कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित

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एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू; होटल-रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार पर संकट

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। केंद्र सरकार ने गैस उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 के तहत आपात प्रावधान लागू किए हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई अस्थायी रूप से सीमित कर दी गई है। इसका सबसे अधिक असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे भोजनालय संचालकों पर पड़ रहा है, जहां गैस की कमी से कामकाज प्रभावित होने लगा है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के बीच उठाया गया है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले हॉर्मुज जलमार्ग में बढ़े तनाव के कारण गैस और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस रूट से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं और भारत भी अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरत इसी मार्ग से पूरी करता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा जोखिम के कारण कई टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

स्थिति को देखते हुए सरकार ने गैस की सप्लाई को चार श्रेणियों में बांट दिया है। घरेलू रसोई गैस (PNG) और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG को पहली प्राथमिकता दी गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं को परेशानी न हो। दूसरी श्रेणी में खाद बनाने वाले कारखाने हैं, जिन्हें सीमित मात्रा में गैस दी जाएगी। तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योग शामिल हैं, जबकि चौथी श्रेणी में छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट आते हैं, जिन्हें पहले की तुलना में कम गैस उपलब्ध हो सकेगी।

इस निर्णय का असर कई राज्यों में दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में होटल व रेस्टोरेंट संचालकों ने चिंता जताते हुए कहा है कि शादी-समारोह के मौसम में सप्लाई बाधित होने से कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर में भी कॉमर्शियल गैस की कटौती की खबरें सामने आई हैं।

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी गठित की है, जो गैस सप्लाई की लगातार समीक्षा करेगी। साथ ही सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और प्रोपेन-ब्यूटेन का अधिक इस्तेमाल घरेलू गैस उत्पादन में करने के निर्देश दिए गए हैं।

उधर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा संकट को कम करने की कोशिशें जारी हैं। जानकारी के मुताबिक सरकार वैकल्पिक आपूर्ति के लिए अन्य देशों से गैस कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति सामान्य हो जाती है तो आने वाले हफ्तों में स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है।

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