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वट सावित्री व्रत 2026 नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल
धर्म डेस्क
वट सावित्री व्रत 2026 में क्या करें और क्या न करें, जानें जरूरी नियम और सावधानियां ताकि व्रत का पूरा फल मिल सके।
Vat Savitri Vrat 2026 Niyam: वट सावित्री व्रत 2026 को लेकर बाजारों और घरों में काफी हलचल नजर आ रही है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को किया जाता है, और यह सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह से ही महिलाएं अपनी तैयारियों में जुट जाती हैं, कोई सोलह श्रृंगार की चीजें खरीद रही हैं तो कोई वट वृक्ष की पूजा की तैयारी कर रही हैं। इस साल भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना के लिए इस व्रत को रखने की योजना बना रही हैं। हालांकि, पंडितों और विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है।
लोग लगातार इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। बताया गया है कि वट सावित्री व्रत के दिन सबसे पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहनना और संकल्प लेना जरूरी है। इसके बाद वट वृक्ष और मां सावित्री की पूजा की जाती है। लेकिन इसी दिन कुछ चीजों से दूर रहना चाहिए, जैसे नकारात्मक विचारों से बचना और गुस्सा या ईर्ष्या जैसी भावनाओं को मन में नहीं लाना चाहिए। माना जाता है कि मानसिक शुद्धता के बिना व्रत का फल पूरा नहीं मिलता।
वट सावित्री व्रत 2026 के नियमों के अनुसार, इस दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का असर कम हो सकता है। साथ ही, काले, नीले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं। घरों में भी इस दिन खास ध्यान दिया जाता है, खासकर महिलाओं के बीच ये आम बात है कि पूजा के दौरान किसी तरह का विवाद या झगड़ा नहीं होना चाहिए, खासकर पति के साथ।
ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर, महिलाएं व्रत कथा के दौरान पूरी ध्यान लगाकर बैठती हैं। माना जाता है कि कथा सुनते या पढ़ते समय अगर बीच में उठना पड़े तो वो अशुभ होता है। पूजा के बाद वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय कच्चे सूत या मौली को कई बार पेड़ पर लपेटने की परंपरा है। 5, 7, 11, 21, या 108 बार परिक्रमा करने की मान्यता भी प्रचलित है। इसके अलावा, पूजा के बाद सुहाग की सामग्री किसी सुहागिन महिला को देना भी एक महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।
ज्योतिषचार्यों के अनुसार, वट सावित्री व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है और आमतौर पर चने का सेवन करके व्रत खोला जाता है। इसलिए, कई महिलाएं एक दिन पहले ही चने को भिगोकर रखती हैं।
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वट सावित्री व्रत 2026 नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल
धर्म डेस्क
Vat Savitri Vrat 2026 Niyam: वट सावित्री व्रत 2026 को लेकर बाजारों और घरों में काफी हलचल नजर आ रही है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को किया जाता है, और यह सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह से ही महिलाएं अपनी तैयारियों में जुट जाती हैं, कोई सोलह श्रृंगार की चीजें खरीद रही हैं तो कोई वट वृक्ष की पूजा की तैयारी कर रही हैं। इस साल भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना के लिए इस व्रत को रखने की योजना बना रही हैं। हालांकि, पंडितों और विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है।
लोग लगातार इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। बताया गया है कि वट सावित्री व्रत के दिन सबसे पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहनना और संकल्प लेना जरूरी है। इसके बाद वट वृक्ष और मां सावित्री की पूजा की जाती है। लेकिन इसी दिन कुछ चीजों से दूर रहना चाहिए, जैसे नकारात्मक विचारों से बचना और गुस्सा या ईर्ष्या जैसी भावनाओं को मन में नहीं लाना चाहिए। माना जाता है कि मानसिक शुद्धता के बिना व्रत का फल पूरा नहीं मिलता।
वट सावित्री व्रत 2026 के नियमों के अनुसार, इस दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का असर कम हो सकता है। साथ ही, काले, नीले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं। घरों में भी इस दिन खास ध्यान दिया जाता है, खासकर महिलाओं के बीच ये आम बात है कि पूजा के दौरान किसी तरह का विवाद या झगड़ा नहीं होना चाहिए, खासकर पति के साथ।
ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर, महिलाएं व्रत कथा के दौरान पूरी ध्यान लगाकर बैठती हैं। माना जाता है कि कथा सुनते या पढ़ते समय अगर बीच में उठना पड़े तो वो अशुभ होता है। पूजा के बाद वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय कच्चे सूत या मौली को कई बार पेड़ पर लपेटने की परंपरा है। 5, 7, 11, 21, या 108 बार परिक्रमा करने की मान्यता भी प्रचलित है। इसके अलावा, पूजा के बाद सुहाग की सामग्री किसी सुहागिन महिला को देना भी एक महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।
ज्योतिषचार्यों के अनुसार, वट सावित्री व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है और आमतौर पर चने का सेवन करके व्रत खोला जाता है। इसलिए, कई महिलाएं एक दिन पहले ही चने को भिगोकर रखती हैं।
