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लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, 142 साल बाद खेला पहला महिला टेस्ट मैच
स्पोर्ट्स डेस्क
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर पहली बार महिला टेस्ट मैच खेला गया। भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों ने इस ऐतिहासिक मुकाबले के साथ महिला क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। 10 जुलाई 2026 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच पहला महिला टेस्ट मैच शुरू हुआ। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इस मैदान पर पुरुषों का पहला टेस्ट मुकाबला वर्ष 1884 में खेला गया था, लेकिन महिलाओं को यहां टेस्ट क्रिकेट खेलने का अवसर 142 साल बाद मिला। इस ऐतिहासिक मैच के साथ महिला क्रिकेट ने एक नई उपलब्धि हासिल की और खेल जगत में लैंगिक समानता की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया। भारतीय टीम की कप्तानी हरमनप्रीत कौर कर रही हैं, जबकि इंग्लैंड की कमान नैट साइवर-ब्रंट के हाथों में है। दोनों टीमों के मैदान पर उतरते ही लॉर्ड्स का ऐतिहासिक मैदान एक ऐसे पल का गवाह बना, जिसे महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं था, बल्कि उस लंबे संघर्ष और इंतजार का परिणाम भी था, जिसने महिला क्रिकेट को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।
लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, उतना ही यह परंपराओं और विरासत के लिए भी जाना जाता है। लंबे समय तक यह मैदान केवल पुरुष क्रिकेट के बड़े मुकाबलों का केंद्र रहा। वर्ष 1999 तक यहां के प्रतिष्ठित पवेलियन और प्रसिद्ध 'लॉन्ग रूम' में महिलाओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और महिला क्रिकेट को वह सम्मान मिलने लगा, जिसकी वह हकदार थी। अब उसी लॉर्ड्स के मैदान पर महिला खिलाड़ियों का टेस्ट मैच खेलना इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। मैच शुरू होने से पहले लॉर्ड्स की वर्षों पुरानी घंटी बजाने की परंपरा को भी खास अंदाज में निभाया गया। सामान्य तौर पर यह घंटी मैदान के बाहर से बजाई जाती है, लेकिन इस ऐतिहासिक अवसर पर इंग्लैंड की कई पूर्व महिला क्रिकेटरों ने राष्ट्रगान से ठीक पहले मैदान के बीचों-बीच खड़े होकर लगभग पांच मिनट तक घंटी बजाई। इस विशेष आयोजन ने मुकाबले की गरिमा को और बढ़ा दिया। इसके बाद जब दोनों टीमें राष्ट्रगान के लिए मैदान की ओर बढ़ीं तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के सदस्यों ने लॉन्ग रूम में खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खिलाड़ियों का स्वागत किया। महिला खिलाड़ियों को इस ऐतिहासिक स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर मिलना भी अपने आप में एक भावुक और यादगार क्षण बन गया। खिलाड़ियों के चेहरों पर गर्व, खुशी और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। खेल प्रेमियों और पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस पल को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक बताया।
भारतीय महिला क्रिकेट ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार नई ऊंचाइयों को छुआ है। विश्व स्तर पर टीम ने अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है और अब लॉर्ड्स में पहला टेस्ट खेलना उस यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मुकाबला केवल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जा रहा एक टेस्ट मैच नहीं है, बल्कि महिला क्रिकेट की बदलती तस्वीर का प्रतीक भी है। दूसरी ओर इंग्लैंड की कप्तान नैट साइवर-ब्रंट की अगुआई में मेजबान टीम भी इस ऐतिहासिक मुकाबले का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रही है। क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे महिला क्रिकेट के लिए नई शुरुआत बताया है। लॉर्ड्स का यह टेस्ट मैच आने वाले वर्षों में केवल स्कोरकार्ड के लिए नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों को मिले सम्मान, अवसर और समान पहचान के लिए भी याद किया जाएगा। 142 वर्षों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ और क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान ने पहली बार महिला टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी कर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना एक नया अध्याय जोड़ दिया।
