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सुनील गावस्कर का नो-बॉल रोकने का अनोखा सुझाव, हर गलती पर बढ़े जुर्माना; टीम डिनर में खर्च हो रकम
स्पोर्ट्स डेस्क
पूर्व भारतीय कप्तान ने नो-बॉल के साथ फील्डिंग की गलतियों पर भी पेनल्टी की बात कही, गेंदबाजी कोच को भी जुर्माने में हिस्सेदारी देने का सुझाव
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों की नो-बॉल की समस्या पर एक अलग तरह का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि खिलाड़ियों पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाए और अगर वही गलती दोबारा होती है तो पेनल्टी की रकम बढ़ा दी जाए। गावस्कर ने यह भी कहा कि जुर्माने का कुछ हिस्सा गेंदबाजी कोच से लिया जा सकता है। गावस्कर ने अपने कॉलम में सुझाव दिया कि पहली नो-बॉल पर तय रकम का जुर्माना लगाया जाए और अगली बार उसी खिलाड़ी की गलती पर रकम दोगुनी कर दी जाए। उनके मुताबिक, इस तरह की व्यवस्था गेंदबाजों को अपनी लाइन और फ्रंट फुट पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकती है।
जुर्माने की रकम से हो टीम डिनर
गावस्कर के मुताबिक खिलाड़ियों से जमा की गई पेनल्टी राशि को टीम के डिनर पर खर्च किया जा सकता है। उनका मानना है कि इससे गलती के लिए जिम्मेदारी तय होने के साथ टीम के खिलाड़ियों के बीच आपसी मेलजोल बढ़ाने का मौका भी मिलेगा। उन्होंने जुर्माने की व्यवस्था को केवल नो-बॉल तक सीमित रखने के बजाय मैदान पर होने वाली दूसरी गलतियों तक बढ़ाने की बात भी कही है।
ओवरथ्रो पर बैकअप नहीं देने पर भी पेनल्टी
गावस्कर ने फील्डिंग में ओवरथ्रो के दौरान बैकअप नहीं देने जैसी चूकों को भी जुर्माने के दायरे में लाने का सुझाव दिया। ऐसी गलतियों के लिए टीम के खिलाड़ी मिलकर पेनल्टी तय कर सकते हैं। नो-बॉल को लेकर उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गेंदबाजों के रन-अप और क्रीज की स्थिति जांचने के लिए जरूरी साधन उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में गेंदबाजों के बार-बार क्रीज से आगे पैर जाने को केवल अनजाने में हुई गलती मानना उचित नहीं होगा।
श्रीलंका सीरीज में भारतीय गेंदबाजों ने 20 नो-बॉल कीं
गावस्कर की यह टिप्पणी श्रीलंका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में भारतीय गेंदबाजों की नो-बॉल को लेकर आई है। दो टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान भारत ने कुल 20 नो-बॉल फेंकीं। पहले टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों ने सात, जबकि दूसरे टेस्ट में 13 नो-बॉल कीं। भारत ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम की। कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मुकाबला ड्रॉ रहा।
जडेजा की नो-बॉल का आंकड़ा भी चर्चा में
गावस्कर ने नो-बॉल की समस्या को लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे के तौर पर भी उठाया। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक रविंद्र जडेजा ने पिछले पांच वर्षों में 88 से ज्यादा नो-बॉल की हैं। टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल केवल अतिरिक्त रन का कारण नहीं बनती, बल्कि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका भी मिल सकता है। ऐसे में छोटी दिखने वाली यह गलती मैच के नतीजे पर असर डाल सकती है।
साईराज बहुतुले के फ्री-हिट सुझाव पर अलग राय
भारतीय स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने नो-बॉल की समस्या को लेकर मजाकिया अंदाज में टेस्ट क्रिकेट में भी फ्री-हिट का विकल्प शुरू करने की बात कही थी। उनका विचार था कि इससे गेंदबाज नो-बॉल से बचने के लिए ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं। गावस्कर इस सुझाव से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को नो-बॉल के बाद फ्री-हिट देना जरूरी नहीं है। उन्होंने सीमित बाउंसर नियम और छोटी बाउंड्री का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना पहले ही कुछ आसान हुआ है।
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