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इंदौर के 12 वर्षीय सुमेध को मिला वर्ल्ड चैंपियनशिप का टिकट, दिल्ली में भारत के लिए दिखाएंगे दम
इंदौर (म.प्र.)
अर्निस की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर बनाई जगह, 1 से 4 अगस्त तक तालकटोरा स्टेडियम में होगा मुकाबला
महज 12 साल की उम्र में इंदौर के सुमेध श्रीवास्तव अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। सुमेध को 18वीं वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप-2026 के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। प्रतियोगिता 1 से 4 अगस्त तक नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित की जाएगी। इस चैंपियनशिप में भारत के साथ दुनिया के कई देशों से खिलाड़ी चुनौती पेश करेंगे।
वर्ल्ड एस्क्रिमा-काली-अर्निस फेडरेशन (WEKAF) और अर्निस इंडिया फेडरेशन के संयुक्त आयोजन में होने वाली इस प्रतियोगिता में सुमेध पैडेड स्टिक कैटेगरी में उतरेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन और स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जगह बनाई है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचने के पीछे वर्षों की ट्रेनिंग और लगातार अभ्यास रहा है।
सुमेध के पिता डॉ. सुभोध श्रीवास्तव के मुताबिक, खेलों से उनका जुड़ाव बहुत छोटी उम्र में हो गया था। करीब साढ़े तीन साल की उम्र में उन्होंने कराटे सीखना शुरू किया। लगातार प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल की। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में सुमेध अब तक 35 से ज्यादा गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं।
कराटे में सफलता के बाद सुमेध ने खुद को एक ही मार्शल आर्ट तक सीमित नहीं रखा और अर्निस का प्रशिक्षण भी शुरू किया। नई तकनीक सीखने के साथ उन्होंने इस खेल में तेजी से अपनी पहचान बनाई। राष्ट्रीय अर्निस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतना उनके लिए अहम उपलब्धि साबित हुआ और इसी प्रदर्शन ने वर्ल्ड चैंपियनशिप का रास्ता खोला।
इस बार की प्रतियोगिता इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप का आयोजन भारत में किया जा रहा है। इसमें भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, ब्रिटेन, सिंगापुर, वियतनाम, श्रीलंका, ईरान, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल समेत कई देशों के खिलाड़ी शामिल होंगे। ऐसे में सुमेध के सामने अलग-अलग देशों के प्रशिक्षित खिलाड़ियों से मुकाबला करने की चुनौती होगी।
सुमेध के कोच ग्रैंडमास्टर सैयद आलम के अनुसार, उनकी तेजी, स्टैमिना और तकनीकी समझ उनकी प्रमुख खूबियां हैं। प्रतियोगिता को देखते हुए इन सभी पहलुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। कोच का कहना है कि कम उम्र के बावजूद सुमेध अभ्यास को लेकर गंभीर रहते हैं और नई तकनीकों को तेजी से सीखने की क्षमता रखते हैं।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में सुमेध पैडेड स्टिक स्पर्धा के अपने आयु वर्ग में हिस्सा लेंगे। इस कैटेगरी में खिलाड़ियों के बीच विशेष रूप से तैयार फोम कवर वाली स्टिक से मुकाबला होता है। सुरक्षा के लिए हेलमेट, ग्लव्स और चेस्ट गार्ड सहित जरूरी प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल किया जाता है। मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों की तकनीक, गति और नियंत्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खेल के साथ सुमेध अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देते हैं। उनकी मां नंदिता श्रीवास्तव के अनुसार, सुमेध ने विभिन्न ओलंपियाड में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। उनका अधिकांश समय पढ़ाई और खेल की ट्रेनिंग के बीच बंटा रहता है। परिवार का कहना है कि वह मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिताने से बचते हैं और नियमित अभ्यास को प्राथमिकता देते हैं।
अब सुमेध की तैयारी दिल्ली में होने वाली अंतरराष्ट्रीय चुनौती के लिए चल रही है। वर्षों तक कराटे और अर्निस में की गई ट्रेनिंग के बाद पहली बार उन्हें विश्व स्तर पर भारत की ओर से उतरने का अवसर मिला है।
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इंदौर के 12 वर्षीय सुमेध को मिला वर्ल्ड चैंपियनशिप का टिकट, दिल्ली में भारत के लिए दिखाएंगे दम
इंदौर (म.प्र.)
