राजस्थान में "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (ABNP) की ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ का आगाज़, दो माह तक चलेगा प्रदेशव्यापी पदयात्रा अभियान 

डिजिटल डेस्क

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अर्जुन भारत नेशनल पार्टी का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाना

जयपुर, 29 मार्च। राजस्थान की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) ने जयपुर से ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ नामक अपने राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत कर दी। पार्टी मुख्यालय से निकाली गई यह पदयात्रा आगामी लगभग दो महीनों तक राजस्थान के विभिन्न जिलों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगी। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और सनातन परंपराओं के प्रति जन-जागरण फैलाना है।
यात्रा के शुभारंभ पर पार्टी प्रवक्ता अंजलि जैन ने कहा कि अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) लंबे समय से प्रदेश में हिंदुत्व आधारित सामाजिक-राजनीतिक चेतना को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है और यह पदयात्रा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि पार्टी मानती है कि हिंदू समाज को वैचारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर अधिक संगठित होने की आवश्यकता है, और ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ इसी उद्देश्य को लेकर शुरू की गई है।

अंजलि जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“हमारी यह यात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने का प्रयास है। हम राजस्थान के हर हिस्से तक पहुंचकर सनातन धर्म, सांस्कृतिक विरासत और हिंदू एकता का संदेश देना चाहते हैं। आने वाले समय में यह अभियान दूसरे राज्यों में भी ले जाया जा सकता है।”

पार्टी नेताओं के अनुसार, इस पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर जनसभाएं, स्थानीय संवाद, सामाजिक संपर्क कार्यक्रम और जनजागरण अभियान चलाएंगे।"अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का दावा है कि यह यात्रा न केवल संगठन को मजबूती देगी, बल्कि राजस्थान में पार्टी के जनाधार को भी विस्तार देगी।

विराज जन पार्टी" से अलग वैचारिक राह पर बनी नई पार्टी 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अर्जुन भारत नेशनल पार्टी का उदय राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यह पार्टी उन नेताओं के समूह से बनी, जो कभी विराज जन पार्टी (VRJP) से जुड़े रहे थे। विराज जन पार्टी, जिसका नेतृत्व प्रशांत कुमार सैनी कर रहे हैं, लंबे समय से स्वयं को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाला राजनीतिक मंच बताती रही है। लेकिन पार्टी के भीतर समय-समय पर उभरे मतभेदों और वैचारिक असहमति के चलते कुछ प्रमुख सदस्यों ने अलग होकर "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का गठन किया।
जहां एक ओर "विराज जन पार्टी" का सार्वजनिक रुख सेक्युलर राजनीति पर आधारित माना जाता है, वहीं एबीएनपी ने स्वयं को स्पष्ट रूप से हिंदू हित, हिंदू एकता और सनातन धर्म के संरक्षण के एजेंडे के साथ स्थापित किया है। यही वैचारिक अंतर दोनों दलों के बीच मूल विभाजन का कारण माना जा रहा है।

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अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने प्रशांत कुमार सैनी के योगदान को बताया निर्णायक 

हालांकि आज दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने अपने गठन के शुरुआती दौर में प्रशांत कुमार सैनी की भूमिका को सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण माना है। पार्टी प्रवक्ता अंजलि जैन ने कहा कि नई पार्टी के निर्माण के समय प्रशांत कुमार सैनी का सहयोग कई स्तरों पर मिला, जिसने संगठन को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता, कानूनी मार्गदर्शन, संगठनात्मक सलाह और आवश्यक औपचारिकताओं (कम्प्लायंस) से जुड़े सुझाव देने में प्रशांत कुमार सैनी ने उल्लेखनीय योगदान दिया। "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (एबीएनपी) के अनुसार, इसी कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि इस विशेष संदर्भ में प्रशांत कुमार सैनी को "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का आधिकारिक संस्थापक भी माना जा सकता है।
अंजलि जैन ने कहा,
“हम वैचारिक रूप से आज अलग हैं, लेकिन पार्टी निर्माण के प्रारंभिक दौर में प्रशांत कुमार सैनी ने जो सहयोग दिया, उसे नकारा नहीं जा सकता। संगठन खड़ा करने में उनकी भूमिका इतनी अहम रही कि इस संदर्भ में उन्हें "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (ABNP) का आधिकारिक संस्थापक भी माना जा सकता है।”

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पुराने संबंध, लेकिन चुनावी रणनीति अलग 

'अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (एबीएनपी) ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अतीत में मिले सहयोग के बावजूद भविष्य की चुनावी राजनीति में वह पूरी तरह स्वतंत्र रुख अपनाएगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि "विराज जन पार्टी" (VRJP) और ABNP की वैचारिक दिशा अलग-अलग है, इसलिए किसी प्रकार के चुनावी समझौते या नरमी की संभावना नहीं है। पार्टी का दावा है कि वह राजस्थान की राजनीति में एक स्वतंत्र, स्पष्ट और आक्रामक वैचारिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।

यात्रा के माध्यम से पार्टी ने प्रदेशभर के नागरिकों, विशेष रूप से हिंदू समाज, से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और सनातन धर्म, सांस्कृतिक गौरव तथा सामाजिक एकजुटता के संदेश को आगे बढ़ाएं। अर्जुन भारत नेशनल पार्टी का मानना है कि यह यात्रा आने वाले महीनों में राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस और नई ध्रुवीकरण रेखाएं भी खींच सकती है।

