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चार साल से अटका बस संचालकों का करोड़ों का भुगतान, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली राहत
रीवा,(म.प्र.)
रीवा बस ऑनर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, चुनाव, रैलियों और शासकीय कार्यक्रमों में अधिग्रहित बसों का किराया व ब्याज सहित भुगतान कराने की उठाई मांग।
शासकीय चुनाव कार्यों, रैलियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए अधिग्रहित की गई बसों का वर्षों से लंबित भुगतान नहीं होने से बस संचालकों में भारी नाराजगी है। गुरुवार को रीवा बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और लंबित भुगतान जल्द कराने की मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2022 से अब तक 26 शासकीय कार्यक्रमों में प्रशासन को बसें उपलब्ध कराई गईं, लेकिन निर्धारित किराया आज तक नहीं मिला। इतना ही नहीं, इस मामले में उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है।
बस ऑनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि जिला प्रशासन और विभिन्न शासकीय विभागों के निर्देश पर चुनावी कार्य, जनसभाएं, रैलियां तथा अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए उनकी बसों का अधिग्रहण किया गया था। प्रशासनिक आदेशों का पालन करते हुए बस संचालकों ने समय पर वाहन उपलब्ध कराए, जिससे सरकारी कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। हालांकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान नहीं किया गया, जिससे बस संचालकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2022 से लेकर अब तक कुल 26 कार्यक्रमों का भुगतान लंबित है। इनमें चुनाव संबंधी कार्य, शासकीय रैलियां और अन्य सरकारी आयोजन शामिल हैं। कई बस संचालकों ने वाहन संचालन के लिए बैंक से ऋण लिया हुआ है। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें ऋण की किस्तें, बीमा, टैक्स, फिटनेस, परमिट और कर्मचारियों के वेतन जैसी जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई हो रही है।
बस संचालकों ने बताया कि लंबित भुगतान के संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब सभी प्रयास विफल हो गए तो संगठन को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद बस संचालकों के पक्ष में आदेश जारी किया गया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जिन बसों का अधिग्रहण किया गया था, उनके किराये का भुगतान अधिग्रहण की तिथि से भुगतान की वास्तविक तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए। न्यायालय ने संबंधित विभागों और प्रशासन को 90 दिनों के भीतर संपूर्ण भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। एसोसिएशन का कहना है कि न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति जिला प्रशासन और संबंधित सभी विभागों को विधिवत उपलब्ध करा दी गई थी।
बस ऑनर्स एसोसिएशन का आरोप है कि न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा समाप्त हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक आदेश का पालन नहीं किया गया। इससे बस संचालकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों का भी पालन नहीं होगा तो आम नागरिकों और व्यापारिक संगठनों का प्रशासन पर विश्वास प्रभावित होगा। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कलेक्टर से मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित जारी किए जाएं। साथ ही भविष्य में शासकीय कार्यों के लिए अधिग्रहित किए जाने वाले वाहनों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर करने की व्यवस्था भी बनाई जाए, ताकि वाहन संचालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
बस संचालकों ने यह भी कहा कि शासकीय कार्यों में निजी बसों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। चुनाव, आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यक्रम और बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन इन्हीं वाहनों पर निर्भर रहता है। ऐसे में यदि समय पर भुगतान नहीं होगा तो भविष्य में वाहन उपलब्ध कराने में भी व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालने की अपील की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि बस संचालक हमेशा शासन और प्रशासन के सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। सरकारी आदेश मिलते ही वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि सार्वजनिक कार्य प्रभावित न हों। लेकिन वर्षों तक भुगतान लंबित रहने से वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कई संचालकों को वाहन संचालन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ रहा है।
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चार साल से अटका बस संचालकों का करोड़ों का भुगतान, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली राहत
रीवा,(म.प्र.)
शासकीय चुनाव कार्यों, रैलियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए अधिग्रहित की गई बसों का वर्षों से लंबित भुगतान नहीं होने से बस संचालकों में भारी नाराजगी है। गुरुवार को रीवा बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और लंबित भुगतान जल्द कराने की मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2022 से अब तक 26 शासकीय कार्यक्रमों में प्रशासन को बसें उपलब्ध कराई गईं, लेकिन निर्धारित किराया आज तक नहीं मिला। इतना ही नहीं, इस मामले में उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है।
बस ऑनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि जिला प्रशासन और विभिन्न शासकीय विभागों के निर्देश पर चुनावी कार्य, जनसभाएं, रैलियां तथा अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए उनकी बसों का अधिग्रहण किया गया था। प्रशासनिक आदेशों का पालन करते हुए बस संचालकों ने समय पर वाहन उपलब्ध कराए, जिससे सरकारी कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। हालांकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान नहीं किया गया, जिससे बस संचालकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2022 से लेकर अब तक कुल 26 कार्यक्रमों का भुगतान लंबित है। इनमें चुनाव संबंधी कार्य, शासकीय रैलियां और अन्य सरकारी आयोजन शामिल हैं। कई बस संचालकों ने वाहन संचालन के लिए बैंक से ऋण लिया हुआ है। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें ऋण की किस्तें, बीमा, टैक्स, फिटनेस, परमिट और कर्मचारियों के वेतन जैसी जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई हो रही है।
बस संचालकों ने बताया कि लंबित भुगतान के संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब सभी प्रयास विफल हो गए तो संगठन को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद बस संचालकों के पक्ष में आदेश जारी किया गया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जिन बसों का अधिग्रहण किया गया था, उनके किराये का भुगतान अधिग्रहण की तिथि से भुगतान की वास्तविक तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए। न्यायालय ने संबंधित विभागों और प्रशासन को 90 दिनों के भीतर संपूर्ण भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। एसोसिएशन का कहना है कि न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति जिला प्रशासन और संबंधित सभी विभागों को विधिवत उपलब्ध करा दी गई थी।
बस ऑनर्स एसोसिएशन का आरोप है कि न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा समाप्त हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक आदेश का पालन नहीं किया गया। इससे बस संचालकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों का भी पालन नहीं होगा तो आम नागरिकों और व्यापारिक संगठनों का प्रशासन पर विश्वास प्रभावित होगा। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कलेक्टर से मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए और सभी लंबित भुगतान ब्याज सहित जारी किए जाएं। साथ ही भविष्य में शासकीय कार्यों के लिए अधिग्रहित किए जाने वाले वाहनों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर करने की व्यवस्था भी बनाई जाए, ताकि वाहन संचालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
बस संचालकों ने यह भी कहा कि शासकीय कार्यों में निजी बसों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। चुनाव, आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यक्रम और बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन इन्हीं वाहनों पर निर्भर रहता है। ऐसे में यदि समय पर भुगतान नहीं होगा तो भविष्य में वाहन उपलब्ध कराने में भी व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालने की अपील की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि बस संचालक हमेशा शासन और प्रशासन के सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। सरकारी आदेश मिलते ही वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि सार्वजनिक कार्य प्रभावित न हों। लेकिन वर्षों तक भुगतान लंबित रहने से वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कई संचालकों को वाहन संचालन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ रहा है।
