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Bharat Kapoor Death: 80 की उम्र में दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का निधन, मुंबई में ली अंतिम सांस
बॉलीवुड डेस्क
Bharat Kapoor Death से हिंदी सिनेमा और रंगमंच जगत को बड़ा झटका लगा है। चार दशक से अधिक लंबे करियर में अपनी सशक्त सहायक और नकारात्मक भूमिकाओं से पहचान बनाने वाले भरत कपूर का सोमवार को मुंबई में निधन हो गया। हिंदी सिनेमा के एक परिचित चेहरे का जाना फिल्म और थिएटर जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। भरत कपूर ने पर्दे पर भले कम समय पाया, लेकिन हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी।
मुंबई से आई इस दुखद खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को शोक में डाल दिया है। दिग्गज अभिनेता भरत Kapoor का 27 अप्रैल को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। अभिनेता पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी. करीबी मित्र और अभिनेता अवतार गिल ने उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भरत कपूर पिछले दो से तीन दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार दोपहर उनकी हालत गंभीर हुई और शाम तक उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। भरत कपूर के निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसने लंबे समय तक सहायक किरदारों और खलनायक की भूमिकाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
भरत कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार शाम मुंबई के सायन इलाके में परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में किया गया। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम विदाई में परिवार के सदस्यों के अलावा अभिनेता राकेश बेदी, अवतार गिल और थिएटर जगत से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए। 30 अप्रैल को उनकी प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी, जहां फिल्म और रंगमंच जगत के कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
लंबा अभिनय सफर
भरत कपूर हिंदी सिनेमा का वह चेहरा रहे, जिन्हें दर्शकों ने अक्सर मजबूत सहायक किरदारों, पुलिस अधिकारी, वकील और खलनायक की भूमिकाओं में देखा। 1970 के दशक में शुरू हुआ उनका अभिनय सफर चार दशकों तक चला। उन्होंने फिल्मों में भले मुख्य भूमिका कम निभाई, लेकिन हर छोटे-बड़े किरदार को प्रभावशाली बनाया।
उनकी चर्चित फिल्मों में नूरी, राम बलराम, लव स्टोरी, बाजार, गुलामी, आखिरी रास्ता, सत्यमेव जयते, स्वर्ग, खुदा गवाह, रंग, बरसात और साजन चले ससुराल जैसी फिल्में शामिल हैं। 1980 और 1990 के दशक में वे हिंदी फिल्मों के जाने-पहचाने चरित्र अभिनेताओं में गिने जाते थे।
टीवी और थिएटर पहचान
फिल्मों के साथ-साथ भरत कपूर ने टेलीविजन और थिएटर में भी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कैंपस, परंपरा, अमानत, तारा और भाग्यविधाता जैसे टीवी धारावाहिकों में काम किया। थिएटर से उनका गहरा जुड़ाव रहा और इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) के साथ भी वे लंबे समय तक सक्रिय रहे।
अधिकारियों के अनुसार, भरत कपूर का योगदान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने मंच, टेलीविजन और सिनेमा तीनों माध्यमों में अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि उनके निधन को हिंदी मनोरंजन जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है।
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Bharat Kapoor Death: 80 की उम्र में दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का निधन, मुंबई में ली अंतिम सांस
बॉलीवुड डेस्क
Bharat Kapoor Death से हिंदी सिनेमा और रंगमंच जगत को बड़ा झटका लगा है। चार दशक से अधिक लंबे करियर में अपनी सशक्त सहायक और नकारात्मक भूमिकाओं से पहचान बनाने वाले भरत कपूर का सोमवार को मुंबई में निधन हो गया। हिंदी सिनेमा के एक परिचित चेहरे का जाना फिल्म और थिएटर जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। भरत कपूर ने पर्दे पर भले कम समय पाया, लेकिन हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी।
मुंबई से आई इस दुखद खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को शोक में डाल दिया है। दिग्गज अभिनेता भरत Kapoor का 27 अप्रैल को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। अभिनेता पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी. करीबी मित्र और अभिनेता अवतार गिल ने उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भरत कपूर पिछले दो से तीन दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार दोपहर उनकी हालत गंभीर हुई और शाम तक उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। भरत कपूर के निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसने लंबे समय तक सहायक किरदारों और खलनायक की भूमिकाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
भरत कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार शाम मुंबई के सायन इलाके में परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में किया गया। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम विदाई में परिवार के सदस्यों के अलावा अभिनेता राकेश बेदी, अवतार गिल और थिएटर जगत से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए। 30 अप्रैल को उनकी प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी, जहां फिल्म और रंगमंच जगत के कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
लंबा अभिनय सफर
भरत कपूर हिंदी सिनेमा का वह चेहरा रहे, जिन्हें दर्शकों ने अक्सर मजबूत सहायक किरदारों, पुलिस अधिकारी, वकील और खलनायक की भूमिकाओं में देखा। 1970 के दशक में शुरू हुआ उनका अभिनय सफर चार दशकों तक चला। उन्होंने फिल्मों में भले मुख्य भूमिका कम निभाई, लेकिन हर छोटे-बड़े किरदार को प्रभावशाली बनाया।
उनकी चर्चित फिल्मों में नूरी, राम बलराम, लव स्टोरी, बाजार, गुलामी, आखिरी रास्ता, सत्यमेव जयते, स्वर्ग, खुदा गवाह, रंग, बरसात और साजन चले ससुराल जैसी फिल्में शामिल हैं। 1980 और 1990 के दशक में वे हिंदी फिल्मों के जाने-पहचाने चरित्र अभिनेताओं में गिने जाते थे।
टीवी और थिएटर पहचान
फिल्मों के साथ-साथ भरत कपूर ने टेलीविजन और थिएटर में भी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कैंपस, परंपरा, अमानत, तारा और भाग्यविधाता जैसे टीवी धारावाहिकों में काम किया। थिएटर से उनका गहरा जुड़ाव रहा और इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) के साथ भी वे लंबे समय तक सक्रिय रहे।
अधिकारियों के अनुसार, भरत कपूर का योगदान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने मंच, टेलीविजन और सिनेमा तीनों माध्यमों में अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि उनके निधन को हिंदी मनोरंजन जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है।
