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अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर ओंकारेश्वर में बड़ा कार्यक्रम, जागरूकता पर जोर
Digital Desk
राष्ट्रपति ने कहा—मध्यप्रदेश और ओडिशा में सबसे अधिक स्क्रीनिंग हुई
अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस बीमारी को लेकर गंभीर संदेश सामने आए। मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सिकल सेल को सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता, यह सामाजिक जागरूकता, आनुवांशिक परामर्श और व्यवहार परिवर्तन से जुड़ा बड़ा विषय है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देश के 17 राज्यों में सिकल सेल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश और ओडिशा में जिस स्तर पर स्क्रीनिंग और परामर्श का काम हुआ है, वह सबसे अधिक और प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर जनजातीय क्षेत्रों में देखा जाता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। कार्यक्रम में यह बात बार-बार सामने आई कि समय रहते जांच और परामर्श से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस अवसर पर कहा कि सिकल सेल रोग केवल चिकित्सा का विषय नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी गंभीर समस्या भी है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो इस अभियान की व्यापकता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में जांच से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उनका कहना था कि गांव-गांव तक जागरूकता फैलाना इस लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी, उसका इलाज और नियंत्रण उतना ही प्रभावी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को और तेज किया जाएगा ताकि किसी भी मरीज को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सिकल सेल एक आनुवांशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती है, इसलिए इसके लिए केवल इलाज नहीं बल्कि सामाजिक समझ और विवाह पूर्व परामर्श भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर समय पर जांच और काउंसलिंग हो जाए तो आने वाली पीढ़ियों में इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के कारण जागरूकता में सुधार देखा गया है, लेकिन अब भी कई दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि सिकल सेल उन्मूलन सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में स्क्रीनिंग को और डिजिटल और तेज किया जाएगा ताकि हर व्यक्ति तक जांच की सुविधा पहुंच सके। साथ ही, जनजातीय इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और जागरूकता शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर ओंकारेश्वर में बड़ा कार्यक्रम, जागरूकता पर जोर
Digital Desk
अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस बीमारी को लेकर गंभीर संदेश सामने आए। मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सिकल सेल को सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता, यह सामाजिक जागरूकता, आनुवांशिक परामर्श और व्यवहार परिवर्तन से जुड़ा बड़ा विषय है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देश के 17 राज्यों में सिकल सेल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश और ओडिशा में जिस स्तर पर स्क्रीनिंग और परामर्श का काम हुआ है, वह सबसे अधिक और प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर जनजातीय क्षेत्रों में देखा जाता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। कार्यक्रम में यह बात बार-बार सामने आई कि समय रहते जांच और परामर्श से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस अवसर पर कहा कि सिकल सेल रोग केवल चिकित्सा का विषय नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी गंभीर समस्या भी है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो इस अभियान की व्यापकता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में जांच से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उनका कहना था कि गांव-गांव तक जागरूकता फैलाना इस लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी, उसका इलाज और नियंत्रण उतना ही प्रभावी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को और तेज किया जाएगा ताकि किसी भी मरीज को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सिकल सेल एक आनुवांशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती है, इसलिए इसके लिए केवल इलाज नहीं बल्कि सामाजिक समझ और विवाह पूर्व परामर्श भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर समय पर जांच और काउंसलिंग हो जाए तो आने वाली पीढ़ियों में इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के कारण जागरूकता में सुधार देखा गया है, लेकिन अब भी कई दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि सिकल सेल उन्मूलन सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में स्क्रीनिंग को और डिजिटल और तेज किया जाएगा ताकि हर व्यक्ति तक जांच की सुविधा पहुंच सके। साथ ही, जनजातीय इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और जागरूकता शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
