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राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचेंगे योगी, चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का संकेत
Digital Desk
चढ़ावा चोरी जांच तेज, सीएम योगी के दौरे से पहले प्रशासन की सख्ती बढ़ी, मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।
राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद और जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर प्रबंधन, दान राशि की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हालांकि इस दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल में एक ऐसा बिंदु सामने आया है जिसने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को कार्यक्रम में शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का सुझाव दिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में इस संबंध में जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के लिए भी कहा गया है।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण से लेकर प्रबंधन और वीआईपी कार्यक्रमों तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उनकी अनुपस्थिति की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) चौथे दिन भी सुबह से ही राम मंदिर परिसर पहुंची और जांच प्रक्रिया जारी रखी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और दान राशि की गिनती एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान राशि की गिनती, उसके भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। अब तक की जांच में पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और उससे संबंधित कार्यों से जुड़े थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी दावा किया था कि मंदिर में करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन की आशंका है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की जांच की मांग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आई थी, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई।
इसी बीच एक और महत्वपूर्ण चर्चा राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी, जांच एजेंसियों की सक्रियता और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचेंगे योगी, चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का संकेत
Digital Desk
राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद और जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर प्रबंधन, दान राशि की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हालांकि इस दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल में एक ऐसा बिंदु सामने आया है जिसने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को कार्यक्रम में शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का सुझाव दिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में इस संबंध में जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के लिए भी कहा गया है।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण से लेकर प्रबंधन और वीआईपी कार्यक्रमों तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उनकी अनुपस्थिति की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) चौथे दिन भी सुबह से ही राम मंदिर परिसर पहुंची और जांच प्रक्रिया जारी रखी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और दान राशि की गिनती एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान राशि की गिनती, उसके भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। अब तक की जांच में पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और उससे संबंधित कार्यों से जुड़े थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी दावा किया था कि मंदिर में करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन की आशंका है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की जांच की मांग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आई थी, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई।
इसी बीच एक और महत्वपूर्ण चर्चा राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी, जांच एजेंसियों की सक्रियता और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
