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रिहायशी इलाके में घुसा मगरमच्छ, वन विभाग ने त्वरित रेस्क्यू कर सोन घड़ियाल अभयारण्य में छोड़ा
रीवा,(म.प्र.)
सीधी के पनवार चौहान टोला में नहर से निकलकर पहुंचा मगरमच्छ, सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाकर टाला बड़ा हादसा
सीधी जिले के पनवार चौहान टोला गांव में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब नहर से निकलकर एक मगरमच्छ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। गांव के लोगों ने जैसे ही मगरमच्छ को आबादी के बीच घूमते देखा, इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के कंट्रोल रूम को दी, जिसके बाद विभाग ने बिना देर किए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू किया और उसे सुरक्षित रूप से सोन घड़ियाल अभयारण्य के गऊघाट क्षेत्र में छोड़ दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। वनमंडल सीधी के कंट्रोल रूम में अरुण सिंह चौहान द्वारा सूचना दी गई कि पनवार चौहान टोला गांव के पास स्थित नहर से एक मगरमच्छ निकलकर रिहायशी क्षेत्र में पहुंच गया है। सूचना मिलते ही वनमंडल अधिकारी प्रीति अहिरवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल रेस्क्यू टीम गठित करने के निर्देश दिए। वन क्षेत्राधिकारी सीधी रविंद्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में विशेष टीम को मौके पर रवाना किया गया।

वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचते ही सबसे पहले लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि मगरमच्छ के करीब जाने या उसे पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे जान-माल का खतरा बढ़ सकता है। टीम ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर मगरमच्छ की गतिविधियों पर नजर रखी और योजनाबद्ध तरीके से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रेस्क्यू टीम ने आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से अपने नियंत्रण में लिया। पूरी कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो मगरमच्छ को किसी प्रकार की चोट पहुंचे और न ही आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो। सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम मगरमच्छ को विशेष वाहन से सोन घड़ियाल अभयारण्य के गऊघाट क्षेत्र लेकर पहुंची, जहां प्राकृतिक आवास में उसे छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बरसात के मौसम में नदियों, नहरों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने के कारण कई बार मगरमच्छ और अन्य जलीय वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर आसपास के क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम होता है। ग्रामीणों ने बताया कि मगरमच्छ के दिखाई देने के बाद कुछ समय के लिए पूरे गांव में भय का माहौल बन गया था। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे और बच्चों को भी सुरक्षित स्थानों पर रखा गया। हालांकि वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लोगों ने रेस्क्यू टीम की तत्परता और पेशेवर तरीके से अभियान पूरा करने की सराहना भी की।
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वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि भविष्य में किसी भी गांव या आबादी वाले क्षेत्र में मगरमच्छ, तेंदुआ, भालू या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो स्वयं कोई जोखिम न उठाएं। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग के कंट्रोल रूम या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ लगाने या वन्यजीव को घेरने का प्रयास करने से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क का एक बड़ा कारण प्राकृतिक आवासों में बदलाव और मानसून के दौरान जल स्रोतों का फैलाव भी है। ऐसे समय में वन विभाग की सतर्कता और स्थानीय लोगों का सहयोग दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय पर सूचना मिलने से वन्यजीवों को भी सुरक्षित बचाया जा सकता है और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
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रिहायशी इलाके में घुसा मगरमच्छ, वन विभाग ने त्वरित रेस्क्यू कर सोन घड़ियाल अभयारण्य में छोड़ा
रीवा,(म.प्र.)
सीधी जिले के पनवार चौहान टोला गांव में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब नहर से निकलकर एक मगरमच्छ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। गांव के लोगों ने जैसे ही मगरमच्छ को आबादी के बीच घूमते देखा, इलाके में दहशत फैल गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के कंट्रोल रूम को दी, जिसके बाद विभाग ने बिना देर किए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू किया और उसे सुरक्षित रूप से सोन घड़ियाल अभयारण्य के गऊघाट क्षेत्र में छोड़ दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। वनमंडल सीधी के कंट्रोल रूम में अरुण सिंह चौहान द्वारा सूचना दी गई कि पनवार चौहान टोला गांव के पास स्थित नहर से एक मगरमच्छ निकलकर रिहायशी क्षेत्र में पहुंच गया है। सूचना मिलते ही वनमंडल अधिकारी प्रीति अहिरवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल रेस्क्यू टीम गठित करने के निर्देश दिए। वन क्षेत्राधिकारी सीधी रविंद्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में विशेष टीम को मौके पर रवाना किया गया।

वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचते ही सबसे पहले लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि मगरमच्छ के करीब जाने या उसे पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे जान-माल का खतरा बढ़ सकता है। टीम ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर मगरमच्छ की गतिविधियों पर नजर रखी और योजनाबद्ध तरीके से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रेस्क्यू टीम ने आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से अपने नियंत्रण में लिया। पूरी कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो मगरमच्छ को किसी प्रकार की चोट पहुंचे और न ही आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो। सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम मगरमच्छ को विशेष वाहन से सोन घड़ियाल अभयारण्य के गऊघाट क्षेत्र लेकर पहुंची, जहां प्राकृतिक आवास में उसे छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बरसात के मौसम में नदियों, नहरों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने के कारण कई बार मगरमच्छ और अन्य जलीय वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर आसपास के क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम होता है। ग्रामीणों ने बताया कि मगरमच्छ के दिखाई देने के बाद कुछ समय के लिए पूरे गांव में भय का माहौल बन गया था। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे और बच्चों को भी सुरक्षित स्थानों पर रखा गया। हालांकि वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लोगों ने रेस्क्यू टीम की तत्परता और पेशेवर तरीके से अभियान पूरा करने की सराहना भी की।
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वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि भविष्य में किसी भी गांव या आबादी वाले क्षेत्र में मगरमच्छ, तेंदुआ, भालू या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो स्वयं कोई जोखिम न उठाएं। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग के कंट्रोल रूम या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ लगाने या वन्यजीव को घेरने का प्रयास करने से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क का एक बड़ा कारण प्राकृतिक आवासों में बदलाव और मानसून के दौरान जल स्रोतों का फैलाव भी है। ऐसे समय में वन विभाग की सतर्कता और स्थानीय लोगों का सहयोग दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय पर सूचना मिलने से वन्यजीवों को भी सुरक्षित बचाया जा सकता है और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
