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Hariyali Teej 2026: आज मनाई जाएगी हरियाली तीज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और इस पर्व का महत्व
धर्म डेस्क
हरियाली तीज 2026 इस साल 15 अगस्त को मनाई जाएगी। जानिए तृतीया तिथि, पूजा का समय, व्रत, मेहंदी, झूले और शिव-पार्वती पूजा का महत्व।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाले इस पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। हरियाली तीज को सावन की तीज, छोटी तीज और मधुश्रवा तीज के नाम से भी जाना जाता है। मानसून के दौरान प्रकृति के हरे-भरे स्वरूप के कारण इसे ‘हरियाली तीज’ कहा जाता है। उत्तर भारत के कई राज्यों में यह पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
15 अगस्त को हरियाली तीज
2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को है। उज्जैन के पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:47 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5:29 बजे तक रहेगी।15 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:07 बजे और सूर्यास्त शाम करीब 6:55 बजे होगा। ये समय उज्जैन के लिए दिए गए हैं और स्थान के अनुसार पंचांग के समय में अंतर हो सकता है।
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी वजह से महिलाएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा कर वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता की कामना करती हैं। अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।
हरे रंग के कपड़े और श्रृंगार
हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं हरी साड़ी, लहंगा या अन्य पारंपरिक परिधान पहनती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना, चूड़ियां पहनना और पारंपरिक श्रृंगार करना पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।कई परिवारों में नवविवाहित महिलाओं को मायके बुलाने और ससुराल की ओर से श्रृंगार सामग्री, कपड़े, चूड़ियां और मिठाइयां देने की परंपरा भी है। इसे कई क्षेत्रों में सिंधारा से जोड़ा जाता है।
झूले और लोकगीतों की परंपरा
हरियाली तीज का संबंध झूलों और सावन के लोकगीतों से भी है। कई जगह पेड़ों पर झूले लगाए जाते हैं, जहां महिलाएं और युवतियां पारंपरिक गीत गाते हुए झूला झूलती हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आज भी तीज के दौरान सामूहिक रूप से लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और समुदायों में इन परंपराओं का स्वरूप अलग हो सकता है।
मेहंदी और सोलह श्रृंगार
हरियाली तीज पर मेहंदी लगाने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। महिलाएं हाथों पर अलग-अलग डिजाइन की मेहंदी लगाती हैं और कई जगह पति या प्रियजन का नाम भी मेहंदी में लिखा जाता है। सोलह श्रृंगार को भी इस पर्व से जोड़ा जाता है। सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और पारंपरिक आभूषणों के साथ महिलाएं पर्व के लिए विशेष रूप से तैयार होती हैं।
कैसे रखा जाता है व्रत?
कई महिलाएं हरियाली तीज पर व्रत रखती हैं। कुछ स्थानों पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा भी है, जिसमें दिनभर भोजन और पानी का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि, व्रत की परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक निर्जल उपवास उचित है या नहीं, इसे लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
देशभर में अलग-अलग नाम
हरियाली तीज मुख्य रूप से उत्तर भारत में उत्साह के साथ मनाई जाती है। राजस्थान में इसे कई जगह शिंगारा तीज से जोड़ा जाता है, जबकि पंजाब में तीज के उत्सव को तीयां के नाम से जाना जाता है। वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में भी सावन के दौरान झूलन और राधा-कृष्ण से जुड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिरों में भगवान के लिए झूले सजाए जाते हैं और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
हरियाली तीज का सांस्कृतिक महत्व
हरियाली तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है। यह महिलाओं के पारिवारिक और सामाजिक मेल-जोल, लोक परंपराओं, संगीत, श्रृंगार और सावन की प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है। पारंपरिक रूप से यह पर्व महिलाओं को अपने मायके और ससुराल के परिवारों से जुड़ने का अवसर देता रहा है। बदलते समय के साथ इसके तौर-तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन शिव-पार्वती की पूजा, मेहंदी, झूले, हरे परिधान और सावन के गीत आज भी इसकी पहचान बने हुए हैं।
