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ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा
बिजनेस डेस्क
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार दबाव
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।
ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।
सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।
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ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा
बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।
ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।
सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।
