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अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचा पिता, लगाए गंभीर आरोप, हर तरफ मची अफरा-तफरी!
Digital Desk
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित प्रिंसिपल बेंच में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब रीवा निवासी एक शख्स अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर अदालत पहुंच गया।
जबलपुर में स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में सोमवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। रीवा जिले के रहने वाले एक व्यक्ति अपने अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर सीधे अदालत कक्ष तक पहुंच गए। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा व्यवस्था तत्काल सख्त कर दी गई।
बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति पहले जबलपुर की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में काम करता था और उसने कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। वह दावा कर रहा है कि अपने साथ और अपने परिवार के साथ हुई घटनाओं के सबूत दिखाने के लिए उसे ऐसा कदम उठाना पड़ा।
कंपनी पर लगाया 200 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप
रीवा निवासी दयाशंकर पांडे पहले जबलपुर की शुभ मोटर्स नाम की ऑटोमोबाइल कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। उनका आरोप है कि कंपनी ने अपने खातों में करीब 200 करोड़ रुपये की पूंजी को फर्जी तरीके से दर्शाया है। उनका कहना है कि इस कथित घोटाले में दस्तावेजों में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया और वास्तविक आंकड़ों को छिपाया गया।
दयाशंकर का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की, तो इसके बाद से उनके और उनके परिवार के खिलाफ लगातार संदिग्ध घटनाएं होने लगीं। उनका दावा है कि यह घटनाएं सामान्य नहीं थीं बल्कि उन्हें डराने या चुप कराने के उद्देश्य से की गई हो सकती हैं।
जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच के सामने पहुंचे
यह घटना हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 17 की है, जहां जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच में सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान दयाशंकर पांडे अपने साथ एक पैकेट में भ्रूण लेकर अदालत कक्ष तक पहुंच गए।
जैसे ही इस बात की जानकारी कोर्ट स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों को लगी, तुरंत हड़कंप मच गया। कोर्ट परिसर में तैनात एसएएफ के जवान मौके पर पहुंचे और दयाशंकर को अपने कब्जे में ले लिया। बाद में सिविल लाइन और ओमती थाना पुलिस को भी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले जाया।
पुलिस ने पूरे मामले में भ्रूण का पंचनामा तैयार किया। इसके बाद दयाशंकर पांडे के पिता ने घमापुर स्थित करिया पाथर श्मशान भूमि में भ्रूण को दफनाकर उसका अंतिम संस्कार किया।
सड़क हादसे में पत्नी को लगी थी गंभीर चोट
दयाशंकर का कहना है कि सबसे गंभीर घटना 1 मार्च 2026 को हुई। उस दिन वह अपनी पत्नी और बच्ची के साथ बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
इस हादसे में उनकी गर्भवती पत्नी के पेट में गंभीर चोट लगी। बाद में डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए गर्भपात करने का फैसला लिया। इस कारण उनके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई। दयाशंकर का आरोप है कि यह हादसा भी सामान्य दुर्घटना नहीं था और इसके पीछे साजिश हो सकती है।
पहले भी परिवार पर हमलों का आरोप
दयाशंकर पांडे ने दावा किया है कि उनके परिवार पर पहले भी कई संदिग्ध घटनाएं हो चुकी हैं। उनके अनुसार 19 अप्रैल 2024 को जब वह रीवा लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके प्रचार में इस्तेमाल की जा रही गाड़ी को अज्ञात लोगों ने आग लगा दी थी।
इसके बाद 9 मई 2025 को उनके पिता एक दीवानी मामले की सुनवाई के लिए जा रहे थे। उसी दौरान बिना नंबर वाली एक मारुति कार ने उन्हें टक्कर मार दी। दयाशंकर का आरोप है कि इन मामलों में पुलिस को शिकायत देने के बावजूद आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया।
इसके अलावा 6 नवंबर 2025 को भी उनके साथ एक और सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें एक नई कार ने उन्हें टक्कर मारी थी। उनका कहना है कि इन सभी घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो यह महज संयोग नहीं लगता।
सबूत के तौर पर भ्रूण लेकर पहुंचे अदालत
दयाशंकर पांडे का कहना है कि अदालत में किसी भी मामले को साबित करने के लिए ठोस सबूत की आवश्यकता होती है। इसी वजह से वह अपने अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर अदालत पहुंचे थे।
उनका कहना है कि यह उनके परिवार के साथ हुई त्रासदी का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पुलिस, राज्य के गृहमंत्री और यहां तक कि राष्ट्रपति तक को भी इस मामले में शिकायत भेजी, लेकिन अब तक उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिला।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दयाशंकर पांडे द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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