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लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, 142 साल बाद खेला पहला महिला टेस्ट मैच
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। 10 जुलाई 2026 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच पहला महिला टेस्ट मैच शुरू हुआ। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इस मैदान पर पुरुषों का पहला टेस्ट मुकाबला वर्ष 1884 में खेला गया था, लेकिन महिलाओं को यहां टेस्ट क्रिकेट खेलने का अवसर 142 साल बाद मिला। इस ऐतिहासिक मैच के साथ महिला क्रिकेट ने एक नई उपलब्धि हासिल की और खेल जगत में लैंगिक समानता की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया। भारतीय टीम की कप्तानी हरमनप्रीत कौर कर रही हैं, जबकि इंग्लैंड की कमान नैट साइवर-ब्रंट के हाथों में है। दोनों टीमों के मैदान पर उतरते ही लॉर्ड्स का ऐतिहासिक मैदान एक ऐसे पल का गवाह बना, जिसे महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं था, बल्कि उस लंबे संघर्ष और इंतजार का परिणाम भी था, जिसने महिला क्रिकेट को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।
लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, उतना ही यह परंपराओं और विरासत के लिए भी जाना जाता है। लंबे समय तक यह मैदान केवल पुरुष क्रिकेट के बड़े मुकाबलों का केंद्र रहा। वर्ष 1999 तक यहां के प्रतिष्ठित पवेलियन और प्रसिद्ध 'लॉन्ग रूम' में महिलाओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और महिला क्रिकेट को वह सम्मान मिलने लगा, जिसकी वह हकदार थी। अब उसी लॉर्ड्स के मैदान पर महिला खिलाड़ियों का टेस्ट मैच खेलना इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। मैच शुरू होने से पहले लॉर्ड्स की वर्षों पुरानी घंटी बजाने की परंपरा को भी खास अंदाज में निभाया गया। सामान्य तौर पर यह घंटी मैदान के बाहर से बजाई जाती है, लेकिन इस ऐतिहासिक अवसर पर इंग्लैंड की कई पूर्व महिला क्रिकेटरों ने राष्ट्रगान से ठीक पहले मैदान के बीचों-बीच खड़े होकर लगभग पांच मिनट तक घंटी बजाई। इस विशेष आयोजन ने मुकाबले की गरिमा को और बढ़ा दिया। इसके बाद जब दोनों टीमें राष्ट्रगान के लिए मैदान की ओर बढ़ीं तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के सदस्यों ने लॉन्ग रूम में खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खिलाड़ियों का स्वागत किया। महिला खिलाड़ियों को इस ऐतिहासिक स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर मिलना भी अपने आप में एक भावुक और यादगार क्षण बन गया। खिलाड़ियों के चेहरों पर गर्व, खुशी और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। खेल प्रेमियों और पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस पल को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक बताया।
भारतीय महिला क्रिकेट ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार नई ऊंचाइयों को छुआ है। विश्व स्तर पर टीम ने अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है और अब लॉर्ड्स में पहला टेस्ट खेलना उस यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मुकाबला केवल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जा रहा एक टेस्ट मैच नहीं है, बल्कि महिला क्रिकेट की बदलती तस्वीर का प्रतीक भी है। दूसरी ओर इंग्लैंड की कप्तान नैट साइवर-ब्रंट की अगुआई में मेजबान टीम भी इस ऐतिहासिक मुकाबले का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रही है। क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे महिला क्रिकेट के लिए नई शुरुआत बताया है। लॉर्ड्स का यह टेस्ट मैच आने वाले वर्षों में केवल स्कोरकार्ड के लिए नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों को मिले सम्मान, अवसर और समान पहचान के लिए भी याद किया जाएगा। 142 वर्षों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ और क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान ने पहली बार महिला टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी कर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना एक नया अध्याय जोड़ दिया।