Hariyali Teej 2026: आज मनाई जाएगी हरियाली तीज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और इस पर्व का महत्व
धर्म डेस्क
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाले इस पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। हरियाली तीज को सावन की तीज, छोटी तीज और मधुश्रवा तीज के नाम से भी जाना जाता है। मानसून के दौरान प्रकृति के हरे-भरे स्वरूप के कारण इसे ‘हरियाली तीज’ कहा जाता है। उत्तर भारत के कई राज्यों में यह पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
15 अगस्त को हरियाली तीज
2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को है। उज्जैन के पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:47 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5:29 बजे तक रहेगी।15 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:07 बजे और सूर्यास्त शाम करीब 6:55 बजे होगा। ये समय उज्जैन के लिए दिए गए हैं और स्थान के अनुसार पंचांग के समय में अंतर हो सकता है।
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी वजह से महिलाएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा कर वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता की कामना करती हैं। अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।
हरे रंग के कपड़े और श्रृंगार
हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं हरी साड़ी, लहंगा या अन्य पारंपरिक परिधान पहनती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना, चूड़ियां पहनना और पारंपरिक श्रृंगार करना पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।कई परिवारों में नवविवाहित महिलाओं को मायके बुलाने और ससुराल की ओर से श्रृंगार सामग्री, कपड़े, चूड़ियां और मिठाइयां देने की परंपरा भी है। इसे कई क्षेत्रों में सिंधारा से जोड़ा जाता है।
झूले और लोकगीतों की परंपरा
हरियाली तीज का संबंध झूलों और सावन के लोकगीतों से भी है। कई जगह पेड़ों पर झूले लगाए जाते हैं, जहां महिलाएं और युवतियां पारंपरिक गीत गाते हुए झूला झूलती हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आज भी तीज के दौरान सामूहिक रूप से लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और समुदायों में इन परंपराओं का स्वरूप अलग हो सकता है।
मेहंदी और सोलह श्रृंगार
हरियाली तीज पर मेहंदी लगाने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। महिलाएं हाथों पर अलग-अलग डिजाइन की मेहंदी लगाती हैं और कई जगह पति या प्रियजन का नाम भी मेहंदी में लिखा जाता है। सोलह श्रृंगार को भी इस पर्व से जोड़ा जाता है। सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और पारंपरिक आभूषणों के साथ महिलाएं पर्व के लिए विशेष रूप से तैयार होती हैं।
कैसे रखा जाता है व्रत?
कई महिलाएं हरियाली तीज पर व्रत रखती हैं। कुछ स्थानों पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा भी है, जिसमें दिनभर भोजन और पानी का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि, व्रत की परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक निर्जल उपवास उचित है या नहीं, इसे लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
देशभर में अलग-अलग नाम
हरियाली तीज मुख्य रूप से उत्तर भारत में उत्साह के साथ मनाई जाती है। राजस्थान में इसे कई जगह शिंगारा तीज से जोड़ा जाता है, जबकि पंजाब में तीज के उत्सव को तीयां के नाम से जाना जाता है। वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में भी सावन के दौरान झूलन और राधा-कृष्ण से जुड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिरों में भगवान के लिए झूले सजाए जाते हैं और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
हरियाली तीज का सांस्कृतिक महत्व
हरियाली तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है। यह महिलाओं के पारिवारिक और सामाजिक मेल-जोल, लोक परंपराओं, संगीत, श्रृंगार और सावन की प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है। पारंपरिक रूप से यह पर्व महिलाओं को अपने मायके और ससुराल के परिवारों से जुड़ने का अवसर देता रहा है। बदलते समय के साथ इसके तौर-तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन शिव-पार्वती की पूजा, मेहंदी, झूले, हरे परिधान और सावन के गीत आज भी इसकी पहचान बने हुए हैं।
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