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भारत पहुंचने से पहले ईरानी तेल टैंकर ने बदला रास्ता, 6 लाख बैरल लेकर चीन की ओर मुड़ा
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
ईरान ऑयल टैंकर भारत आते-आते चीन मुड़ गया, जानिए पेमेंट विवाद और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच इस बड़े फैसले की वजह।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी एक अहम घटना सामने आई है, जिसने ऊर्जा कारोबार को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। भारत की ओर बढ़ रहा एक ईरानी कच्चे तेल से भरा टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की तरफ मुड़ गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।
वाडिनार पोर्ट के करीब पहुंचकर बदला रास्ता
मिली जानकारी के अनुसार, यह टैंकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट के काफी करीब पहुंच चुका था और उम्मीद जताई जा रही थी कि यह जल्द ही भारत पहुंच जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में जहाज ने अपनी दिशा बदल दी और अब इसका नया गंतव्य चीन के शैनडोंग प्रांत का डोंगयिंग बताया जा रहा है। शिप ट्रैकिंग डेटा से इस बदलाव की पुष्टि हुई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेमेंट विवाद बना बड़ी वजह
ट्रेड से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस अचानक बदलाव के पीछे भुगतान से जुड़ी समस्याएं प्रमुख कारण हो सकती हैं। जानकारी के मुताबिक, तेल विक्रेता अब पहले की तरह उधार में तेल देने को तैयार नहीं हैं और तत्काल भुगतान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि खरीदार और विक्रेता के बीच वित्तीय सहमति नहीं बनती, तो डील अधर में लटक जाती है, जैसा कि इस मामले में संभव नजर आ रहा है।
टैंकर में मौजूद था भारी मात्रा में तेल
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ था। यह खेप भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, खासकर इसलिए क्योंकि भारत पिछले कई वर्षों से ईरान से तेल आयात नहीं कर रहा है। ऐसे में इस संभावित डील को लेकर बाजार में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई थी।
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी प्रतिबंध भी एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका ने हाल ही में ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी थी, ताकि पहले से भरे टैंकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें और वैश्विक आपूर्ति संतुलित बनी रहे। लेकिन इसके बावजूद, प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम अब भी व्यापारिक निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।
डार्क फ्लीट और बदलती रणनीति
तेल व्यापार में शामिल कुछ टैंकर अक्सर अपनी लोकेशन बदलकर असली गंतव्य छिपाने की कोशिश करते हैं, जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। हालांकि, इस मामले में जहाज की शुरुआती दिशा साफ तौर पर भारत की ओर थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम समय में परिस्थितियां बदली हैं। अगर शुरुआत से ही गंतव्य चीन होता, तो जहाज का मार्ग अलग होता।
क्या भारत आ सकता है यह तेल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान से जुड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं, तो यह तेल अभी भी भारत की ओर मोड़ा जा सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में कौन-सी रिफाइनरी इस तेल को खरीदने वाली थी, लेकिन बाजार की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
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भारत पहुंचने से पहले ईरानी तेल टैंकर ने बदला रास्ता, 6 लाख बैरल लेकर चीन की ओर मुड़ा
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी एक अहम घटना सामने आई है, जिसने ऊर्जा कारोबार को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। भारत की ओर बढ़ रहा एक ईरानी कच्चे तेल से भरा टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की तरफ मुड़ गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।
वाडिनार पोर्ट के करीब पहुंचकर बदला रास्ता
मिली जानकारी के अनुसार, यह टैंकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट के काफी करीब पहुंच चुका था और उम्मीद जताई जा रही थी कि यह जल्द ही भारत पहुंच जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में जहाज ने अपनी दिशा बदल दी और अब इसका नया गंतव्य चीन के शैनडोंग प्रांत का डोंगयिंग बताया जा रहा है। शिप ट्रैकिंग डेटा से इस बदलाव की पुष्टि हुई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेमेंट विवाद बना बड़ी वजह
ट्रेड से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस अचानक बदलाव के पीछे भुगतान से जुड़ी समस्याएं प्रमुख कारण हो सकती हैं। जानकारी के मुताबिक, तेल विक्रेता अब पहले की तरह उधार में तेल देने को तैयार नहीं हैं और तत्काल भुगतान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि खरीदार और विक्रेता के बीच वित्तीय सहमति नहीं बनती, तो डील अधर में लटक जाती है, जैसा कि इस मामले में संभव नजर आ रहा है।
टैंकर में मौजूद था भारी मात्रा में तेल
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ था। यह खेप भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, खासकर इसलिए क्योंकि भारत पिछले कई वर्षों से ईरान से तेल आयात नहीं कर रहा है। ऐसे में इस संभावित डील को लेकर बाजार में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई थी।
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी प्रतिबंध भी एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका ने हाल ही में ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी थी, ताकि पहले से भरे टैंकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें और वैश्विक आपूर्ति संतुलित बनी रहे। लेकिन इसके बावजूद, प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम अब भी व्यापारिक निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।
डार्क फ्लीट और बदलती रणनीति
तेल व्यापार में शामिल कुछ टैंकर अक्सर अपनी लोकेशन बदलकर असली गंतव्य छिपाने की कोशिश करते हैं, जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। हालांकि, इस मामले में जहाज की शुरुआती दिशा साफ तौर पर भारत की ओर थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम समय में परिस्थितियां बदली हैं। अगर शुरुआत से ही गंतव्य चीन होता, तो जहाज का मार्ग अलग होता।
क्या भारत आ सकता है यह तेल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान से जुड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं, तो यह तेल अभी भी भारत की ओर मोड़ा जा सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में कौन-सी रिफाइनरी इस तेल को खरीदने वाली थी, लेकिन बाजार की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
