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9 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन प्रधान आरक्षक पर कोर्ट में चालान पेश, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
रीवा,(म.प्र.)
2017 में 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए तत्कालीन प्रधान आरक्षक मनोज सिंह बघेल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद विशेष न्यायालय सीधी में पेश किया गया अभियोग पत्र।
मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के पुराने मामलों के त्वरित निराकरण की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2017 के चर्चित रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन प्रधान आरक्षक मनोज सिंह बघेल के खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह कार्रवाई लोकायुक्त संगठन द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के उद्देश्य से की गई है।
लोकायुक्त संगठन से मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देशन तथा उप महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में की गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान इस प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए जांच प्रक्रिया पूरी की गई और आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद विशेष न्यायालय में चालान पेश किया गया।
जानकारी के मुताबिक आरोपी मनोज सिंह बघेल वर्ष 2017 में सीधी जिले के मझौली थाना अंतर्गत मड़वास चौकी में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। शिकायतकर्ता हरिश्चंद्र तिवारी ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि उनके ओवरलोड ट्रक से जुड़े मामले में कार्रवाई न करने और जेल नहीं भेजने के एवज में प्रधान आरक्षक द्वारा 5 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त रीवा इकाई ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
लोकायुक्त टीम ने 4 अगस्त 2017 को योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधान आरक्षक को शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई थी। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत अपराध क्रमांक 156/2017 दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों ने दस्तावेजी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया। विवेचना में आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। इसके बाद नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रकरण मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग को भेजा गया। शासन स्तर पर परीक्षण के बाद अभियोजन की अनुमति प्रदान कर दी गई।
अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद लोकायुक्त रीवा इकाई ने समस्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सीधी में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। यह अभियोग पत्र क्रमांक 23/2026 के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि न्यायालय में इसे विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2026 के रूप में पंजीबद्ध किया गया है। अब इस मामले में न्यायालय के समक्ष नियमित सुनवाई होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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9 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन प्रधान आरक्षक पर कोर्ट में चालान पेश, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
रीवा,(म.प्र.)
मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के पुराने मामलों के त्वरित निराकरण की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्ष 2017 के चर्चित रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन प्रधान आरक्षक मनोज सिंह बघेल के खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह कार्रवाई लोकायुक्त संगठन द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के उद्देश्य से की गई है।
लोकायुक्त संगठन से मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देशन तथा उप महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में की गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान इस प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए जांच प्रक्रिया पूरी की गई और आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद विशेष न्यायालय में चालान पेश किया गया।
जानकारी के मुताबिक आरोपी मनोज सिंह बघेल वर्ष 2017 में सीधी जिले के मझौली थाना अंतर्गत मड़वास चौकी में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। शिकायतकर्ता हरिश्चंद्र तिवारी ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि उनके ओवरलोड ट्रक से जुड़े मामले में कार्रवाई न करने और जेल नहीं भेजने के एवज में प्रधान आरक्षक द्वारा 5 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त रीवा इकाई ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
लोकायुक्त टीम ने 4 अगस्त 2017 को योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधान आरक्षक को शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई थी। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत अपराध क्रमांक 156/2017 दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों ने दस्तावेजी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया। विवेचना में आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। इसके बाद नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रकरण मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग को भेजा गया। शासन स्तर पर परीक्षण के बाद अभियोजन की अनुमति प्रदान कर दी गई।
अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद लोकायुक्त रीवा इकाई ने समस्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सीधी में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। यह अभियोग पत्र क्रमांक 23/2026 के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि न्यायालय में इसे विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2026 के रूप में पंजीबद्ध किया गया है। अब इस मामले में न्यायालय के समक्ष नियमित सुनवाई होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
