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पांच राज्यों के नतीजों में बड़ा सियासी भूकंप: बंगाल में पहली बार भाजपा सत्ता में, असम में हैट्रिक, तमिलनाडु में विजय का उभार
DEVENDRA PATEL
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए तो सबसे बड़ा झटका पश्चिम बंगाल से सामने आया, जहां पहली बार भाजपा ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। सुबह काउंटिंग शुरू होते ही रुझानों ने साफ संकेत दे दिए थे कि इस बार तस्वीर अलग रहने वाली है। दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि तृणमूल कांग्रेस का गढ़ दरकता दिखने लगा। भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70 फीसदी स्ट्राइक रेट हासिल किया, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी 81 सीटों पर सिमट गई। खुद ममता बनर्जी अपनी सीट नहीं बचा सकीं, यह हार सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक भी मानी जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक सरकार के 12 मंत्री भी चुनाव हार गए, जिससे यह साफ हुआ कि नाराजगी सिर्फ एक चेहरे तक सीमित नहीं थी, बल्कि नीचे तक फैली हुई थी। ग्राउंड पर कई जगहों से यह भी सुनने में आया कि इस बार वोटिंग पैटर्न बदला हुआ था, खासकर सीमावर्ती इलाकों और शहरी सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली।
भाजपा ने इस बार बंगाल में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा था, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कमान किसे सौंपी जाएगी। पार्टी के भीतर कई नाम चर्चा में हैं और यह भी कहा जा रहा है कि किसी महिला नेता को आगे लाया जा सकता है। चुनावी रणनीति पर नजर डालें तो इस बार केंद्रीय नेतृत्व पूरी ताकत से मैदान में उतरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई रैलियां और रोड शो किए, जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया वहां पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा। अमित शाह ने भी करीब दो हफ्ते राज्य में रहकर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया। ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल पर काम हुआ, हर कार्यकर्ता को सीमित वोटरों की जिम्मेदारी दी गई। सूत्रों के मुताबिक यही माइक्रो मैनेजमेंट कई सीटों पर निर्णायक साबित हुआ। दूसरी तरफ टीएमसी की योजनाएं जैसे ‘लक्ष्मी भंडार’ महिलाओं में लोकप्रिय थीं, लेकिन इस बार उसका असर उतना नहीं दिखा जितना पिछले चुनाव में देखा गया था।
तमिलनाडु में भी नतीजों ने सबको चौंकाया। अभिनेता विजय की पार्टी ने जिस तरह से प्रदर्शन किया, उसने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिला दिया है। दो साल पहले बनी पार्टी ने 50 साल से ज्यादा पुरानी DMK और AIADMK दोनों को पीछे छोड़ दिया। चेन्नई में देर शाम तक जश्न का माहौल रहा, लेकिन दूसरी तरफ DMK खेमे में सन्नाटा नजर आया। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट हार गए, जिससे यह हार और बड़ी मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि उत्तर और तटीय इलाकों में विजय की पार्टी को जबरदस्त समर्थन मिला, वहीं दक्षिण में DMK कुछ हद तक टिकी रही।
केरल में दस साल बाद सत्ता बदली और कांग्रेस ने वापसी कर ली। यहां लेफ्ट सरकार को सीधा नुकसान हुआ और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी अपनी सीट नहीं बचा सके। यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब देश में कहीं भी लेफ्ट की सरकार नहीं बची है। वहीं असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ किया है। यहां पार्टी ने 82 सीटें जीतकर बहुमत से काफी आगे बढ़त बनाई। खास बात यह रही कि मौजूदा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा, जो आम तौर पर कम ही देखने को मिलता है। अपर असम और बराक वैली में भाजपा का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा, जबकि कांग्रेस सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित रह गई।
पुडुचेरी में भी एनडीए ने वापसी की है और रंगासामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। कुल मिलाकर इन चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया है। कहीं सत्ता बदली, कहीं पुराने चेहरे हटे और कुछ जगहों पर नई राजनीति उभरती दिखी। आने वाले दिनों में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ नजर आ सकता है, फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकारें किस दिशा में काम शुरू करती हैं।
