतजार जरूरी है। दूरसंचार विभाग लगातार मोबाइल कनेक्शनों की जांच कर रहा है ताकि पहचान पत्रों के गलत इस्तेमाल और फर्जी सिम नेटवर्क को नियंत्रित किया जा सके।
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