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कोविड वैक्सीन पर विदेश मंत्री जयशंकर का तंज, बोले- एक देश ने स्टॉक कर रखी थी अपनी जनसंख्या से 8 गुना ज्यादा वैक्सीन
Digital Desk
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोविड काल में वैक्सीन असमानता पर टिप्पणी की, भारत की वैश्विक भूमिका को बताया अहम।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक बयान इन दिनों सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर की तैयारियों और वैश्विक असमानता पर बिना नाम लिए एक विकसित देश पर तंज कसा है। विदेश मंत्री S Jaishankar के बयान के मुताबिक उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जहां कुछ देश जरूरत से कई गुना ज्यादा वैक्सीन जमा कर रहे थे, वहीं भारत जैसे देशों ने वैश्विक जिम्मेदारी निभाते हुए कई देशों तक वैक्सीन पहुंचाई। यह बयान उन्होंने दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां वे विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
जयशंकर ने अपने संबोधन में एक ऐसा उदाहरण दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा फिर से तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय एक ऐसा देश था, जिसने अपनी जनसंख्या से लगभग 8 गुना अधिक वैक्सीन स्टॉक कर ली थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में यह जरूर कहा कि वह कोई विकासशील देश नहीं था। उनके इस बयान को कूटनीतिक अंदाज में दिया गया तंज माना जा रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वैक्सीन वितरण की असमानता की ओर संकेत करता है। उस समय जब दुनिया के कई देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहे थे, तब कुछ देशों के पास जरूरत से ज्यादा भंडारण की स्थिति सामने आई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बहस भी पैदा हुई थी।
विदेश मंत्री ने आगे भारत की भूमिका को भी विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने महामारी के कठिन समय में सिर्फ अपने नागरिकों का ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों का भी ध्यान रखा। भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल के तहत दुनिया के दर्जनों देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और कई अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों का हिस्सा बना। उन्होंने कहा कि यह भारत की विदेश नीति का हिस्सा रहा है कि राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ वैश्विक जिम्मेदारी को भी समान रूप से निभाया जाए। इस दौरान उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक अच्छे साझेदार की पहचान यही होती है कि वह अपने हितों और वैश्विक कल्याण के बीच संतुलन बना सके।
सूत्रों के अनुसार, यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंचों पर फिर से महामारी प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला की तैयारी को लेकर चर्चा चल रही है। सूरीनाम यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत और सूरीनाम के रिश्तों पर भी जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी और दोनों देश मिलकर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। कार्यक्रम के दौरान माहौल काफी गंभीर और कूटनीतिक रहा, लेकिन जयशंकर के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर महामारी के समय की नीतियों पर फिर से बहस छेड़ दी है।
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कोविड वैक्सीन पर विदेश मंत्री जयशंकर का तंज, बोले- एक देश ने स्टॉक कर रखी थी अपनी जनसंख्या से 8 गुना ज्यादा वैक्सीन
Digital Desk
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक बयान इन दिनों सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर की तैयारियों और वैश्विक असमानता पर बिना नाम लिए एक विकसित देश पर तंज कसा है। विदेश मंत्री S Jaishankar के बयान के मुताबिक उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जहां कुछ देश जरूरत से कई गुना ज्यादा वैक्सीन जमा कर रहे थे, वहीं भारत जैसे देशों ने वैश्विक जिम्मेदारी निभाते हुए कई देशों तक वैक्सीन पहुंचाई। यह बयान उन्होंने दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां वे विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
जयशंकर ने अपने संबोधन में एक ऐसा उदाहरण दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा फिर से तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय एक ऐसा देश था, जिसने अपनी जनसंख्या से लगभग 8 गुना अधिक वैक्सीन स्टॉक कर ली थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में यह जरूर कहा कि वह कोई विकासशील देश नहीं था। उनके इस बयान को कूटनीतिक अंदाज में दिया गया तंज माना जा रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वैक्सीन वितरण की असमानता की ओर संकेत करता है। उस समय जब दुनिया के कई देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहे थे, तब कुछ देशों के पास जरूरत से ज्यादा भंडारण की स्थिति सामने आई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बहस भी पैदा हुई थी।
विदेश मंत्री ने आगे भारत की भूमिका को भी विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने महामारी के कठिन समय में सिर्फ अपने नागरिकों का ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों का भी ध्यान रखा। भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल के तहत दुनिया के दर्जनों देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और कई अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों का हिस्सा बना। उन्होंने कहा कि यह भारत की विदेश नीति का हिस्सा रहा है कि राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ वैश्विक जिम्मेदारी को भी समान रूप से निभाया जाए। इस दौरान उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक अच्छे साझेदार की पहचान यही होती है कि वह अपने हितों और वैश्विक कल्याण के बीच संतुलन बना सके।
सूत्रों के अनुसार, यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंचों पर फिर से महामारी प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला की तैयारी को लेकर चर्चा चल रही है। सूरीनाम यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत और सूरीनाम के रिश्तों पर भी जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी और दोनों देश मिलकर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। कार्यक्रम के दौरान माहौल काफी गंभीर और कूटनीतिक रहा, लेकिन जयशंकर के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर महामारी के समय की नीतियों पर फिर से बहस छेड़ दी है।
