मौसम की मार से एशियाई चावल बाजार में हलचल, भारत में कीमतें फिलहाल स्थिर

बिजनेस डेस्क

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अल नीनो और खराब मौसम से वियतनाम-बांग्लादेश प्रभावित, भारत के मजबूत भंडार ने दी राहत

एशिया के कई देशों में मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित असर ने चावल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वियतनाम में चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि बांग्लादेश में भारी बारिश, बाढ़ और हीटवेव के कारण फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके विपरीत भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है। पर्याप्त उत्पादन, सरकारी भंडार और घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने के कारण चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय बाजार पर फिलहाल किसी बड़े दबाव के संकेत नहीं मिले हैं।

चावल दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का प्रमुख खाद्यान्न है और एशिया इसके उत्पादन और खपत का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब किसी बड़े उत्पादक देश में मौसम संबंधी संकट पैदा होता है तो उसका असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिलता है। इस समय वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

वियतनाम, जो दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है, वहां चावल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की निर्यात कीमत बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक सप्ताह पहले यही कीमत 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी। व्यापारियों का कहना है कि अल नीनो के संभावित प्रभाव और भविष्य में उत्पादन घटने की आशंकाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। निर्यातकों और खरीदारों दोनों के बीच सतर्कता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वियतनाम ने मई महीने में करीब 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। वहीं इस साल जनवरी से मई के बीच कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया। निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भविष्य की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति सामान्य नहीं रही तो आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर कीमतों पर और अधिक दिखाई दे सकता है।

दूसरी ओर बांग्लादेश की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश होने के बावजूद बांग्लादेश इस समय मौसम की मार झेल रहा है। वहां प्री-मानसून की भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 2 लाख टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे तैयार फसल बर्बाद हो गई।

बांग्लादेश के किसानों का कहना है कि इस बार हीटवेव ने भी उत्पादन पर असर डाला है। अधिक तापमान के कारण धान के पौधों में नमी तेजी से कम हुई और कई क्षेत्रों में पैदावार प्रभावित हुई। धान कटाई का काम भी धीमा पड़ गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम की ऐसी स्थिति बनी रहती है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बांग्लादेश को आने वाले समय में अतिरिक्त आयात की जरूरत पड़ सकती है। पहले भी कई मौकों पर बांग्लादेश अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से चावल आयात करता रहा है।

इन परिस्थितियों के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल भारत के पास इस समय पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बाजार में भारतीय 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड चावल की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के बीच स्थिर बनी हुई है। वहीं 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया है। व्यापारिक हलकों का कहना है कि भारत में अच्छी पैदावार और पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में किसी बड़ी उथल-पुथल की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।

नई दिल्ली के निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य प्रमुख निर्यातक देशों के पास अतिरिक्त स्टॉक सीमित है और वे भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए कीमतें बढ़ा रहे हैं। इसके उलट भारत में मजबूत उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था बाजार को संतुलित बनाए हुए है। यह भी कह रहे हैं कि वैश्विक मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि जलवायु से जुड़ी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं और उनका असर कृषि क्षेत्र पर सीधे पड़ता है।

एशियाई चावल बाजार में भारत राहत की स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियां इस बात का संकेत हैं कि मौसम की अनिश्चितता आने वाले समय में खाद्यान्न बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होता है तो वैश्विक स्तर पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं की नजर अब आने वाले मानसून और मौसम के रुख पर टिकी हुई है।

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07 Jun 2026 By Vaishnavi.J

मौसम की मार से एशियाई चावल बाजार में हलचल, भारत में कीमतें फिलहाल स्थिर

बिजनेस डेस्क

एशिया के कई देशों में मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित असर ने चावल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वियतनाम में चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि बांग्लादेश में भारी बारिश, बाढ़ और हीटवेव के कारण फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके विपरीत भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है। पर्याप्त उत्पादन, सरकारी भंडार और घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने के कारण चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय बाजार पर फिलहाल किसी बड़े दबाव के संकेत नहीं मिले हैं।

चावल दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का प्रमुख खाद्यान्न है और एशिया इसके उत्पादन और खपत का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब किसी बड़े उत्पादक देश में मौसम संबंधी संकट पैदा होता है तो उसका असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिलता है। इस समय वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

वियतनाम, जो दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है, वहां चावल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की निर्यात कीमत बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक सप्ताह पहले यही कीमत 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी। व्यापारियों का कहना है कि अल नीनो के संभावित प्रभाव और भविष्य में उत्पादन घटने की आशंकाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। निर्यातकों और खरीदारों दोनों के बीच सतर्कता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वियतनाम ने मई महीने में करीब 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। वहीं इस साल जनवरी से मई के बीच कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया। निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भविष्य की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति सामान्य नहीं रही तो आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर कीमतों पर और अधिक दिखाई दे सकता है।

दूसरी ओर बांग्लादेश की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश होने के बावजूद बांग्लादेश इस समय मौसम की मार झेल रहा है। वहां प्री-मानसून की भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 2 लाख टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे तैयार फसल बर्बाद हो गई।

बांग्लादेश के किसानों का कहना है कि इस बार हीटवेव ने भी उत्पादन पर असर डाला है। अधिक तापमान के कारण धान के पौधों में नमी तेजी से कम हुई और कई क्षेत्रों में पैदावार प्रभावित हुई। धान कटाई का काम भी धीमा पड़ गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम की ऐसी स्थिति बनी रहती है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बांग्लादेश को आने वाले समय में अतिरिक्त आयात की जरूरत पड़ सकती है। पहले भी कई मौकों पर बांग्लादेश अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से चावल आयात करता रहा है।

इन परिस्थितियों के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल भारत के पास इस समय पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बाजार में भारतीय 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड चावल की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के बीच स्थिर बनी हुई है। वहीं 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया है। व्यापारिक हलकों का कहना है कि भारत में अच्छी पैदावार और पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में किसी बड़ी उथल-पुथल की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।

नई दिल्ली के निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य प्रमुख निर्यातक देशों के पास अतिरिक्त स्टॉक सीमित है और वे भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए कीमतें बढ़ा रहे हैं। इसके उलट भारत में मजबूत उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था बाजार को संतुलित बनाए हुए है। यह भी कह रहे हैं कि वैश्विक मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि जलवायु से जुड़ी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं और उनका असर कृषि क्षेत्र पर सीधे पड़ता है।

एशियाई चावल बाजार में भारत राहत की स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियां इस बात का संकेत हैं कि मौसम की अनिश्चितता आने वाले समय में खाद्यान्न बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होता है तो वैश्विक स्तर पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं की नजर अब आने वाले मानसून और मौसम के रुख पर टिकी हुई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/asian-rice-market-disrupted-due-to-weather-prices-in-india/article-55170

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