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सुगम भारत की नई पहचान, यूनिवर्सल डिजाइन अवॉर्ड्स में 14 व्यक्तियों-संस्थाओं को सम्मान
Digital desk
भारत में सुगम्यता, समावेशन और यूनिवर्सल डिजाइन को बढ़ावा देने वाले 14 व्यक्तियों और संगठनों को 17वें एनसीपीईडीपी-एमफेसिस यूनिवर्सल डिजाइन अवॉर्ड्स 2026 से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के होटल ताज महल में आयोजित समारोह में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के महानिदेशक अरविंद कुमार सहित उद्योग, नीति-निर्माण, प्रौद्योगिकी और दिव्यांगजन अधिकार क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वर्ष 2010 में एनसीपीईडीपी और एमफेसिस द्वारा शुरू किए गए इन पुरस्कारों का उद्देश्य सुगम्यता को किसी सुविधा के रूप में बाद में जोड़ने के बजाय डिजाइन और नवाचार की मूलभूत आवश्यकता के रूप में स्थापित करने वाले प्रयासों को सम्मानित करना है। इस वर्ष पुरस्कार चार श्रेणियों—रोल मॉडल पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज, रोल मॉडल वर्किंग प्रोफेशनल्स, रोल मॉडल कंपनीज एंड ऑर्गनाइजेशन्स तथा जावेद अबिदी पब्लिक पॉलिसी अवॉर्ड—में प्रदान किए गए।
सम्मानित प्रमुख नामों में निलेश सिंगीत, जयना कोठारी, जय वकील फाउंडेशन और डॉ. स्रुति मोहापात्रा शामिल रहे। जय वकील की सीईओ अर्चना चंद्र को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा यूनिलीवर पीएलसी, एनसीईआरटी और गैबिफाई सहित कई अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
समारोह को संबोधित करते हुए एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि 17 वर्ष पहले यूनिवर्सल डिजाइन पर संवाद शुरू करना एक आवश्यकता थी, लेकिन आज सुगम्यता अधिकार और दायित्व का विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि समावेशी डिजाइन नवाचार की सीमा नहीं, बल्कि उसे सार्थक बनाने का आधार है। उन्होंने भवनों, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकी समाधानों और खरीद प्रक्रियाओं में शुरुआत से ही सुगम्यता को शामिल करने पर जोर दिया।

एमफेसिस की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं ग्लोबल हेड—ईएसजी, स्पार्कल इनोवेशन इकोसिस्टम एंड कम्युनिकेशंस दीपा नागराज ने कहा कि तकनीक की वास्तविक सार्थकता इस बात से तय होती है कि वह कितने लोगों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और विकसित होता अधिकार ढांचा समावेशी डिजाइन को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाएं बढ़ा रहे हैं।
फायरसाइड चैट में एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने सहायक तकनीक के भविष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि ब्लेंडेड फाइनेंस और नए वित्तीय मॉडल तकनीकी संभावनाओं को वास्तविक पहुंच में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में पुरस्कारों की 17 वर्षों की यात्रा और सुगम्यता के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण बदलावों पर भी चर्चा हुई। आयोजकों ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास के साथ यूनिवर्सल डिजाइन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। सुगम्यता अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि ऐसे समावेशी भारत की आधारशिला है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सेवाओं और अवसरों तक समान पहुंच मिल सके। समारोह ने यह संदेश दोहराया कि सुगम्यता को बाद में जोड़े जाने वाले विकल्प के बजाय हर डिजाइन की शुरुआत से ही प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए।
सुगम भारत की नई पहचान, यूनिवर्सल डिजाइन अवॉर्ड्स में 14 व्यक्तियों-संस्थाओं को सम्मान
Digital desk
वर्ष 2010 में एनसीपीईडीपी और एमफेसिस द्वारा शुरू किए गए इन पुरस्कारों का उद्देश्य सुगम्यता को किसी सुविधा के रूप में बाद में जोड़ने के बजाय डिजाइन और नवाचार की मूलभूत आवश्यकता के रूप में स्थापित करने वाले प्रयासों को सम्मानित करना है। इस वर्ष पुरस्कार चार श्रेणियों—रोल मॉडल पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज, रोल मॉडल वर्किंग प्रोफेशनल्स, रोल मॉडल कंपनीज एंड ऑर्गनाइजेशन्स तथा जावेद अबिदी पब्लिक पॉलिसी अवॉर्ड—में प्रदान किए गए।
सम्मानित प्रमुख नामों में निलेश सिंगीत, जयना कोठारी, जय वकील फाउंडेशन और डॉ. स्रुति मोहापात्रा शामिल रहे। जय वकील की सीईओ अर्चना चंद्र को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा यूनिलीवर पीएलसी, एनसीईआरटी और गैबिफाई सहित कई अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
समारोह को संबोधित करते हुए एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि 17 वर्ष पहले यूनिवर्सल डिजाइन पर संवाद शुरू करना एक आवश्यकता थी, लेकिन आज सुगम्यता अधिकार और दायित्व का विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि समावेशी डिजाइन नवाचार की सीमा नहीं, बल्कि उसे सार्थक बनाने का आधार है। उन्होंने भवनों, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकी समाधानों और खरीद प्रक्रियाओं में शुरुआत से ही सुगम्यता को शामिल करने पर जोर दिया।

एमफेसिस की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं ग्लोबल हेड—ईएसजी, स्पार्कल इनोवेशन इकोसिस्टम एंड कम्युनिकेशंस दीपा नागराज ने कहा कि तकनीक की वास्तविक सार्थकता इस बात से तय होती है कि वह कितने लोगों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और विकसित होता अधिकार ढांचा समावेशी डिजाइन को बड़े स्तर पर लागू करने की संभावनाएं बढ़ा रहे हैं।
फायरसाइड चैट में एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने सहायक तकनीक के भविष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि ब्लेंडेड फाइनेंस और नए वित्तीय मॉडल तकनीकी संभावनाओं को वास्तविक पहुंच में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में पुरस्कारों की 17 वर्षों की यात्रा और सुगम्यता के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण बदलावों पर भी चर्चा हुई। आयोजकों ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास के साथ यूनिवर्सल डिजाइन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। सुगम्यता अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि ऐसे समावेशी भारत की आधारशिला है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सेवाओं और अवसरों तक समान पहुंच मिल सके। समारोह ने यह संदेश दोहराया कि सुगम्यता को बाद में जोड़े जाने वाले विकल्प के बजाय हर डिजाइन की शुरुआत से ही प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए।
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