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बजट बहस में पेट्रोल कीमतों पर टकराव: बंगाल में दिल्ली से महंगा ईंधन, GST पर दावों का खंडन
बिजनेस न्यूज
वित्त मंत्री का विपक्ष पर पलटवार; शिक्षा, स्वास्थ्य और दूध पर 0% GST की पुष्टि, राज्यों से VAT घटाने की अपील
संसद में बजट चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम बंगाल में पेट्रोल की कीमतें दिल्ली से अधिक होने पर राज्य सरकार की कर नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि आम जनता को राहत देनी है तो राज्य सरकारों को वैट घटाना चाहिए। वित्त मंत्री के अनुसार पश्चिम बंगाल में पेट्रोल और डीजल पर लगभग 25 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है, जिसके कारण कोलकाता में कीमतें दिल्ली से ₹10–11 प्रति लीटर तक अधिक हैं।
वित्त मंत्री ने जीएसटी को लेकर विपक्ष के आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूध, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर कोई GST लागू नहीं है। अंतिम संस्कार सेवाओं पर कर लगाए जाने के दावे को भी उन्होंने निराधार बताया। संसद में उन्होंने कहा कि जनता को भ्रमित करने के लिए गलत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।
बजट चर्चा के दौरान सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए सीतारमण ने रोजगार, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई कदमों की जानकारी दी। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 20 हजार से अधिक वेटनरी पेशेवरों के लिए रोजगार अवसर सृजित करने की योजना की घोषणा की गई। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 20 ‘आइकॉनिक टूरिज्म सेंटर्स’ विकसित किए जाएंगे और 10 हजार टूरिस्ट गाइड्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुधार पर जोर देते हुए सरकार ने ‘एग्री स्टैक’ प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से किसानों की भूमि, फसल और मिट्टी की गुणवत्ता का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे उर्वरक उपयोग और उत्पादन क्षमता में सुधार होगा। MSME क्षेत्र के लिए संशोधित परिभाषा और कौशल आधारित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना भी बजट का हिस्सा है।
वित्तीय प्रावधानों की बात करें तो सरकार ने राज्यों को 50 वर्ष की अवधि के लिए ब्याज मुक्त ऋण सहायता योजना (SASCI) को बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। अनुमानित सकल कर राजस्व 44.04 लाख करोड़ रुपये और कुल सरकारी व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान व्यक्त किया गया। केंद्र ने राज्यों को करों में उनके हिस्से के रूप में 41 प्रतिशत हस्तांतरण जारी रखने की बात दोहराई, जिसे अगले वित्त वर्ष में 25.44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
विश्लेषकों का मानना है कि बजट बहस का केंद्र कर संरचना, संघीय वित्तीय संबंध और महंगाई से जुड़ी नीतियां रही हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार के व्यापक परिदृश्य में यह बहस राजकोषीय संतुलन और राज्य-केंद्र संबंधों की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। सरकार ने दीर्घकालिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए सेमीकंडक्टर, बायो-फार्मा और कार्बन कैप्चर तकनीक में निवेश को भविष्य की आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया।
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