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ईरान के तटीय इलाकों में धमाकों की खबर, सऊदी एयरबेस के पास भी विस्फोट
Digital Desk
ईरान के क़ेशम, सीरीक और मिनाब में धमाकों की खबर है। ईरानी मीडिया ने सऊदी अरब के किंग फहद एयर बेस और ताइफ में भी विस्फोटों की रिपोर्ट दी।
ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में गुरुवार को कई धमाकों की खबर सामने आई है। क़ेशम द्वीप, सीरीक और मिनाब में विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देने की सूचना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के साथ खाड़ी क्षेत्र में भी सैन्य तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने बताया कि सीरीक और मिनाब काउंटी के तटीय इलाकों में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हार्मोजगान प्रांत के अधिकारियों ने कहा कि क़ेशम द्वीप के आसपास सुनी गई आवाजें समुद्र की दिशा से आती प्रतीत हुईं।
इसी बीच, ईरानी मीडिया ने अरब और सऊदी मीडिया के हवाले से सऊदी अरब में भी विस्फोटों की खबर दी। रिपोर्टों में किंग फहद एयर बेस और ताइफ के आसपास धमाकों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन घटनाओं के कारण और इनके सैन्य हमलों से जुड़े होने की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के तट पर धमाकों की खबर
दक्षिणी ईरान के तटीय क्षेत्रों से सबसे पहले धमाकों की खबरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से कई विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देने की जानकारी दी गई।
IRIB के अनुसार, सीरीक और मिनाब में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, हार्मोजगान के अधिकारियों ने क़ेशम के आसपास सुनी गई आवाजों का स्रोत समुद्र बताया।
यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान का दक्षिणी तट ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब है। मौजूदा संघर्ष के बीच यह इलाका सैन्य और समुद्री गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
क़ेशम द्वीप पर बढ़ी चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक स्थित क़ेशम द्वीप भी उन स्थानों में शामिल है जहां असामान्य आवाजों की सूचना मिली।
स्थानीय अधिकारियों की ओर से आवाजों के समुद्र से आने की प्रारंभिक जानकारी दी गई है। हालांकि, किसी आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि घटना किसी हमले, किसी सैन्य अवरोधन या समुद्री गतिविधि से जुड़ी थी।
क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ा हुआ है।
सऊदी एयरबेस का भी जिक्र
ईरानी सरकारी मीडिया ने अलग-अलग रिपोर्टों में किंग फहद एयर बेस के आसपास विस्फोट होने की जानकारी दी।
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA ने सऊदी मीडिया के हवाले से ताइफ में भी धमाकों की आवाजें सुनाई देने की रिपोर्ट दी। कुछ रिपोर्टों में इलाके में कम से कम दो तेज धमाकों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, प्रकाशन के समय तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब ईरान समर्थित हूती बलों और सऊदी अरब के बीच भी तनाव बढ़ा हुआ है।
सऊदी अरब पर नए खतरे
सऊदी अरब में विस्फोटों की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब हूती बलों और रियाद के बीच सैन्य तनाव बढ़ रहा है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बुधवार को कहा था कि हूती बलों ने लगातार दूसरे दिन अबहा, खमिस मुशैत और जिजान को निशाना बनाया।
इससे पहले हुए हमलों में लोगों के घायल होने और तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।
सऊदी अरब ने अपनी जमीन और राष्ट्रीय संपत्तियों को निशाना बनाने वाले हमलों का जवाब देने की चेतावनी दी है। इससे आशंका बढ़ी है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर दूसरे क्षेत्रीय देशों और प्रॉक्सी समूहों तक फैल सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष
नए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि तनाव केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है।
ईरान ने बुधवार को दावा किया था कि अमेरिका द्वारा उसके पांच तेल टैंकरों को नष्ट किए जाने के बाद उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 10 जहाजों पर हमला किया।
इसके अलावा, एक समुद्री सुरक्षा सूत्र ने संयुक्त अरब अमीरात के खोर फक्कान बंदरगाह पर एक LNG टैंकर को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी।
इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
तेल बाजार पर दबाव
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।
यह समुद्री मार्ग लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण रहा है। किसी लंबे व्यवधान का असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत भी शामिल है।
अगले कदम पर अनिश्चितता
ईरान और सऊदी अरब से सामने आई धमाकों की रिपोर्ट ने पहले से अस्थिर क्षेत्रीय स्थिति को और जटिल बना दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद समाप्त हो सकता है। हालांकि, इस समय ऐसी कोई पुष्टि की गई समयसीमा या समझौता मौजूद नहीं है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी इतनी नहीं है कि ईरान और सऊदी अरब में रिपोर्ट किए गए धमाकों को किसी समन्वित सैन्य कार्रवाई से जोड़ा जा सके।
समुद्र और क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर तनाव जारी रहने के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन घटनाओं के बाद अमेरिका, ईरान या क्षेत्रीय ताकतों की ओर से कोई नई सैन्य कार्रवाई होती है।
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