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दिल्ली एमसीडी में भाजपा और मजबूत, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का आज होगा विलय
Digital Desk
AAP से अलग होकर बनी IVP के 16 पार्षद भाजपा में होंगे शामिल, वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन प्रत्याशियों का भी होगा ऐलान
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की राजनीति में शुक्रवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक विलय होने जा रहा है। इस विलय के साथ IVP के सभी 16 पार्षद भाजपा का दामन थामेंगे। इस घटनाक्रम के बाद एमसीडी में भाजपा की संख्या बढ़कर 139 हो जाएगी, जिससे निगम में पार्टी की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस विलय की औपचारिक घोषणा की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भी मौजूद रहने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निगम चुनावों और निगम की आंतरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन मई 2025 में उस समय हुआ था, जब आम आदमी पार्टी के 16 पार्षदों ने संगठन से अलग होकर नया राजनीतिक दल बनाया था। उस समय इन पार्षदों ने संगठनात्मक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर के मुद्दों को लेकर अलग राह अपनाई थी। हालांकि, अब करीब एक वर्ष बाद यही सभी पार्षद भाजपा में शामिल होकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
भाजपा के लिए यह विलय संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमसीडी में पहले से भाजपा के पास मजबूत संख्या थी, लेकिन IVP के 16 पार्षदों के शामिल होने के बाद पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी। निगम के कुल 250 वार्डों में भाजपा के पार्षदों की संख्या अब 139 तक पहुंच जाएगी, जिससे कई समितियों और प्रशासनिक निर्णयों में पार्टी की स्थिति और प्रभावी होगी। विलय के बाद भाजपा नगर निगम की विभिन्न वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी करेगी। शुक्रवार को नामांकन की अंतिम तिथि होने के कारण पार्टी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करना चाहती है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में वरिष्ठता, अनुभव और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता दी जाएगी।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के प्रमुख मुकेश गोयल को नगर निगम की किसी तदर्थ अथवा विशेष समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के सह-प्रमुख हेमचंद्र गोयल को सेंट्रल जोन से स्थायी समिति का सदस्य बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा संगठन वार्ड समितियों में नई जिम्मेदारियां तय करते समय पहली, दूसरी और तीसरी बार निर्वाचित होकर आए पार्षदों की वरिष्ठता और अनुभव का भी ध्यान रख सकता है। पार्टी का उद्देश्य संगठन और निगम प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके।
एमसीडी के गठन के बाद वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। समय के साथ विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्षदों के दल परिवर्तन के कारण पार्टी की संख्या लगातार बढ़ती रही। अब इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के विलय के बाद भाजपा नगर निगम में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। दूसरी ओर, नगर निगम की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण भी बना सकता है। वार्ड समितियों के गठन, स्थायी समिति में प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाला यह विलय एमसीडी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन लगातार विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है और अनुभवी जनप्रतिनिधियों का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों पर किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और इसका नगर निगम के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
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दिल्ली एमसीडी में भाजपा और मजबूत, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का आज होगा विलय
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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की राजनीति में शुक्रवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक विलय होने जा रहा है। इस विलय के साथ IVP के सभी 16 पार्षद भाजपा का दामन थामेंगे। इस घटनाक्रम के बाद एमसीडी में भाजपा की संख्या बढ़कर 139 हो जाएगी, जिससे निगम में पार्टी की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस विलय की औपचारिक घोषणा की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भी मौजूद रहने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निगम चुनावों और निगम की आंतरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन मई 2025 में उस समय हुआ था, जब आम आदमी पार्टी के 16 पार्षदों ने संगठन से अलग होकर नया राजनीतिक दल बनाया था। उस समय इन पार्षदों ने संगठनात्मक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर के मुद्दों को लेकर अलग राह अपनाई थी। हालांकि, अब करीब एक वर्ष बाद यही सभी पार्षद भाजपा में शामिल होकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
भाजपा के लिए यह विलय संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमसीडी में पहले से भाजपा के पास मजबूत संख्या थी, लेकिन IVP के 16 पार्षदों के शामिल होने के बाद पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी। निगम के कुल 250 वार्डों में भाजपा के पार्षदों की संख्या अब 139 तक पहुंच जाएगी, जिससे कई समितियों और प्रशासनिक निर्णयों में पार्टी की स्थिति और प्रभावी होगी। विलय के बाद भाजपा नगर निगम की विभिन्न वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी करेगी। शुक्रवार को नामांकन की अंतिम तिथि होने के कारण पार्टी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करना चाहती है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में वरिष्ठता, अनुभव और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता दी जाएगी।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के प्रमुख मुकेश गोयल को नगर निगम की किसी तदर्थ अथवा विशेष समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के सह-प्रमुख हेमचंद्र गोयल को सेंट्रल जोन से स्थायी समिति का सदस्य बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा संगठन वार्ड समितियों में नई जिम्मेदारियां तय करते समय पहली, दूसरी और तीसरी बार निर्वाचित होकर आए पार्षदों की वरिष्ठता और अनुभव का भी ध्यान रख सकता है। पार्टी का उद्देश्य संगठन और निगम प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके।
एमसीडी के गठन के बाद वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। समय के साथ विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्षदों के दल परिवर्तन के कारण पार्टी की संख्या लगातार बढ़ती रही। अब इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के विलय के बाद भाजपा नगर निगम में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। दूसरी ओर, नगर निगम की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण भी बना सकता है। वार्ड समितियों के गठन, स्थायी समिति में प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाला यह विलय एमसीडी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन लगातार विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है और अनुभवी जनप्रतिनिधियों का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों पर किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और इसका नगर निगम के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