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DEVENDRA PATEL
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए तो सबसे बड़ा झटका पश्चिम बंगाल से सामने आया, जहां पहली बार भाजपा ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। सुबह काउंटिंग शुरू होते ही रुझानों ने साफ संकेत दे दिए थे कि इस बार तस्वीर अलग रहने वाली है। दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि तृणमूल कांग्रेस का गढ़ दरकता दिखने लगा। भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70 फीसदी स्ट्राइक रेट हासिल किया, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी 81 सीटों पर सिमट गई। खुद ममता बनर्जी अपनी सीट नहीं बचा सकीं, यह हार सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक भी मानी जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक सरकार के 12 मंत्री भी चुनाव हार गए, जिससे यह साफ हुआ कि नाराजगी सिर्फ एक चेहरे तक सीमित नहीं थी, बल्कि नीचे तक फैली हुई थी। ग्राउंड पर कई जगहों से यह भी सुनने में आया कि इस बार वोटिंग पैटर्न बदला हुआ था, खासकर सीमावर्ती इलाकों और शहरी सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली।
भाजपा ने इस बार बंगाल में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा था, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कमान किसे सौंपी जाएगी। पार्टी के भीतर कई नाम चर्चा में हैं और यह भी कहा जा रहा है कि किसी महिला नेता को आगे लाया जा सकता है। चुनावी रणनीति पर नजर डालें तो इस बार केंद्रीय नेतृत्व पूरी ताकत से मैदान में उतरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई रैलियां और रोड शो किए, जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया वहां पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा। अमित शाह ने भी करीब दो हफ्ते राज्य में रहकर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया। ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल पर काम हुआ, हर कार्यकर्ता को सीमित वोटरों की जिम्मेदारी दी गई। सूत्रों के मुताबिक यही माइक्रो मैनेजमेंट कई सीटों पर निर्णायक साबित हुआ। दूसरी तरफ टीएमसी की योजनाएं जैसे ‘लक्ष्मी भंडार’ महिलाओं में लोकप्रिय थीं, लेकिन इस बार उसका असर उतना नहीं दिखा जितना पिछले चुनाव में देखा गया था।
तमिलनाडु में भी नतीजों ने सबको चौंकाया। अभिनेता विजय की पार्टी ने जिस तरह से प्रदर्शन किया, उसने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिला दिया है। दो साल पहले बनी पार्टी ने 50 साल से ज्यादा पुरानी DMK और AIADMK दोनों को पीछे छोड़ दिया। चेन्नई में देर शाम तक जश्न का माहौल रहा, लेकिन दूसरी तरफ DMK खेमे में सन्नाटा नजर आया। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट हार गए, जिससे यह हार और बड़ी मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि उत्तर और तटीय इलाकों में विजय की पार्टी को जबरदस्त समर्थन मिला, वहीं दक्षिण में DMK कुछ हद तक टिकी रही।
केरल में दस साल बाद सत्ता बदली और कांग्रेस ने वापसी कर ली। यहां लेफ्ट सरकार को सीधा नुकसान हुआ और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी अपनी सीट नहीं बचा सके। यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब देश में कहीं भी लेफ्ट की सरकार नहीं बची है। वहीं असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का रास्ता साफ किया है। यहां पार्टी ने 82 सीटें जीतकर बहुमत से काफी आगे बढ़त बनाई। खास बात यह रही कि मौजूदा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा, जो आम तौर पर कम ही देखने को मिलता है। अपर असम और बराक वैली में भाजपा का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा, जबकि कांग्रेस सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित रह गई।
पुडुचेरी में भी एनडीए ने वापसी की है और रंगासामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। कुल मिलाकर इन चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया है। कहीं सत्ता बदली, कहीं पुराने चेहरे हटे और कुछ जगहों पर नई राजनीति उभरती दिखी। आने वाले दिनों में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ नजर आ सकता है, फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकारें किस दिशा में काम शुरू करती हैं।
