दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग,(छ.ग.)

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म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन, 30 संदिग्ध खाताधारकों की जांच जारी

दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। 

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18 Jun 2026 By Vaishnavi.J

दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग,(छ.ग.)

दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-action-on-cyber-fraud-network-in-durg-6-accused/article-56298

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