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जगदलपुर में अमित शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ होगी बड़ी बैठक, 4 राज्यों के CM पहुंचे बस्तर
जगदलपुर (छ.ग.)
जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, अमित शाह के साथ यूपी, MP, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के CM शामिल।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन काफी महत्वपूर्ण है। जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल बैठक हो रही है, जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं। यह बैठक एक निजी होटल में हो रही है और इसकी अध्यक्षता खुद अमित शाह करेंगे। बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक को लेकर सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिल रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
बैठक में योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, पुष्कर सिंह धामी और विष्णु देव साई शामिल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह जगदलपुर पहुंचे, जबकि बाकी मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर भाजपा के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक की तैयारियों को लेकर प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है, और आम लोगों की आवाजाही पर भी कुछ क्षेत्रों में असर देखने को मिल रहा है।
बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए चर्चा में रहा है। ऐसे में यहां चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है; राजनीतिक हलकों में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब धीरे-धीरे संघर्ष वाले क्षेत्र की छवि से बाहर निकल रहा है और विकास, प्रशासनिक गतिविधियों, और निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन इलाकों में पहले बड़े नेताओं के दौरे सीमित होते थे, वहां अब ऐसी बैठकें होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कानून व्यवस्था, राज्यों के बीच समन्वय, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर रहने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है, और कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी या मौत की खबरें आई हैं। केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अभी तेज किया जाएगा।
सोमवार को अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने बस्तर में आदिवासी समाज, विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर कई बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि पिछले कई दशकों में बस्तर को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। गुंडाधुर की धरती का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस इलाके को अब नई पहचान देने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।
इस बीच, कांग्रेस ने भी बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने कहा कि जब केंद्र सरकार खुद ईंधन बचाने और वर्क फ्रॉम होम की बात करती है, तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल भी की जा सकती थी। उनका कहना था कि चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अलग-अलग विमानों से आए हैं, जिससे लाखों रुपए खर्च हुए। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि बस्तर में इस तरह की बैठक होना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे यहां विकास की नई तस्वीर सामने आएगी।
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जगदलपुर में अमित शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ होगी बड़ी बैठक, 4 राज्यों के CM पहुंचे बस्तर
जगदलपुर (छ.ग.)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन काफी महत्वपूर्ण है। जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल बैठक हो रही है, जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं। यह बैठक एक निजी होटल में हो रही है और इसकी अध्यक्षता खुद अमित शाह करेंगे। बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक को लेकर सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिल रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
बैठक में योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, पुष्कर सिंह धामी और विष्णु देव साई शामिल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह जगदलपुर पहुंचे, जबकि बाकी मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर भाजपा के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक की तैयारियों को लेकर प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है, और आम लोगों की आवाजाही पर भी कुछ क्षेत्रों में असर देखने को मिल रहा है।
बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए चर्चा में रहा है। ऐसे में यहां चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है; राजनीतिक हलकों में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब धीरे-धीरे संघर्ष वाले क्षेत्र की छवि से बाहर निकल रहा है और विकास, प्रशासनिक गतिविधियों, और निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन इलाकों में पहले बड़े नेताओं के दौरे सीमित होते थे, वहां अब ऐसी बैठकें होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कानून व्यवस्था, राज्यों के बीच समन्वय, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर रहने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है, और कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी या मौत की खबरें आई हैं। केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अभी तेज किया जाएगा।
सोमवार को अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने बस्तर में आदिवासी समाज, विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर कई बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि पिछले कई दशकों में बस्तर को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। गुंडाधुर की धरती का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस इलाके को अब नई पहचान देने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।
इस बीच, कांग्रेस ने भी बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने कहा कि जब केंद्र सरकार खुद ईंधन बचाने और वर्क फ्रॉम होम की बात करती है, तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल भी की जा सकती थी। उनका कहना था कि चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अलग-अलग विमानों से आए हैं, जिससे लाखों रुपए खर्च हुए। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि बस्तर में इस तरह की बैठक होना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे यहां विकास की नई तस्वीर सामने आएगी।
