- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- विंध्य/रीवा
- सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत
रीवा,(म.प्र.)
मझौली जनपद पंचायत के विभागीय ग्रुप में सामने आया मैसेज, प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई चैट; अधिकारियों ने कंसल्टेंसी शुल्क बताया
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में प्रभारी मंत्री के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले एक वायरल व्हाट्सएप चैट ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला जनपद पंचायत मझौली से जुड़ा है, जहां विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में ग्राम रोजगार सहायकों (जीआरएस) और पंचायत सचिवों से तीन-तीन हजार रुपए जमा कराने संबंधी एक संदेश वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर यह चैट तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यह मैसेज मझौली जनपद पंचायत के सेक्टर करमाई नामक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया था। बताया जा रहा है कि ग्रुप में भेजे गए संदेश में जनपद पंचायत के उपयंत्री अनित कुमार दीपांकर की ओर से ग्राम रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों से तीन हजार रुपए जमा कराने की बात कही गई थी। संदेश में यह भी उल्लेख था कि चमराडोल और परसिली ग्राम पंचायतों को छोड़कर अन्य पंचायतों के कर्मचारी निर्धारित राशि जनपद कार्यालय में जमा करें।जैसे ही यह चैट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, मामले ने तूल पकड़ लिया। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाने लगा कि प्रभारी मंत्री के दौरे की व्यवस्थाओं के लिए यह राशि एकत्रित की जा रही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल संदेश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा।
बताया जा रहा है कि मझौली जनपद पंचायत के अंतर्गत कुल 53 ग्राम पंचायतें आती हैं। इनमें से दो पंचायतों चमराडोल और परसिली को छोड़कर शेष 51 पंचायतों में पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक कार्यरत हैं। यदि प्रत्येक पंचायत से तीन हजार रुपए लिए जाते, तो कुल राशि लगभग एक लाख 53 हजार रुपए तक पहुंचती। इसी संभावित राशि को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है। उप संभाग मझौली की एसडीओ आरईएस सरिता सिंह ने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से किसी प्रकार की प्रत्यक्ष वसूली का निर्देश नहीं दिया गया था। उनके अनुसार यह केवल एक संदेश था, जिसका उद्देश्य जीआईएस आधारित प्लानिंग कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना था। उन्होंने बताया कि विभाग के पास जीआईएस प्लान तैयार करने के लिए पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एक कंसल्टेंसी एजेंसी की मदद लेने का प्रस्ताव था और उसी संदर्भ में कर्मचारियों के बीच संदेश साझा किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया का प्रभारी मंत्री के दौरे या उनकी व्यवस्थाओं से कोई संबंध नहीं है।
इसी प्रकार जिला पंचायत सीधी के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी धनंजय मिश्रा ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वायरल व्हाट्सएप संदेश का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके मुताबिक यह राशि किसी कार्यक्रम या मंत्री के दौरे के लिए नहीं, बल्कि जीआईएस प्लान तैयार कर उसे प्लानर्स सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने के लिए आवश्यक कंसल्टेंसी सहायता प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रस्तावित थी। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है। इसी वजह से बाहरी कंसल्टेंसी एजेंसी की सेवाएं लेने का विचार किया गया था। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संदेश को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैल गईं। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की कंसल्टेंसी सेवाएं ली जानी थीं, तो उसके लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए थे। कर्मचारियों से राशि एकत्रित करने जैसे संदेश ने स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका मानना है कि सरकारी कार्यों के लिए कर्मचारियों से इस तरह धन एकत्रित करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत
रीवा,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में प्रभारी मंत्री के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले एक वायरल व्हाट्सएप चैट ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला जनपद पंचायत मझौली से जुड़ा है, जहां विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में ग्राम रोजगार सहायकों (जीआरएस) और पंचायत सचिवों से तीन-तीन हजार रुपए जमा कराने संबंधी एक संदेश वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर यह चैट तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यह मैसेज मझौली जनपद पंचायत के सेक्टर करमाई नामक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया गया था। बताया जा रहा है कि ग्रुप में भेजे गए संदेश में जनपद पंचायत के उपयंत्री अनित कुमार दीपांकर की ओर से ग्राम रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों से तीन हजार रुपए जमा कराने की बात कही गई थी। संदेश में यह भी उल्लेख था कि चमराडोल और परसिली ग्राम पंचायतों को छोड़कर अन्य पंचायतों के कर्मचारी निर्धारित राशि जनपद कार्यालय में जमा करें।जैसे ही यह चैट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, मामले ने तूल पकड़ लिया। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाने लगा कि प्रभारी मंत्री के दौरे की व्यवस्थाओं के लिए यह राशि एकत्रित की जा रही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल संदेश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा।
बताया जा रहा है कि मझौली जनपद पंचायत के अंतर्गत कुल 53 ग्राम पंचायतें आती हैं। इनमें से दो पंचायतों चमराडोल और परसिली को छोड़कर शेष 51 पंचायतों में पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक कार्यरत हैं। यदि प्रत्येक पंचायत से तीन हजार रुपए लिए जाते, तो कुल राशि लगभग एक लाख 53 हजार रुपए तक पहुंचती। इसी संभावित राशि को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है। उप संभाग मझौली की एसडीओ आरईएस सरिता सिंह ने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से किसी प्रकार की प्रत्यक्ष वसूली का निर्देश नहीं दिया गया था। उनके अनुसार यह केवल एक संदेश था, जिसका उद्देश्य जीआईएस आधारित प्लानिंग कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना था। उन्होंने बताया कि विभाग के पास जीआईएस प्लान तैयार करने के लिए पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एक कंसल्टेंसी एजेंसी की मदद लेने का प्रस्ताव था और उसी संदर्भ में कर्मचारियों के बीच संदेश साझा किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया का प्रभारी मंत्री के दौरे या उनकी व्यवस्थाओं से कोई संबंध नहीं है।
इसी प्रकार जिला पंचायत सीधी के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी धनंजय मिश्रा ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वायरल व्हाट्सएप संदेश का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके मुताबिक यह राशि किसी कार्यक्रम या मंत्री के दौरे के लिए नहीं, बल्कि जीआईएस प्लान तैयार कर उसे प्लानर्स सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने के लिए आवश्यक कंसल्टेंसी सहायता प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रस्तावित थी। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है। इसी वजह से बाहरी कंसल्टेंसी एजेंसी की सेवाएं लेने का विचार किया गया था। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संदेश को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैल गईं। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की कंसल्टेंसी सेवाएं ली जानी थीं, तो उसके लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए थे। कर्मचारियों से राशि एकत्रित करने जैसे संदेश ने स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका मानना है कि सरकारी कार्यों के लिए कर्मचारियों से इस तरह धन एकत्रित करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो।
