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जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान
बिजनेस डेस्क
रिलायंस समर्थित जियो ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया, भारत के सबसे बड़े IPO की दिशा में ऐतिहासिक कदम, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे
भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।
कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान
बिजनेस डेस्क
भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।
कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
