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चीन में भ्रष्टाचार पर हुई बड़ी कार्रवाई, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को दी गई मौत की सजा
Digital Desk
चीन ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व रक्षा मंत्री वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा दी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सख्त कार्रवाई की।
चीन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सबसे सख्त फैसलों में से एक लेते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद चीन की राजनीति और सैन्य गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग मामलों में दोषी पाया गया था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस पूरे मामले पर खुद नजर रखी थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई को मंजूरी दी गई। चीन में लंबे समय से सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक वी फेंघे को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया था। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ रिश्वत देने के भी आरोप साबित हुए। अदालत की सुनवाई के बाद दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। ली शांगफू को कुछ समय पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया गया था। वह 2024 में अचानक सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब हो गए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ जांच की चर्चा शुरू हुई थी। बाद में उन पर आधिकारिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। वी फेंघे इससे पहले 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे थे। उनके बाद ली शांगफू को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उनका कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। दोनों नेताओं का संबंध चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मिसाइल और रॉकेट फोर्स से रहा है, जिसे चीन की सैन्य ताकत का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों पूर्व रक्षा मंत्री कभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते थे। दोनों केंद्रीय सैन्य आयोग में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार शी जिनपिंग ने खुद वी फेंघे को रक्षा मंत्री बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई से यह संकेत गया है कि चीन में भ्रष्टाचार के मामलों में अब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को भी राहत नहीं मिल रही। बीते कुछ वर्षों में चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाया गया है। कुछ मामलों में जांच अभी भी जारी बताई जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि चीन की मिसाइल फोर्स के भीतर बड़े स्तर पर गड़बड़ियों और आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई।
शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक लाखों सरकारी अधिकारियों, सैन्य अफसरों और पार्टी नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। चीन की सरकार इसे व्यवस्था सुधारने की कोशिश बता रही है, जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी मानते हैं। हालांकि चीन की तरफ से इस पूरे मामले पर यही कहा गया है कि कानून सभी के लिए बराबर है।
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चीन में भ्रष्टाचार पर हुई बड़ी कार्रवाई, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को दी गई मौत की सजा
Digital Desk
चीन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सबसे सख्त फैसलों में से एक लेते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद चीन की राजनीति और सैन्य गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग मामलों में दोषी पाया गया था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस पूरे मामले पर खुद नजर रखी थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई को मंजूरी दी गई। चीन में लंबे समय से सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक वी फेंघे को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया था। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ रिश्वत देने के भी आरोप साबित हुए। अदालत की सुनवाई के बाद दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। ली शांगफू को कुछ समय पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया गया था। वह 2024 में अचानक सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब हो गए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ जांच की चर्चा शुरू हुई थी। बाद में उन पर आधिकारिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। वी फेंघे इससे पहले 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे थे। उनके बाद ली शांगफू को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उनका कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। दोनों नेताओं का संबंध चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मिसाइल और रॉकेट फोर्स से रहा है, जिसे चीन की सैन्य ताकत का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों पूर्व रक्षा मंत्री कभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते थे। दोनों केंद्रीय सैन्य आयोग में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार शी जिनपिंग ने खुद वी फेंघे को रक्षा मंत्री बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई से यह संकेत गया है कि चीन में भ्रष्टाचार के मामलों में अब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को भी राहत नहीं मिल रही। बीते कुछ वर्षों में चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाया गया है। कुछ मामलों में जांच अभी भी जारी बताई जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि चीन की मिसाइल फोर्स के भीतर बड़े स्तर पर गड़बड़ियों और आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई।
शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक लाखों सरकारी अधिकारियों, सैन्य अफसरों और पार्टी नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। चीन की सरकार इसे व्यवस्था सुधारने की कोशिश बता रही है, जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी मानते हैं। हालांकि चीन की तरफ से इस पूरे मामले पर यही कहा गया है कि कानून सभी के लिए बराबर है।
