मध्य प्रदेश में तबादलों पर नई व्यवस्था तय, कल CM मोहन यादव कैबिनेट में लगेगी मुहर

भोपाल (म.प्र.)

By Rohit.P
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मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 को बुधवार को कैबिनेट मंजूरी दे सकती है। प्रशासनिक और स्वैच्छिक ट्रांसफर नियमों में बदलाव संभव।

MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश में काफी समय से इंतजार कर रही तबादला नीति को 2026 में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा कर ली है, और अब इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिल जाती है, तो इसके बाद विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बार की तबादला नीति में सबसे ज्यादा बातचीत स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के अलग-अलग लिमिट को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर सकती है।

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पहले की नीतियों में कुल कर्मचारियों का एक सीमित प्रतिशत ही ट्रांसफर किया जा सकता था, जिसमें प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के तबादले शामिल होते थे। कई बार जरूरी पद खाली होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं हो पाता था। इस बार सरकार उस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्रशासनिक आधार पर तबादलों की गुंजाइश बढ़ाने पर सहमति बनी है, और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग नियम बनाने की तैयारी है। मंत्री विजय शाह ने पिछली कैबिनेट बैठक में स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट को खत्म करने का सुझाव दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अगली बैठक में पूरी नीति का प्रस्ताव लाया जाए।

सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद, अब बुधवार सुबह 11 बजे मंत्रालय में बैठक होने जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की क्षेत्रीय परिषद बैठक में व्यस्त रहे, इसलिए उस दिन भी कैबिनेट नहीं हो पाई। अब ये उम्मीद की जा रही है कि बुधवार की बैठक में तबादला नीति के साथ कुछ और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों के बीच नई नीति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कई विभागों में पिछले कई महीनों से ट्रांसफर रुके हुए हैं, जिससे कर्मचारी नई सूची का इंतजार कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस बार सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति अलग रखने की योजना है, जैसे हर साल होता आया है। इसके अलावा, जनजातीय कार्य, ऊर्जा और राजस्व विभाग भी अलग गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा। प्रस्ताव में ये भी शामिल किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से किए जाएंगे। वहीं, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति जरूरी होगी। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में फिर से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।

इसी बीच, सरकार ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है। अब राज्य मंत्री जरूरतमंदों के लिए 25 हजार रुपए तक की सहायता राशि मंजूर कर सकेंगे। इससे पहले ये सीमा 16 हजार रुपए थी। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही 40 हजार रुपए कर दी गई थी। 11 मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को आगामी प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

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19 May 2026 By Rohit.P

मध्य प्रदेश में तबादलों पर नई व्यवस्था तय, कल CM मोहन यादव कैबिनेट में लगेगी मुहर

भोपाल (म.प्र.)

MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश में काफी समय से इंतजार कर रही तबादला नीति को 2026 में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा कर ली है, और अब इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिल जाती है, तो इसके बाद विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बार की तबादला नीति में सबसे ज्यादा बातचीत स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के अलग-अलग लिमिट को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर सकती है।

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पहले की नीतियों में कुल कर्मचारियों का एक सीमित प्रतिशत ही ट्रांसफर किया जा सकता था, जिसमें प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के तबादले शामिल होते थे। कई बार जरूरी पद खाली होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं हो पाता था। इस बार सरकार उस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्रशासनिक आधार पर तबादलों की गुंजाइश बढ़ाने पर सहमति बनी है, और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग नियम बनाने की तैयारी है। मंत्री विजय शाह ने पिछली कैबिनेट बैठक में स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट को खत्म करने का सुझाव दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अगली बैठक में पूरी नीति का प्रस्ताव लाया जाए।

सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद, अब बुधवार सुबह 11 बजे मंत्रालय में बैठक होने जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की क्षेत्रीय परिषद बैठक में व्यस्त रहे, इसलिए उस दिन भी कैबिनेट नहीं हो पाई। अब ये उम्मीद की जा रही है कि बुधवार की बैठक में तबादला नीति के साथ कुछ और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों के बीच नई नीति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कई विभागों में पिछले कई महीनों से ट्रांसफर रुके हुए हैं, जिससे कर्मचारी नई सूची का इंतजार कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस बार सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति अलग रखने की योजना है, जैसे हर साल होता आया है। इसके अलावा, जनजातीय कार्य, ऊर्जा और राजस्व विभाग भी अलग गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा। प्रस्ताव में ये भी शामिल किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से किए जाएंगे। वहीं, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति जरूरी होगी। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में फिर से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।

इसी बीच, सरकार ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है। अब राज्य मंत्री जरूरतमंदों के लिए 25 हजार रुपए तक की सहायता राशि मंजूर कर सकेंगे। इससे पहले ये सीमा 16 हजार रुपए थी। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही 40 हजार रुपए कर दी गई थी। 11 मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को आगामी प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-system-on-transfers-in-madhya-pradesh-will-be-approved/article-53805

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