सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: सार्वजनिक जगहों से हटेंगे आवारा कुत्ते, सड़कों पर खाना खिलाना भी बंद

नेशनल डेस्क

By Rohit.P
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बरकरार रखते हुए सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और शेल्टर में रखने का निर्देश दिया। खाना खिलाने पर भी रोक जारी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें उसने पहले दिए गए आदेश में किसी भी तरह की ढील देने से इंकार कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अस्पतालों, स्कूलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी वहीं नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा। इस निर्णय के बाद, नगर निकायों और प्रशासनिक इकाइयों पर दबाव बढ़ गया है कि वे सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखने के लिए कठोर कदम उठाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि निर्धारित फीडिंग स्पॉट बनाए जा सकते हैं, जहां नियमों के तहत ही आवारा कुत्तों को भोजन दिया जा सकेगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं, जो बहुत चिंताजनक हैं। अदालत ने यह भी बताया कि कई विदेशी यात्रियों को भी कुत्तों के काटने के मामले का सामना करना पड़ा है, जिससे यह समस्या अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर की बन चुकी है।

इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन गंभीर रूप से कम हो रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ अवमानना और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। अदालत ने यह भी माना कि यह समस्या अब शहरी क्षेत्रों के बाहर जाकर हवाई अड्डों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुकी है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

यह मामला जुलाई 2025 में तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया। उस रिपोर्ट में एक बच्चे की कुत्ते के काटने से मौत का मामला बताया गया था। इसके बाद अगस्त में अदालत ने एनसीआर क्षेत्र के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया, जिस पर काफी विवाद हुआ। बाद में, मामले को तीन जजों की बड़ी पीठ को सौंपा गया, जिसने कुछ संशोधित करते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है। लेकिन नए आदेश में सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए कुत्तों को वापस छोड़ने पर रोक फिर से लगा दी गई है।

अदालत ने यह भी दोहराया कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और बस अड्डों जैसे संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी को रोकना महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, सड़कें और हाईवे से अन्य आवारा जानवरों को हटाने पर भी चर्चा की गई है।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख अब काफी सख्त नजर आ रहा है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो कुत्तों के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों पर भारी मुआवज़े का बोझ डालने का भी विचार किया जा सकता है, और जो लोग लापरवाही बरतेंगे, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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19 May 2026 By Rohit.P

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: सार्वजनिक जगहों से हटेंगे आवारा कुत्ते, सड़कों पर खाना खिलाना भी बंद

नेशनल डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें उसने पहले दिए गए आदेश में किसी भी तरह की ढील देने से इंकार कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अस्पतालों, स्कूलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी वहीं नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा। इस निर्णय के बाद, नगर निकायों और प्रशासनिक इकाइयों पर दबाव बढ़ गया है कि वे सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखने के लिए कठोर कदम उठाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि निर्धारित फीडिंग स्पॉट बनाए जा सकते हैं, जहां नियमों के तहत ही आवारा कुत्तों को भोजन दिया जा सकेगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमलों के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं, जो बहुत चिंताजनक हैं। अदालत ने यह भी बताया कि कई विदेशी यात्रियों को भी कुत्तों के काटने के मामले का सामना करना पड़ा है, जिससे यह समस्या अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर की बन चुकी है।

इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन गंभीर रूप से कम हो रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ अवमानना और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। अदालत ने यह भी माना कि यह समस्या अब शहरी क्षेत्रों के बाहर जाकर हवाई अड्डों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुकी है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

यह मामला जुलाई 2025 में तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया। उस रिपोर्ट में एक बच्चे की कुत्ते के काटने से मौत का मामला बताया गया था। इसके बाद अगस्त में अदालत ने एनसीआर क्षेत्र के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया, जिस पर काफी विवाद हुआ। बाद में, मामले को तीन जजों की बड़ी पीठ को सौंपा गया, जिसने कुछ संशोधित करते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ा जा सकता है। लेकिन नए आदेश में सार्वजनिक संस्थानों से पकड़े गए कुत्तों को वापस छोड़ने पर रोक फिर से लगा दी गई है।

अदालत ने यह भी दोहराया कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और बस अड्डों जैसे संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी को रोकना महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, सड़कें और हाईवे से अन्य आवारा जानवरों को हटाने पर भी चर्चा की गई है।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख अब काफी सख्त नजर आ रहा है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो कुत्तों के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों पर भारी मुआवज़े का बोझ डालने का भी विचार किया जा सकता है, और जो लोग लापरवाही बरतेंगे, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

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