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05 अगस्त महाकाल भस्म आरती: भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार, भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
धर्म डेस्क
सावन माह की सप्तमी पर तड़के 2:30 बजे खुले मंदिर के कपाट, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती के बाद महाकाल ने साकार रूप में दिए दर्शन, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर।
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार, 05 अगस्त को सावन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। अलसुबह 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बन गया। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया। यह दृश्य अत्यंत आध्यात्मिक और मनमोहक था, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में मौजूद थे। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। चंदन की सुगंध और फूलों की महक से पूरा गर्भगृह महक उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। भस्म आरती की प्रक्रिया भी पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सबसे पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक रहा।
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महाकाल मंदिर की मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। सावन माह में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। बुधवार सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं बताकर आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि नंदी महाराज के माध्यम से भक्तों की प्रार्थना सीधे भगवान महाकाल तक पहुंचती है। इस दौरान मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के उद्घोष से गूंज उठा। सावन के पावन महीने में महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कतार प्रबंधन तक सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालु आसानी से बाबा के दर्शन कर सकें। महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और शिवभक्ति का जीवंत प्रतीक है। उज्जैन की इस पवित्र भूमि पर होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और नई आस्था का संचार करती है। सावन के इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती भक्तों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गई।
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05 अगस्त महाकाल भस्म आरती: भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार, भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
धर्म डेस्क
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार, 05 अगस्त को सावन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। अलसुबह 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बन गया। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया। यह दृश्य अत्यंत आध्यात्मिक और मनमोहक था, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में मौजूद थे। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। चंदन की सुगंध और फूलों की महक से पूरा गर्भगृह महक उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। भस्म आरती की प्रक्रिया भी पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सबसे पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक रहा।
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महाकाल मंदिर की मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। सावन माह में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। बुधवार सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं बताकर आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि नंदी महाराज के माध्यम से भक्तों की प्रार्थना सीधे भगवान महाकाल तक पहुंचती है। इस दौरान मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के उद्घोष से गूंज उठा। सावन के पावन महीने में महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कतार प्रबंधन तक सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालु आसानी से बाबा के दर्शन कर सकें। महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और शिवभक्ति का जीवंत प्रतीक है। उज्जैन की इस पवित्र भूमि पर होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और नई आस्था का संचार करती है। सावन के इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती भक्तों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गई।
