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शी जिनपिंग की यात्रा से पहले तिब्बती समुदाय का विरोध प्रदर्शन, चीन के कानून को वापस लेने की मांग
अंतराष्ट्रीय न्यूज
निर्वासित तिब्बती समुदाय ने प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर जताई नाराजगी, ‘जातीय एकता कानून’ को लेकर उठाए सवाल
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा से पहले निर्वासित तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शन के दौरान समुदाय ने चीन की नीतियों के खिलाफ अपनी चिंताएं जाहिर कीं और कथित ‘जातीय एकता कानून’ को वापस लेने की मांग रखी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चीन की ओर से लागू की गई कुछ नीतियां तिब्बती पहचान, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को प्रभावित कर रही हैं। समुदाय से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा। तिब्बती समुदाय लंबे समय से चीन की तिब्बत नीति को लेकर विरोध दर्ज कराता रहा है। निर्वासित तिब्बती संगठनों का आरोप है कि चीन की नीतियों के कारण तिब्बती भाषा, संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे प्रभावित हुए हैं।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चीन सरकार से संबंधित कानून और नीतियों की समीक्षा करने की अपील की। उनका कहना है कि क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। चीन सरकार हालांकि तिब्बत से जुड़ी अपनी नीतियों का बचाव करती रही है और कहती है कि उसके कदम राष्ट्रीय एकता, विकास और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए हैं।
शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान तिब्बत से जुड़े संगठन अक्सर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं। ऐसे विरोध प्रदर्शनों में मानवाधिकार, सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं। इस बार का प्रदर्शन भी तिब्बत मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस के बीच हुआ है, जहां चीन की नीतियों को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
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