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AIIMS भोपाल में 28 मार्च से लंग ट्रांसप्लांट शुरू: मध्य भारत का पहला सरकारी अस्पताल, जहां सभी प्रमुख अंग प्रत्यारोपण मुफ्त
भोपाल (म.प्र.)
दिल, किडनी, बोन मैरो और अब फेफड़ों का ट्रांसप्लांट एक ही छत के नीचे; लाखों मरीजों को मिलेगा बड़ा राहत
मध्य भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तहत AIIMS भोपाल 28 मार्च 2026 से लंग (फेफड़ा) ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही यह संस्थान क्षेत्र का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां दिल, किडनी, बोन मैरो और लंग—सभी प्रमुख अंगों का प्रत्यारोपण एक ही स्थान पर और पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा।
यह कदम उन लाखों मरीजों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें अब तक ऐसे जटिल ऑपरेशन के लिए दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था और निजी अस्पतालों में भारी खर्च उठाना पड़ता था।
संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, लंग ट्रांसप्लांट शुरू करने से पहले जरूरी निरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम सरकारी अनुमति मिलने के बाद यह सेवा शुरू कर दी जाएगी। अस्पताल ने ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, पोस्ट-ट्रांसप्लांट केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सहित सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
AIIMS भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है। जनवरी 2025 में यहां मध्य प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था। अब तक संस्थान में 3 हार्ट ट्रांसप्लांट और 17 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिससे यहां विशेषज्ञता का मजबूत आधार तैयार हुआ है।
लंग ट्रांसप्लांट के साथ-साथ संस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। जल्द ही यहां गामा नाइफ और PET स्कैन मशीनें लगाई जाएंगी। इसके अलावा एक नया समर्पित ICU ब्लॉक और अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
देशभर में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में ये सुविधाएं सीमित हैं। भारत में हर साल बड़ी संख्या में मरीज अंग विफलता के कारण जान गंवा देते हैं, क्योंकि समय पर ट्रांसप्लांट उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में AIIMS भोपाल की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होने से इलाज की पहुंच बढ़ेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को जीवनदान मिल सकेगा।
आने वाले समय में AIIMS भोपाल का यह मॉडल अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। फिलहाल, 28 मार्च को शुरू होने वाला लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्धि है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में समानता की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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AIIMS भोपाल में 28 मार्च से लंग ट्रांसप्लांट शुरू: मध्य भारत का पहला सरकारी अस्पताल, जहां सभी प्रमुख अंग प्रत्यारोपण मुफ्त
भोपाल (म.प्र.)
मध्य भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तहत AIIMS भोपाल 28 मार्च 2026 से लंग (फेफड़ा) ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही यह संस्थान क्षेत्र का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां दिल, किडनी, बोन मैरो और लंग—सभी प्रमुख अंगों का प्रत्यारोपण एक ही स्थान पर और पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा।
यह कदम उन लाखों मरीजों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें अब तक ऐसे जटिल ऑपरेशन के लिए दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था और निजी अस्पतालों में भारी खर्च उठाना पड़ता था।
संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, लंग ट्रांसप्लांट शुरू करने से पहले जरूरी निरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम सरकारी अनुमति मिलने के बाद यह सेवा शुरू कर दी जाएगी। अस्पताल ने ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, पोस्ट-ट्रांसप्लांट केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सहित सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
AIIMS भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है। जनवरी 2025 में यहां मध्य प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था। अब तक संस्थान में 3 हार्ट ट्रांसप्लांट और 17 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिससे यहां विशेषज्ञता का मजबूत आधार तैयार हुआ है।
लंग ट्रांसप्लांट के साथ-साथ संस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। जल्द ही यहां गामा नाइफ और PET स्कैन मशीनें लगाई जाएंगी। इसके अलावा एक नया समर्पित ICU ब्लॉक और अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
देशभर में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में ये सुविधाएं सीमित हैं। भारत में हर साल बड़ी संख्या में मरीज अंग विफलता के कारण जान गंवा देते हैं, क्योंकि समय पर ट्रांसप्लांट उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में AIIMS भोपाल की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होने से इलाज की पहुंच बढ़ेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को जीवनदान मिल सकेगा।
आने वाले समय में AIIMS भोपाल का यह मॉडल अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। फिलहाल, 28 मार्च को शुरू होने वाला लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्धि है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में समानता की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
