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राष्ट्रपति मुर्मु का स्वतंत्रता दिवस संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर से अर्थव्यवस्था तक 10 बड़ी बातें
Digital Desk
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय और विकसित भारत के संकल्प को एक साझा संदेश में जोड़ा।
उनके भाषण में ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से लेकर सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता, डिजिटल भुगतान, महिला नेतृत्व, युवा शक्ति और पर्यावरण संरक्षण तक कई मुद्दे शामिल रहे। संबोधन की 10 सबसे महत्वपूर्ण बातें यहां पढ़िए।
1. वैश्विक अस्थिरता के बीच तेज अर्थव्यवस्था
राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध और दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता के बावजूद भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक अनुमानों के आधार पर उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि दर वैश्विक औसत के दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है।
2. आत्मनिर्भर भारत आर्थिक और सुरक्षा रणनीति
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान को आर्थिक प्रगति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव बताया। संदेश साफ था कि महत्वपूर्ण तकनीक, उत्पादन और आपूर्ति शृंखला में घरेलू क्षमता रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ी है।
3. ऑपरेशन सिंदूर पर सशस्त्र बलों की प्रशंसा
राष्ट्रपति मुर्मु ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारतीय सशस्त्र बलों की सटीक कार्रवाई और क्षमता का प्रमाण बताया तथा आतंकवादियों और उनके मददगारों को कड़ा संदेश देने वाला अभियान कहा।
4. सिंधु जल संधि निलंबन को निर्णायक कदम बताया
राष्ट्रपति ने आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को राष्ट्रीय हित और विशेष रूप से भारतीय किसानों के हित में उठाया गया निर्णायक कदम बताया।
5. नक्सलवाद से मुक्ति और बस्तर में बदलाव
उन्होंने दशकों तक नक्सलवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए भारत को नक्सल-मुक्त बनाने को बड़ी उपलब्धि कहा। राष्ट्रपति ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का उल्लेख कर बताया कि पहले हिंसा से प्रभावित इलाकों में अब खेल, संस्कृति और समावेशी विकास का माहौल बन रहा है।
6. कल्याण योजनाओं के बड़े आंकड़े
राष्ट्रपति ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने करीब 59 करोड़ जनधन खाताधारकों—जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं—के साथ 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन और 60 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख किया। ये सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े हैं।
7. डिजिटल लेनदेन में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी
राष्ट्रपति के अनुसार दुनिया के आधे से अधिक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को पारदर्शी तरीके से कल्याण लाभ पहुंचाने और छोटे दुकानदारों तक भुगतान सुविधा फैलाने वाला परिवर्तन बताया।
8. परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर जोर
उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं को युवाओं के लिए अवसर का प्रवेश-द्वार बताया। परीक्षा सुधारों का लक्ष्य अनुचित साधनों पर पूरी रोक, अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और युवाओं का भरोसा बहाल करना बताया गया।
9. महिला उपलब्धियां, लखपति दीदी और नेतृत्व
राष्ट्रपति ने शिक्षा, खेती, वायुसेना, खेल और उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल हो चुका है और अब तीन करोड़ नई लखपति दीदी बनाने की दिशा में देश बढ़ रहा है।
10. युवा शक्ति, प्रकृति और विकसित भारत
उन्होंने 35 वर्ष से कम आयु वाली 65 प्रतिशत आबादी को देश की सबसे मूल्यवान संपदा बताया। युवाओं के नवाचार, स्टार्टअप और रोजगार-सृजन की क्षमता के साथ उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की बात की और पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत तथा सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
राष्ट्रपति मुर्मु का स्वतंत्रता दिवस संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर से अर्थव्यवस्था तक 10 बड़ी बातें
Digital Desk
उनके भाषण में ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से लेकर सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता, डिजिटल भुगतान, महिला नेतृत्व, युवा शक्ति और पर्यावरण संरक्षण तक कई मुद्दे शामिल रहे। संबोधन की 10 सबसे महत्वपूर्ण बातें यहां पढ़िए।
1. वैश्विक अस्थिरता के बीच तेज अर्थव्यवस्था
राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध और दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता के बावजूद भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक अनुमानों के आधार पर उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि दर वैश्विक औसत के दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है।
2. आत्मनिर्भर भारत आर्थिक और सुरक्षा रणनीति
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान को आर्थिक प्रगति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव बताया। संदेश साफ था कि महत्वपूर्ण तकनीक, उत्पादन और आपूर्ति शृंखला में घरेलू क्षमता रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ी है।
3. ऑपरेशन सिंदूर पर सशस्त्र बलों की प्रशंसा
राष्ट्रपति मुर्मु ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारतीय सशस्त्र बलों की सटीक कार्रवाई और क्षमता का प्रमाण बताया तथा आतंकवादियों और उनके मददगारों को कड़ा संदेश देने वाला अभियान कहा।
4. सिंधु जल संधि निलंबन को निर्णायक कदम बताया
राष्ट्रपति ने आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को राष्ट्रीय हित और विशेष रूप से भारतीय किसानों के हित में उठाया गया निर्णायक कदम बताया।
5. नक्सलवाद से मुक्ति और बस्तर में बदलाव
उन्होंने दशकों तक नक्सलवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए भारत को नक्सल-मुक्त बनाने को बड़ी उपलब्धि कहा। राष्ट्रपति ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का उल्लेख कर बताया कि पहले हिंसा से प्रभावित इलाकों में अब खेल, संस्कृति और समावेशी विकास का माहौल बन रहा है।
6. कल्याण योजनाओं के बड़े आंकड़े
राष्ट्रपति ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने करीब 59 करोड़ जनधन खाताधारकों—जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं—के साथ 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन और 60 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख किया। ये सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े हैं।
7. डिजिटल लेनदेन में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी
राष्ट्रपति के अनुसार दुनिया के आधे से अधिक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को पारदर्शी तरीके से कल्याण लाभ पहुंचाने और छोटे दुकानदारों तक भुगतान सुविधा फैलाने वाला परिवर्तन बताया।
8. परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर जोर
उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं को युवाओं के लिए अवसर का प्रवेश-द्वार बताया। परीक्षा सुधारों का लक्ष्य अनुचित साधनों पर पूरी रोक, अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और युवाओं का भरोसा बहाल करना बताया गया।
9. महिला उपलब्धियां, लखपति दीदी और नेतृत्व
राष्ट्रपति ने शिक्षा, खेती, वायुसेना, खेल और उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल हो चुका है और अब तीन करोड़ नई लखपति दीदी बनाने की दिशा में देश बढ़ रहा है।
10. युवा शक्ति, प्रकृति और विकसित भारत
उन्होंने 35 वर्ष से कम आयु वाली 65 प्रतिशत आबादी को देश की सबसे मूल्यवान संपदा बताया। युवाओं के नवाचार, स्टार्टअप और रोजगार-सृजन की क्षमता के साथ उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की बात की और पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत तथा सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
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