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अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा छोड़ चांद की ओर बढ़े, 34,000 km/h की रफ्तार पर आर्टेमिस II मिशन का रोमांच
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अंतरिक्ष यात्री पांचवें दिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेंगे; मिशन के दौरान पृथ्वी से 402,336 किमी तक दूरी तय करने की उम्मीद
नासा का आर्टेमिस II मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। 1 अप्रैल को केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किए गए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के तहत ओरियन कैप्सूल में सवार चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन—पृथ्वी की कक्षा छोड़ते हुए चांद की ओर बढ़े। शुक्रवार सुबह 5:19 बजे यान ने ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ पूरा किया, जिससे इसकी रफ्तार 34,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ गई।
इस प्रक्रिया के दौरान यान को ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजैक्टरी’ पर रखा गया है, यानी यह न्यूटन के गति के पहले नियम के अनुसार आगे बढ़ रहा है और रास्ते में केवल छोटे-मोटे सुधारों के लिए ही इंजन फायर होंगे। मिशन में किसी भी मामूली चूक से यान चांद से टकरा सकता है या अनंत अंतरिक्ष में भटक सकता है।
नासा के आर्टेमिस डेवलपमेंट हेड डॉ. लोरी ग्लेज ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और कैप्सूल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट फ्लाइट है और टीम स्पेसक्राफ्ट से अधिक से अधिक डेटा जुटा रही है।
अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कमांडर रीड वाइसमैन ने अंतरिक्ष में सोने का अनुभव साझा किया, जबकि क्रिस्टीना कोच ने ओरियन कैप्सूल के टॉयलेट में शुरुआती तकनीकी समस्याओं को ठीक किया। वाइसमैन ने बताया कि पृथ्वी का दृश्य अंतरिक्ष से अविश्वसनीय था, जिसे सभी यात्री लंबे समय तक देखते रहे।
मिशन के पांचवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा और इसकी गति फिर से बढ़ेगी। छठे दिन अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह से 6,400 किलोमीटर ऊपर से गुजरेंगे, जहां चंद्रमा इतना बड़ा दिखाई देगा जैसे हाथ के पास बास्केटबॉल रखा हो। इस दौरान पृथ्वी के साथ यान का संपर्क लगभग 50 मिनट तक कट जाएगा।
पूरा मिशन लगभग 10 दिनों का है। सातवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके पृथ्वी की ओर लौटेगा, और 11 अप्रैल को सुबह 6:36 बजे प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री कुल लगभग 11.02 लाख किलोमीटर का सफर तय करेंगे।
आर्टेमिस II मिशन, अपोलो-13 के मार्ग के समान, मानव अंतरिक्ष यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित होगा। नासा इस यात्रा से अंतरिक्ष अन्वेषण और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा एकत्र कर रहा है।
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अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा छोड़ चांद की ओर बढ़े, 34,000 km/h की रफ्तार पर आर्टेमिस II मिशन का रोमांच
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नासा का आर्टेमिस II मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। 1 अप्रैल को केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किए गए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के तहत ओरियन कैप्सूल में सवार चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन—पृथ्वी की कक्षा छोड़ते हुए चांद की ओर बढ़े। शुक्रवार सुबह 5:19 बजे यान ने ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ पूरा किया, जिससे इसकी रफ्तार 34,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ गई।
इस प्रक्रिया के दौरान यान को ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजैक्टरी’ पर रखा गया है, यानी यह न्यूटन के गति के पहले नियम के अनुसार आगे बढ़ रहा है और रास्ते में केवल छोटे-मोटे सुधारों के लिए ही इंजन फायर होंगे। मिशन में किसी भी मामूली चूक से यान चांद से टकरा सकता है या अनंत अंतरिक्ष में भटक सकता है।
नासा के आर्टेमिस डेवलपमेंट हेड डॉ. लोरी ग्लेज ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और कैप्सूल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट फ्लाइट है और टीम स्पेसक्राफ्ट से अधिक से अधिक डेटा जुटा रही है।
अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कमांडर रीड वाइसमैन ने अंतरिक्ष में सोने का अनुभव साझा किया, जबकि क्रिस्टीना कोच ने ओरियन कैप्सूल के टॉयलेट में शुरुआती तकनीकी समस्याओं को ठीक किया। वाइसमैन ने बताया कि पृथ्वी का दृश्य अंतरिक्ष से अविश्वसनीय था, जिसे सभी यात्री लंबे समय तक देखते रहे।
मिशन के पांचवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा और इसकी गति फिर से बढ़ेगी। छठे दिन अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह से 6,400 किलोमीटर ऊपर से गुजरेंगे, जहां चंद्रमा इतना बड़ा दिखाई देगा जैसे हाथ के पास बास्केटबॉल रखा हो। इस दौरान पृथ्वी के साथ यान का संपर्क लगभग 50 मिनट तक कट जाएगा।
पूरा मिशन लगभग 10 दिनों का है। सातवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके पृथ्वी की ओर लौटेगा, और 11 अप्रैल को सुबह 6:36 बजे प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री कुल लगभग 11.02 लाख किलोमीटर का सफर तय करेंगे।
आर्टेमिस II मिशन, अपोलो-13 के मार्ग के समान, मानव अंतरिक्ष यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित होगा। नासा इस यात्रा से अंतरिक्ष अन्वेषण और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा एकत्र कर रहा है।
