भारत-न्यूजीलैंड के बीच 18 बड़े समझौते, FTA और निवेश पर बनी सहमति

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में प्रोजेक्ट-17A के छठे स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किया।

भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को शुक्रवार को एक और बड़ी मजबूती मिली, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में अत्याधुनिक स्टेल्थ युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। यह प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किया गया नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण, तकनीक और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। इससे देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिली है। समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि INS महेंद्रगिरि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक क्षमता और परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देगा। कार्यक्रम में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि और रक्षा उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में विकसित किए जा रहे ड्रोन क्लस्टर का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश का प्रमुख ड्रोन हब बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत अपनी हीरा उद्योग और बेंगलुरु सूचना प्रौद्योगिकी के लिए पहचाना जाता है, उसी तरह कुरनूल ड्रोन निर्माण और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है। इसके निर्माण में देशभर की अनेक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह युद्धपोत अत्याधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल प्रणालियों, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता से लैस है। इसमें इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। जहाज में स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे रडार पर इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा इसमें कम्बाइंड डीजल एंड गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन करने में सक्षम बनाता है। भारतीय नौसेना का मानना है कि यह युद्धपोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री स्थिरता बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए इस तरह के अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे।

INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किए जा रहे कुल सात स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत चार युद्धपोतों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई और तीन युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट-17A को पहले के शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट-17) का उन्नत संस्करण माना जाता है। इसमें पहली बार बड़े स्तर पर इंटीग्रेटेड ब्लॉक कंस्ट्रक्शन तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में जहाज के विभिन्न हिस्सों का निर्माण अलग-अलग किया जाता है और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत तैयार किया जाता है। इससे निर्माण प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और गुणवत्ता के अनुरूप होती है। INS महेंद्रगिरि का नाम ओडिशा के प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत के नाम पर रखा गया है, जिसका भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपरा में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने इसी पर्वत पर तपस्या की थी और रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे आधुनिक सैन्य शक्ति के साथ भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का भी सम्मान बना रहता है।

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11 Jul 2026 By Vaishnavi.J

भारत-न्यूजीलैंड के बीच 18 बड़े समझौते, FTA और निवेश पर बनी सहमति

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भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को शुक्रवार को एक और बड़ी मजबूती मिली, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में अत्याधुनिक स्टेल्थ युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। यह प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किया गया नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण, तकनीक और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। इससे देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिली है। समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि INS महेंद्रगिरि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक क्षमता और परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देगा। कार्यक्रम में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि और रक्षा उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में विकसित किए जा रहे ड्रोन क्लस्टर का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश का प्रमुख ड्रोन हब बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत अपनी हीरा उद्योग और बेंगलुरु सूचना प्रौद्योगिकी के लिए पहचाना जाता है, उसी तरह कुरनूल ड्रोन निर्माण और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है। इसके निर्माण में देशभर की अनेक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह युद्धपोत अत्याधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल प्रणालियों, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता से लैस है। इसमें इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। जहाज में स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे रडार पर इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा इसमें कम्बाइंड डीजल एंड गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन करने में सक्षम बनाता है। भारतीय नौसेना का मानना है कि यह युद्धपोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री स्थिरता बनाए रखने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए इस तरह के अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे।

INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किए जा रहे कुल सात स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत चार युद्धपोतों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई और तीन युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट-17A को पहले के शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट-17) का उन्नत संस्करण माना जाता है। इसमें पहली बार बड़े स्तर पर इंटीग्रेटेड ब्लॉक कंस्ट्रक्शन तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में जहाज के विभिन्न हिस्सों का निर्माण अलग-अलग किया जाता है और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत तैयार किया जाता है। इससे निर्माण प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और गुणवत्ता के अनुरूप होती है। INS महेंद्रगिरि का नाम ओडिशा के प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत के नाम पर रखा गया है, जिसका भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपरा में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने इसी पर्वत पर तपस्या की थी और रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे आधुनिक सैन्य शक्ति के साथ भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का भी सम्मान बना रहता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/18-major-agreements-fta-and-investment-agreed-between-india-and/article-58483

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