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19 साल बाद विंबलडन फाइनल में एक ही देश की दो खिलाड़ी आमने-सामने
स्पोर्ट्स डेस्क
चेक गणराज्य की कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने सेमीफाइनल जीतकर रचा इतिहास। चोटों से जूझकर लौटी मुचोवा पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी से सिर्फ एक कदम दूर।
विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 का महिला एकल वर्ग इस बार इतिहास रचने जा रहा है। प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार चेक गणराज्य की दो खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली है। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह बहुप्रतीक्षित फाइनल 11 जुलाई को लंदन के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेला जाएगा। इस मुकाबले ने न केवल चेक गणराज्य के टेनिस प्रेमियों में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि पूरे टेनिस जगत का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।
विंबलडन के इतिहास में 19 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब किसी एक ही देश की दो महिला खिलाड़ी फाइनल में आमने-सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2009 में अमेरिका की दिग्गज विलियम्स बहनों, सेरेना विलियम्स और वीनस विलियम्स, के बीच खिताबी मुकाबला खेला गया था। अब चेक गणराज्य की दो प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस ऐतिहासिक सूची में अपना नाम दर्ज कराने जा रही हैं।
पहले सेमीफाइनल में अनुभवी खिलाड़ी कारोलिना मुचोवा ने अमेरिका की सातवीं वरीयता प्राप्त स्टार कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराया। यह मुकाबला लगभग पूरे समय रोमांच से भरपूर रहा और दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। पहले सेट में मुचोवा ने आक्रामक शुरुआत करते हुए गॉफ की कमजोर सर्विस का फायदा उठाया और आसानी से बढ़त बना ली। हालांकि दूसरे सेट में कोको गॉफ ने दमदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। टाई-ब्रेकर में स्कोर 8-8 की बराबरी पर पहुंच चुका था। इसी दौरान सर्विस में देरी होने के कारण मुचोवा को टाइम वॉयलेशन की चेतावनी मिली। अगले अंक पर उनका फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और कोको गॉफ को मैच पॉइंट मिल गया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला गॉफ के पक्ष में जा सकता है, लेकिन दबाव के क्षण में गॉफ नेट पर ड्रॉप शॉट लगाने से चूक गईं। मुचोवा ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और लगातार दो महत्वपूर्ण अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
जीत के बाद मुचोवा काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि विंबलडन फाइनल में पहुंचना उनके करियर का सबसे खास पल है। उनके अनुसार मुकाबला बेहद कठिन था और पूरे मैच के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि कोर्ट पर सोचने का समय नहीं था और आखिरी अंक तक मुकाबला तनाव से भरा रहा।
कारोलिना मुचोवा की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका करियर लंबे समय तक चोटों से प्रभावित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वह कलाई, पीठ, पेट, जांघ, टखने और पैर की गंभीर चोटों से जूझती रही हैं। वर्ष 2022 में डॉक्टरों ने उन्हें पेशेवर टेनिस छोड़ने तक की सलाह दे दी थी। इसके बाद उनकी दाईं कलाई की दो बार सर्जरी हुई और उन्हें लगभग दस महीने तक कोर्ट से दूर रहना पड़ा। कठिन संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद उन्होंने शानदार वापसी की है और अब वह अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से सिर्फ एक जीत दूर हैं।
दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की युवा खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्ता कोस्त्युक को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। नोस्कोवा ने पूरे मुकाबले में संयमित और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने अपनी सर्विस पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी की गलतियों का पूरा लाभ उठाया। महज कम उम्र में नोस्कोवा का यह प्रदर्शन उन्हें भविष्य की बड़ी स्टार खिलाड़ियों की सूची में शामिल करता है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है और अब वह अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।
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19 साल बाद विंबलडन फाइनल में एक ही देश की दो खिलाड़ी आमने-सामने
स्पोर्ट्स डेस्क
विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 का महिला एकल वर्ग इस बार इतिहास रचने जा रहा है। प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार चेक गणराज्य की दो खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली है। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह बहुप्रतीक्षित फाइनल 11 जुलाई को लंदन के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेला जाएगा। इस मुकाबले ने न केवल चेक गणराज्य के टेनिस प्रेमियों में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि पूरे टेनिस जगत का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।
विंबलडन के इतिहास में 19 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब किसी एक ही देश की दो महिला खिलाड़ी फाइनल में आमने-सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2009 में अमेरिका की दिग्गज विलियम्स बहनों, सेरेना विलियम्स और वीनस विलियम्स, के बीच खिताबी मुकाबला खेला गया था। अब चेक गणराज्य की दो प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस ऐतिहासिक सूची में अपना नाम दर्ज कराने जा रही हैं।
पहले सेमीफाइनल में अनुभवी खिलाड़ी कारोलिना मुचोवा ने अमेरिका की सातवीं वरीयता प्राप्त स्टार कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराया। यह मुकाबला लगभग पूरे समय रोमांच से भरपूर रहा और दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। पहले सेट में मुचोवा ने आक्रामक शुरुआत करते हुए गॉफ की कमजोर सर्विस का फायदा उठाया और आसानी से बढ़त बना ली। हालांकि दूसरे सेट में कोको गॉफ ने दमदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। टाई-ब्रेकर में स्कोर 8-8 की बराबरी पर पहुंच चुका था। इसी दौरान सर्विस में देरी होने के कारण मुचोवा को टाइम वॉयलेशन की चेतावनी मिली। अगले अंक पर उनका फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और कोको गॉफ को मैच पॉइंट मिल गया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला गॉफ के पक्ष में जा सकता है, लेकिन दबाव के क्षण में गॉफ नेट पर ड्रॉप शॉट लगाने से चूक गईं। मुचोवा ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और लगातार दो महत्वपूर्ण अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
जीत के बाद मुचोवा काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि विंबलडन फाइनल में पहुंचना उनके करियर का सबसे खास पल है। उनके अनुसार मुकाबला बेहद कठिन था और पूरे मैच के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि कोर्ट पर सोचने का समय नहीं था और आखिरी अंक तक मुकाबला तनाव से भरा रहा।
कारोलिना मुचोवा की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका करियर लंबे समय तक चोटों से प्रभावित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वह कलाई, पीठ, पेट, जांघ, टखने और पैर की गंभीर चोटों से जूझती रही हैं। वर्ष 2022 में डॉक्टरों ने उन्हें पेशेवर टेनिस छोड़ने तक की सलाह दे दी थी। इसके बाद उनकी दाईं कलाई की दो बार सर्जरी हुई और उन्हें लगभग दस महीने तक कोर्ट से दूर रहना पड़ा। कठिन संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद उन्होंने शानदार वापसी की है और अब वह अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से सिर्फ एक जीत दूर हैं।
दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की युवा खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्ता कोस्त्युक को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। नोस्कोवा ने पूरे मुकाबले में संयमित और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने अपनी सर्विस पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी की गलतियों का पूरा लाभ उठाया। महज कम उम्र में नोस्कोवा का यह प्रदर्शन उन्हें भविष्य की बड़ी स्टार खिलाड़ियों की सूची में शामिल करता है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है और अब वह अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।
