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TVK का भविष्य तीन दलों के हाथ, DMK-AIADMK गठबंधन चर्चा से बढ़ा सस्पेंस, जानें पूरी जानकारी
नेशनल डेस्क
तमिलनाडु में TVK का भविष्य CPI, CPM, VCK के फैसले पर टिका है। DMK-AIADMK गठबंधन चर्चा से राजनीतिक हलचल तेज।
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं लग रही है। हर दिन हालात बदलते दिख रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में लगातार नई चर्चाओं ने माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) अपने विधायकों के समर्थन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, तो दूसरी तरफ राज्य की पुरानी प्रतिद्वंदी पार्टियां DMK और AIADMK के बीच भी कथित तौर पर सरकार गठन को लेकर बातचीत की खबरें राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी हलचल तेज है और हर कोई अगले कदम पर नजर लगाए बैठा है।
जानकारी के मुताबिक टीवीके ने लेफ्ट पार्टियों CPI, CPM और VCK से समर्थन की अपील की है। इन तीनों दलों ने संकेत दिए हैं कि वे आज शाम तक अपना रुख साफ कर सकते हैं। अंदरूनी हलकों में यह चर्चा है कि जनादेश और राजनीतिक स्थिरता को देखते हुए TVK को समर्थन दिया जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि DMK की ओर से इन दलों पर लगातार यह दबाव है कि कोई भी फैसला सोच-समझकर लिया जाए। ये तीनों दल लंबे समय से DMK गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, ऐसे में उनका रुख बदलना आसान नहीं माना जा रहा। चेन्नई से लेकर कोयंबटूर तक इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलचल साफ देखी जा रही है, और पार्टी स्तर पर लगातार बैठकें भी चल रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यपाल आर. एन. रवि की टिप्पणियों ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। राज्यपाल ने हाल ही में यह कहा था कि उनके लिए संख्या बल सबसे महत्वपूर्ण है और वे उसी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने का मौका देंगे जिसके पास 118 विधायकों का स्पष्ट बहुमत होगा। इस बयान के बाद TVK और कांग्रेस दोनों ने नाराजगी जताई है और सवाल उठाए हैं कि क्या राजनीतिक प्रक्रिया में संवैधानिक संतुलन बना रहेगा या नहीं। इसी बीच, DMK ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे साफ है कि पार्टी किसी भी संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर सतर्क है।
उधर, AIADMK और DMK के बीच कथित गठबंधन या बातचीत की खबरों ने स्थिति को और उलझा दिया है। AIADMK प्रमुख ई. पलनीस्वामी द्वारा पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में विधायकों के हस्ताक्षर इकट्ठा करने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि अगर DMK और AIADMK के बीच कोई अप्रत्याशित समझौता बनता है, तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। बताया जा रहा है कि TVK प्रमुख थलापति विजय ने भी इस स्थिति पर नजर बनाए रखी है और यदि हालात उनके पक्ष में नहीं जाते तो वे अपने 107 विधायकों से इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि किसी स्तर पर नहीं हुई है। पनयूर स्थित TVK कार्यालय में आज विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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TVK का भविष्य तीन दलों के हाथ, DMK-AIADMK गठबंधन चर्चा से बढ़ा सस्पेंस, जानें पूरी जानकारी
नेशनल डेस्क
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं लग रही है। हर दिन हालात बदलते दिख रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में लगातार नई चर्चाओं ने माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) अपने विधायकों के समर्थन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, तो दूसरी तरफ राज्य की पुरानी प्रतिद्वंदी पार्टियां DMK और AIADMK के बीच भी कथित तौर पर सरकार गठन को लेकर बातचीत की खबरें राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी हलचल तेज है और हर कोई अगले कदम पर नजर लगाए बैठा है।
जानकारी के मुताबिक टीवीके ने लेफ्ट पार्टियों CPI, CPM और VCK से समर्थन की अपील की है। इन तीनों दलों ने संकेत दिए हैं कि वे आज शाम तक अपना रुख साफ कर सकते हैं। अंदरूनी हलकों में यह चर्चा है कि जनादेश और राजनीतिक स्थिरता को देखते हुए TVK को समर्थन दिया जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि DMK की ओर से इन दलों पर लगातार यह दबाव है कि कोई भी फैसला सोच-समझकर लिया जाए। ये तीनों दल लंबे समय से DMK गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, ऐसे में उनका रुख बदलना आसान नहीं माना जा रहा। चेन्नई से लेकर कोयंबटूर तक इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलचल साफ देखी जा रही है, और पार्टी स्तर पर लगातार बैठकें भी चल रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यपाल आर. एन. रवि की टिप्पणियों ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। राज्यपाल ने हाल ही में यह कहा था कि उनके लिए संख्या बल सबसे महत्वपूर्ण है और वे उसी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने का मौका देंगे जिसके पास 118 विधायकों का स्पष्ट बहुमत होगा। इस बयान के बाद TVK और कांग्रेस दोनों ने नाराजगी जताई है और सवाल उठाए हैं कि क्या राजनीतिक प्रक्रिया में संवैधानिक संतुलन बना रहेगा या नहीं। इसी बीच, DMK ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे साफ है कि पार्टी किसी भी संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर सतर्क है।
उधर, AIADMK और DMK के बीच कथित गठबंधन या बातचीत की खबरों ने स्थिति को और उलझा दिया है। AIADMK प्रमुख ई. पलनीस्वामी द्वारा पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में विधायकों के हस्ताक्षर इकट्ठा करने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि अगर DMK और AIADMK के बीच कोई अप्रत्याशित समझौता बनता है, तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। बताया जा रहा है कि TVK प्रमुख थलापति विजय ने भी इस स्थिति पर नजर बनाए रखी है और यदि हालात उनके पक्ष में नहीं जाते तो वे अपने 107 विधायकों से इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि किसी स्तर पर नहीं हुई है। पनयूर स्थित TVK कार्यालय में आज विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
