‘Cocktail 2’ फिल्म रिव्यू: फीकी कहानी और कमजोर रोमांस का मिश्रण

बालीवुड डेस्क

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हॉमी अदजानिया और लव रंजन की फिल्म में सितारों की चमक के बावजूद कहानी नहीं पकड़ पाती रफ्तार, इमोशनल गहराई की कमी साफ दिखी

हॉलीवुड और ग्लैमर से भरपूर सेटअप के बीच बनी फिल्म ‘Cocktail 2’ दर्शकों से एक बड़े रोमांटिक-कॉमेडी अनुभव का वादा करती है, लेकिन पर्दे पर कहानी अपनी चमक खो देती है। हॉमी अदजानिया और लव रंजन की इस संयुक्त कोशिश में शुरुआत तो आकर्षक लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म अपनी पकड़ खोने लगती है। शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म एक फीकी और असंतुलित रोमांटिक ड्रामा बनकर रह जाती है। कहानी का सेटअप बेहद ग्लैमरस है, जहां कूनाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) लंबे रिश्ते में रहने के बाद इटली की छुट्टियों पर जाते हैं। इसी बीच एली (कृति सेनन) की एंट्री होती है, जो पूरे रिश्ते की दिशा बदल देती है। दिया अपने रिश्ते की सच्चाई जांचने के लिए एक ऐसा कदम उठाती है, जो कहानी को उलझा देता है। यह ट्विस्ट शुरू में दिलचस्प लगता है, लेकिन जल्द ही यह फिल्म को अविश्वसनीय और बनावटी मोड़ पर ले जाता है।

फिल्म का सबसे बड़ा मुद्दा इसकी स्क्रिप्ट का असंतुलन है। हॉमी अदजानिया की संवेदनशील और शहरी महिला-केंद्रित कहानियों की शैली और लव रंजन की व्यंग्यात्मक रोमांटिक सोच का मेल यहां सही तरीके से काम नहीं कर पाया। नतीजा यह है कि महिला किरदारों की आवाज कहीं खो जाती है और पुरुष किरदार लगभग बिना किसी खरोंच के सामने आता है। कहानी में भावनात्मक गहराई की जगह सतही संघर्ष ज्यादा दिखाई देता है, जिससे दर्शक जुड़ नहीं पाते। इटली का खूबसूरत लोकेशन फिल्म को विजुअल रूप से आकर्षक बनाता है, लेकिन कहानी की कमजोरी को छुपा नहीं पाता। पूरी फिल्म किसी फैशन एड या ट्रैवल व्लॉग जैसी लगती है, जहां रिश्तों की जटिलता को दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन वह सिर्फ सतही स्तर पर ही रह जाती है। ‘सुकून’ और ‘जस्टजू’ जैसे भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन ये भाव स्क्रीन पर असर नहीं छोड़ पाते। संगीत के स्तर पर फिल्म थोड़ी राहत देती है। प्रीतम का म्यूजिक और ‘माशूका’ जैसे गाने फिल्म को थोड़ी ऊर्जा देते हैं। लेकिन यह ऊर्जा भी कहानी की कमजोर पकड़ को ज्यादा देर तक संभाल नहीं पाती। फिल्म में फैशन और स्टाइल पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे हर सीन एक विजुअल शोपीस जैसा लगता है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव की कमी साफ महसूस होती है। रश्मिका मंदाना का किरदार शुरुआत में मजबूत दिखता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह भी पुराने टेम्पलेट में फंस जाता है। उनका किरदार एक आधुनिक लड़की के रूप में दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन अंत में वह असुरक्षित और पारंपरिक छवि में बदल जाता है। वहीं उनकी हिंदी डायलॉग डिलीवरी कई जगहों पर असर कम कर देती है, जिससे किरदार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

शाहिद कपूर अपने रोल में सहज नजर आते हैं, लेकिन कहानी उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं देती। उनका किरदार घटनाओं के बीच फंसा हुआ लगता है, जहां वह सिर्फ प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन कहानी को आगे ले जाने की ताकत कम दिखाई देती है। कृति सेनन का किरदार शुरुआत में दिलचस्प लगता है, लेकिन धीरे-धीरे वह भी एक नियंत्रित और सीमित इमोशनल ग्राफ में फंस जाता है। कृति सेनन की परफॉर्मेंस में मेहनत साफ दिखती है, लेकिन वह ‘वेरोनिका’ जैसी आइकॉनिक छाप छोड़ने में असफल रहती हैं। उनके किरदार में वह अनियंत्रित ऊर्जा और भावनात्मक तूफान नहीं दिखता, जो पहली ‘Cocktail’ फिल्म की आत्मा था। पूरी फिल्म में किरदारों की केमिस्ट्री और इमोशनल कनेक्शन कमजोर पड़ता जाता है, जिससे दर्शकों की रुचि भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। अंततः ‘Cocktail 2’ एक ऐसे विचार पर बनी फिल्म लगती है, जिसमें संभावनाएं तो बहुत थीं, लेकिन निष्पादन कमजोर रह गया। फिल्म का ग्लैमर और स्टारकास्ट उसे कुछ हद तक संभालते हैं, लेकिन कहानी और भावनात्मक गहराई की कमी इसे एक यादगार रोमांटिक फिल्म बनने से रोक देती है।

