- Hindi News
- देश विदेश
- ईरान ने अमेरिकी टैंकर हमलों की निंदा की, UN से तत्काल कार्रवाई की मांग
ईरान ने अमेरिकी टैंकर हमलों की निंदा की, UN से तत्काल कार्रवाई की मांग
Digital Desk
ईरान ने पांच तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग की और इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
ईरान ने अपने तेल टैंकरों पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है। तेहरान ने वॉशिंगटन पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और UN महासचिव से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, फारस की खाड़ी और ओमान सागर में ईरानी वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया जाना अमेरिकी सैन्य आक्रामकता, समुद्री नाकेबंदी और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी सेना के उस दावे के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी बलों ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई।
तेहरान ने हमलों को बताया आक्रामक
ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई को ईरानी वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ आक्रामक कदम बताया।
तेहरान का कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई UN Charter और International Law का उल्लंघन है। ईरान ने चेतावनी दी कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि घटनाक्रम का प्रभाव केवल मौजूदा संघर्ष तक सीमित नहीं है और इससे क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए व्यापक खतरा पैदा हो सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्रालय का बयान भारत में ईरानी दूतावास ने भी साझा किया।
ईरान ने आत्मरक्षा का दिया हवाला
तेहरान ने अमेरिकी हमलों के बाद अपनी सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा के अधिकार से जोड़कर पेश किया।
ईरान का कहना है कि उसके सशस्त्र बलों ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया।
ईरानी बलों ने जॉर्डन के अल-अज्राक के पास एक अमेरिकी-संबद्ध सैन्य अड्डे की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का भी दावा किया।
जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 20 में से 18 मिसाइलों को रोक दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी कर्मियों के बीच किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई।
अमेरिका ने कार्रवाई का बचाव किया
वॉशिंगटन ने टैंकरों पर कार्रवाई को वाणिज्यिक जहाजों पर बिना उकसावे के हमला नहीं, बल्कि ईरानी सैन्य हमलों की प्रतिक्रिया बताया है।
US Central Command के अनुसार, ईरानी बलों ने लगातार दो दिनों तक अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके बाद अमेरिकी बलों ने पांच ईरानी टैंकरों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी नौसैनिक बलों पर हमले की कोशिश जारी रहने पर वॉशिंगटन जवाब देता रहेगा।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों से स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है।
ईरान ने 10 जहाजों पर हमले का दावा किया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 10 जहाजों को निशाना बनाया।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल थे। ईरानी पक्ष ने इन जहाजों को नियमों का पालन नहीं करने वाला बताया।
इस घटनाक्रम में कम से कम एक नाविक की मौत और एक अन्य के लापता होने की सूचना सामने आई। हालांकि, अमेरिका ने अपने जहाजों पर ईरानी हमलों को विफल बताया है।
समुद्री अधिकारियों ने उत्तरी खाड़ी और ओमान सागर में कई वाणिज्यिक जहाजों को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी दी है।
होर्मुज बना संघर्ष का केंद्र
मौजूदा संघर्ष में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण सैन्य और आर्थिक फ्लैशपॉइंट बन गया है।
युद्ध से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल और गैस आपूर्ति इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरती थी। लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने के बाद समुद्री यातायात में भारी कमी आई है और तेल का प्रवाह भी युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे चला गया है।
ईरान ने आगे भी समुद्री कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों और शिपिंग नेटवर्क पर दबाव बनाए हुए है।
लंबे समय तक व्यवधान रहने पर एशिया समेत दुनिया की कई ऊर्जा-आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
तेल की कीमत 100 डॉलर पार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है।
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। बाजार में तेजी की मुख्य वजह खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार की शुरुआत में ब्रेंट करीब 101.34 डॉलर प्रति बैरल, जबकि अमेरिकी WTI करीब 96.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज के आसपास लंबे समय तक व्यवधान रहने पर ऊर्जा कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
UN पर बढ़ा कार्रवाई का दबाव
ईरान की UN अपील ऐसे समय आई है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच सैन्य टकराव पिछले कई महीनों के सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने UN Security Council और महासचिव से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के कथित उल्लंघनों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के सामने चुनौती यह होगी कि दोनों पक्ष अपनी सैन्य कार्रवाइयों को अलग-अलग आधार पर उचित ठहरा रहे हैं।
ईरान ने आगे जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने तत्काल प्राथमिकता संघर्ष को और अधिक देशों तक फैलने से रोकना है।
साथ ही, खाड़ी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और व्यापक मध्य पूर्व ऊर्जा गलियारे में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनी हुई है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

