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NEET री-एग्जाम के दबाव में बढ़ी चिंता, दो दिन में चार छात्रों की मौत
Digital Desk
तमिलनाडु और गुजरात में सामने आए नए मामले, परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के मानसिक दबाव पर फिर उठे सवाल
देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दो दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से चार छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिनमें तमिलनाडु और गुजरात की घटनाएं सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, परीक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद कई छात्र तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहने वाली 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने का सपना देख रही थी। परिवार के अनुसार उसने परीक्षा दी थी और परिणाम तथा काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रही थी। इसी बीच परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद वह काफी परेशान रहने लगी थी। बताया जा रहा है कि मौत से पहले उसने अपने कुछ करीबी रिश्तेदारों और चाचा को संदेश भेजा था, जिसमें उसने भविष्य को लेकर चिंता और दोबारा परीक्षा देने के डर का जिक्र किया था। उसने यह भी लिखा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई पर काफी खर्च किया है और उसे उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाने की चिंता सता रही थी।
परिजनों के मुताबिक छात्रा लंबे समय से डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। कोयंबटूर के कोवईपुदुर क्षेत्र में रहने वाली अनुकीर्तना ने एक निजी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार और रिश्तेदारों में शोक की लहर फैल गई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की और छात्रा का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटना के बाद छात्रा के परिवार ने परीक्षा प्रक्रिया और हालिया घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कोयंबटूर में कई लोगों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने की मांग की। परिवार का कहना है कि छात्रों को केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उधर गुजरात के अहमदाबाद से भी एक दुखद मामला सामने आया है। यहां 17 वर्षीय एक छात्र की मौत हुई, जो NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस के अनुसार घटना की जांच जारी है और अभी तक किसी स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हुई है। छात्र के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके। इस मामले ने भी स्थानीय स्तर पर लोगों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इसी तरह के दबाव से गुजरते हैं। इससे पहले देहरादून और लखनऊ से भी दो छात्रों की मौत की खबरें सामने आई थीं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शिक्षा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और अभिभावकों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का दबाव पहले से ही काफी अधिक होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने, अनिश्चितता बढ़ने या दोबारा परीक्षा की घोषणा जैसी परिस्थितियां कई छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक बोझ डाल सकती हैं।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की समीक्षा के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले का असर लाखों छात्रों पर पड़ा, जो पहले से परिणाम का इंतजार कर रहे थे। कई छात्रों और अभिभावकों ने दोबारा परीक्षा को लेकर चिंता भी जताई है। NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए यह परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और बेहतर रैंक हासिल करने के लिए लंबे समय तक तैयारी करते हैं।
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NEET री-एग्जाम के दबाव में बढ़ी चिंता, दो दिन में चार छात्रों की मौत
Digital Desk
देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दो दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से चार छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिनमें तमिलनाडु और गुजरात की घटनाएं सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, परीक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद कई छात्र तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहने वाली 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने का सपना देख रही थी। परिवार के अनुसार उसने परीक्षा दी थी और परिणाम तथा काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रही थी। इसी बीच परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद वह काफी परेशान रहने लगी थी। बताया जा रहा है कि मौत से पहले उसने अपने कुछ करीबी रिश्तेदारों और चाचा को संदेश भेजा था, जिसमें उसने भविष्य को लेकर चिंता और दोबारा परीक्षा देने के डर का जिक्र किया था। उसने यह भी लिखा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई पर काफी खर्च किया है और उसे उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाने की चिंता सता रही थी।
परिजनों के मुताबिक छात्रा लंबे समय से डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। कोयंबटूर के कोवईपुदुर क्षेत्र में रहने वाली अनुकीर्तना ने एक निजी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार और रिश्तेदारों में शोक की लहर फैल गई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की और छात्रा का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटना के बाद छात्रा के परिवार ने परीक्षा प्रक्रिया और हालिया घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कोयंबटूर में कई लोगों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने की मांग की। परिवार का कहना है कि छात्रों को केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उधर गुजरात के अहमदाबाद से भी एक दुखद मामला सामने आया है। यहां 17 वर्षीय एक छात्र की मौत हुई, जो NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस के अनुसार घटना की जांच जारी है और अभी तक किसी स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हुई है। छात्र के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके। इस मामले ने भी स्थानीय स्तर पर लोगों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इसी तरह के दबाव से गुजरते हैं। इससे पहले देहरादून और लखनऊ से भी दो छात्रों की मौत की खबरें सामने आई थीं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शिक्षा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और अभिभावकों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का दबाव पहले से ही काफी अधिक होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने, अनिश्चितता बढ़ने या दोबारा परीक्षा की घोषणा जैसी परिस्थितियां कई छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक बोझ डाल सकती हैं।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की समीक्षा के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले का असर लाखों छात्रों पर पड़ा, जो पहले से परिणाम का इंतजार कर रहे थे। कई छात्रों और अभिभावकों ने दोबारा परीक्षा को लेकर चिंता भी जताई है। NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए यह परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और बेहतर रैंक हासिल करने के लिए लंबे समय तक तैयारी करते हैं।