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24 Jun 2026 By Vaishnavi.J

‘Cocktail 2’ फिल्म रिव्यू: फीकी कहानी और कमजोर रोमांस का मिश्रण

बालीवुड डेस्क

हॉलीवुड और ग्लैमर से भरपूर सेटअप के बीच बनी फिल्म ‘Cocktail 2’ दर्शकों से एक बड़े रोमांटिक-कॉमेडी अनुभव का वादा करती है, लेकिन पर्दे पर कहानी अपनी चमक खो देती है। हॉमी अदजानिया और लव रंजन की इस संयुक्त कोशिश में शुरुआत तो आकर्षक लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म अपनी पकड़ खोने लगती है। शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म एक फीकी और असंतुलित रोमांटिक ड्रामा बनकर रह जाती है। कहानी का सेटअप बेहद ग्लैमरस है, जहां कूनाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) लंबे रिश्ते में रहने के बाद इटली की छुट्टियों पर जाते हैं। इसी बीच एली (कृति सेनन) की एंट्री होती है, जो पूरे रिश्ते की दिशा बदल देती है। दिया अपने रिश्ते की सच्चाई जांचने के लिए एक ऐसा कदम उठाती है, जो कहानी को उलझा देता है। यह ट्विस्ट शुरू में दिलचस्प लगता है, लेकिन जल्द ही यह फिल्म को अविश्वसनीय और बनावटी मोड़ पर ले जाता है।

फिल्म का सबसे बड़ा मुद्दा इसकी स्क्रिप्ट का असंतुलन है। हॉमी अदजानिया की संवेदनशील और शहरी महिला-केंद्रित कहानियों की शैली और लव रंजन की व्यंग्यात्मक रोमांटिक सोच का मेल यहां सही तरीके से काम नहीं कर पाया। नतीजा यह है कि महिला किरदारों की आवाज कहीं खो जाती है और पुरुष किरदार लगभग बिना किसी खरोंच के सामने आता है। कहानी में भावनात्मक गहराई की जगह सतही संघर्ष ज्यादा दिखाई देता है, जिससे दर्शक जुड़ नहीं पाते। इटली का खूबसूरत लोकेशन फिल्म को विजुअल रूप से आकर्षक बनाता है, लेकिन कहानी की कमजोरी को छुपा नहीं पाता। पूरी फिल्म किसी फैशन एड या ट्रैवल व्लॉग जैसी लगती है, जहां रिश्तों की जटिलता को दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन वह सिर्फ सतही स्तर पर ही रह जाती है। ‘सुकून’ और ‘जस्टजू’ जैसे भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन ये भाव स्क्रीन पर असर नहीं छोड़ पाते। संगीत के स्तर पर फिल्म थोड़ी राहत देती है। प्रीतम का म्यूजिक और ‘माशूका’ जैसे गाने फिल्म को थोड़ी ऊर्जा देते हैं। लेकिन यह ऊर्जा भी कहानी की कमजोर पकड़ को ज्यादा देर तक संभाल नहीं पाती। फिल्म में फैशन और स्टाइल पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे हर सीन एक विजुअल शोपीस जैसा लगता है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव की कमी साफ महसूस होती है। रश्मिका मंदाना का किरदार शुरुआत में मजबूत दिखता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह भी पुराने टेम्पलेट में फंस जाता है। उनका किरदार एक आधुनिक लड़की के रूप में दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन अंत में वह असुरक्षित और पारंपरिक छवि में बदल जाता है। वहीं उनकी हिंदी डायलॉग डिलीवरी कई जगहों पर असर कम कर देती है, जिससे किरदार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

शाहिद कपूर अपने रोल में सहज नजर आते हैं, लेकिन कहानी उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं देती। उनका किरदार घटनाओं के बीच फंसा हुआ लगता है, जहां वह सिर्फ प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन कहानी को आगे ले जाने की ताकत कम दिखाई देती है। कृति सेनन का किरदार शुरुआत में दिलचस्प लगता है, लेकिन धीरे-धीरे वह भी एक नियंत्रित और सीमित इमोशनल ग्राफ में फंस जाता है। कृति सेनन की परफॉर्मेंस में मेहनत साफ दिखती है, लेकिन वह ‘वेरोनिका’ जैसी आइकॉनिक छाप छोड़ने में असफल रहती हैं। उनके किरदार में वह अनियंत्रित ऊर्जा और भावनात्मक तूफान नहीं दिखता, जो पहली ‘Cocktail’ फिल्म की आत्मा था। पूरी फिल्म में किरदारों की केमिस्ट्री और इमोशनल कनेक्शन कमजोर पड़ता जाता है, जिससे दर्शकों की रुचि भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। अंततः ‘Cocktail 2’ एक ऐसे विचार पर बनी फिल्म लगती है, जिसमें संभावनाएं तो बहुत थीं, लेकिन निष्पादन कमजोर रह गया। फिल्म का ग्लैमर और स्टारकास्ट उसे कुछ हद तक संभालते हैं, लेकिन कहानी और भावनात्मक गहराई की कमी इसे एक यादगार रोमांटिक फिल्म बनने से रोक देती है।

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