महज 12 साल की उम्र में इंदौर के सुमेध श्रीवास्तव अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। सुमेध को 18वीं वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप-2026 के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। प्रतियोगिता 1 से 4 अगस्त तक नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित की जाएगी। इस चैंपियनशिप में भारत के साथ दुनिया के कई देशों से खिलाड़ी चुनौती पेश करेंगे।
वर्ल्ड एस्क्रिमा-काली-अर्निस फेडरेशन (WEKAF) और अर्निस इंडिया फेडरेशन के संयुक्त आयोजन में होने वाली इस प्रतियोगिता में सुमेध पैडेड स्टिक कैटेगरी में उतरेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन और स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जगह बनाई है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचने के पीछे वर्षों की ट्रेनिंग और लगातार अभ्यास रहा है।
सुमेध के पिता डॉ. सुभोध श्रीवास्तव के मुताबिक, खेलों से उनका जुड़ाव बहुत छोटी उम्र में हो गया था। करीब साढ़े तीन साल की उम्र में उन्होंने कराटे सीखना शुरू किया। लगातार प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल की। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में सुमेध अब तक 35 से ज्यादा गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं।
कराटे में सफलता के बाद सुमेध ने खुद को एक ही मार्शल आर्ट तक सीमित नहीं रखा और अर्निस का प्रशिक्षण भी शुरू किया। नई तकनीक सीखने के साथ उन्होंने इस खेल में तेजी से अपनी पहचान बनाई। राष्ट्रीय अर्निस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतना उनके लिए अहम उपलब्धि साबित हुआ और इसी प्रदर्शन ने वर्ल्ड चैंपियनशिप का रास्ता खोला।
इस बार की प्रतियोगिता इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ल्ड अर्निस चैंपियनशिप का आयोजन भारत में किया जा रहा है। इसमें भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, ब्रिटेन, सिंगापुर, वियतनाम, श्रीलंका, ईरान, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल समेत कई देशों के खिलाड़ी शामिल होंगे। ऐसे में सुमेध के सामने अलग-अलग देशों के प्रशिक्षित खिलाड़ियों से मुकाबला करने की चुनौती होगी।
सुमेध के कोच ग्रैंडमास्टर सैयद आलम के अनुसार, उनकी तेजी, स्टैमिना और तकनीकी समझ उनकी प्रमुख खूबियां हैं। प्रतियोगिता को देखते हुए इन सभी पहलुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। कोच का कहना है कि कम उम्र के बावजूद सुमेध अभ्यास को लेकर गंभीर रहते हैं और नई तकनीकों को तेजी से सीखने की क्षमता रखते हैं।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में सुमेध पैडेड स्टिक स्पर्धा के अपने आयु वर्ग में हिस्सा लेंगे। इस कैटेगरी में खिलाड़ियों के बीच विशेष रूप से तैयार फोम कवर वाली स्टिक से मुकाबला होता है। सुरक्षा के लिए हेलमेट, ग्लव्स और चेस्ट गार्ड सहित जरूरी प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल किया जाता है। मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों की तकनीक, गति और नियंत्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खेल के साथ सुमेध अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देते हैं। उनकी मां नंदिता श्रीवास्तव के अनुसार, सुमेध ने विभिन्न ओलंपियाड में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। उनका अधिकांश समय पढ़ाई और खेल की ट्रेनिंग के बीच बंटा रहता है। परिवार का कहना है कि वह मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिताने से बचते हैं और नियमित अभ्यास को प्राथमिकता देते हैं।
अब सुमेध की तैयारी दिल्ली में होने वाली अंतरराष्ट्रीय चुनौती के लिए चल रही है। वर्षों तक कराटे और अर्निस में की गई ट्रेनिंग के बाद पहली बार उन्हें विश्व स्तर पर भारत की ओर से उतरने का अवसर मिला है।