Edited By: ANKITA

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30 Mar 2026 By ANKITA

राजस्थान में "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (ABNP) की ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ का आगाज़, दो माह तक चलेगा प्रदेशव्यापी पदयात्रा अभियान 

डिजिटल डेस्क

जयपुर, 29 मार्च। राजस्थान की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) ने जयपुर से ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ नामक अपने राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत कर दी। पार्टी मुख्यालय से निकाली गई यह पदयात्रा आगामी लगभग दो महीनों तक राजस्थान के विभिन्न जिलों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगी। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और सनातन परंपराओं के प्रति जन-जागरण फैलाना है।
यात्रा के शुभारंभ पर पार्टी प्रवक्ता अंजलि जैन ने कहा कि अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) लंबे समय से प्रदेश में हिंदुत्व आधारित सामाजिक-राजनीतिक चेतना को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है और यह पदयात्रा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि पार्टी मानती है कि हिंदू समाज को वैचारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर अधिक संगठित होने की आवश्यकता है, और ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ इसी उद्देश्य को लेकर शुरू की गई है।

अंजलि जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“हमारी यह यात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने का प्रयास है। हम राजस्थान के हर हिस्से तक पहुंचकर सनातन धर्म, सांस्कृतिक विरासत और हिंदू एकता का संदेश देना चाहते हैं। आने वाले समय में यह अभियान दूसरे राज्यों में भी ले जाया जा सकता है।”

पार्टी नेताओं के अनुसार, इस पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर जनसभाएं, स्थानीय संवाद, सामाजिक संपर्क कार्यक्रम और जनजागरण अभियान चलाएंगे।"अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का दावा है कि यह यात्रा न केवल संगठन को मजबूती देगी, बल्कि राजस्थान में पार्टी के जनाधार को भी विस्तार देगी।

विराज जन पार्टी" से अलग वैचारिक राह पर बनी नई पार्टी 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अर्जुन भारत नेशनल पार्टी का उदय राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यह पार्टी उन नेताओं के समूह से बनी, जो कभी विराज जन पार्टी (VRJP) से जुड़े रहे थे। विराज जन पार्टी, जिसका नेतृत्व प्रशांत कुमार सैनी कर रहे हैं, लंबे समय से स्वयं को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाला राजनीतिक मंच बताती रही है। लेकिन पार्टी के भीतर समय-समय पर उभरे मतभेदों और वैचारिक असहमति के चलते कुछ प्रमुख सदस्यों ने अलग होकर "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का गठन किया।
जहां एक ओर "विराज जन पार्टी" का सार्वजनिक रुख सेक्युलर राजनीति पर आधारित माना जाता है, वहीं एबीएनपी ने स्वयं को स्पष्ट रूप से हिंदू हित, हिंदू एकता और सनातन धर्म के संरक्षण के एजेंडे के साथ स्थापित किया है। यही वैचारिक अंतर दोनों दलों के बीच मूल विभाजन का कारण माना जा रहा है।

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अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने प्रशांत कुमार सैनी के योगदान को बताया निर्णायक 

हालांकि आज दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने अपने गठन के शुरुआती दौर में प्रशांत कुमार सैनी की भूमिका को सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण माना है। पार्टी प्रवक्ता अंजलि जैन ने कहा कि नई पार्टी के निर्माण के समय प्रशांत कुमार सैनी का सहयोग कई स्तरों पर मिला, जिसने संगठन को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता, कानूनी मार्गदर्शन, संगठनात्मक सलाह और आवश्यक औपचारिकताओं (कम्प्लायंस) से जुड़े सुझाव देने में प्रशांत कुमार सैनी ने उल्लेखनीय योगदान दिया। "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (एबीएनपी) के अनुसार, इसी कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि इस विशेष संदर्भ में प्रशांत कुमार सैनी को "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" का आधिकारिक संस्थापक भी माना जा सकता है।
अंजलि जैन ने कहा,
“हम वैचारिक रूप से आज अलग हैं, लेकिन पार्टी निर्माण के प्रारंभिक दौर में प्रशांत कुमार सैनी ने जो सहयोग दिया, उसे नकारा नहीं जा सकता। संगठन खड़ा करने में उनकी भूमिका इतनी अहम रही कि इस संदर्भ में उन्हें "अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (ABNP) का आधिकारिक संस्थापक भी माना जा सकता है।”

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पुराने संबंध, लेकिन चुनावी रणनीति अलग 

'अर्जुन भारत नेशनल पार्टी" (एबीएनपी) ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अतीत में मिले सहयोग के बावजूद भविष्य की चुनावी राजनीति में वह पूरी तरह स्वतंत्र रुख अपनाएगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि "विराज जन पार्टी" (VRJP) और ABNP की वैचारिक दिशा अलग-अलग है, इसलिए किसी प्रकार के चुनावी समझौते या नरमी की संभावना नहीं है। पार्टी का दावा है कि वह राजस्थान की राजनीति में एक स्वतंत्र, स्पष्ट और आक्रामक वैचारिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।

यात्रा के माध्यम से पार्टी ने प्रदेशभर के नागरिकों, विशेष रूप से हिंदू समाज, से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और सनातन धर्म, सांस्कृतिक गौरव तथा सामाजिक एकजुटता के संदेश को आगे बढ़ाएं। अर्जुन भारत नेशनल पार्टी का मानना है कि यह यात्रा आने वाले महीनों में राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस और नई ध्रुवीकरण रेखाएं भी खींच सकती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/arjun-bharat-national-party-abnps-hindu-jodo-yatra-begins-in/article-49537

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