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प्रभास पर टिप्पणी विवाद में बोले अरशद वारसी, कहा- मजाक की भी एक सीमा होती है
बालीवुड डेस्क
'कल्कि 2898 AD' को लेकर दिए गए पुराने बयान पर अभिनेता ने पहली बार सफाई दी। कहा- मैं सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, सोशल मीडिया पर हर बात का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण होने लगा है।
अभिनेता अरशद वारसी ने फिल्म 'कल्कि 2898 AD' को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। कुछ समय पहले उन्होंने फिल्म की समीक्षा करते हुए कहा था कि इसमें प्रभास उन्हें "जोकर" की तरह लगे। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। फिल्म के निर्देशक नाग अश्विन समेत कई कलाकारों ने उनके बयान की आलोचना की थी। अब अरशद वारसी ने पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि वह किसी अनजान व्यक्ति का मजाक नहीं उड़ाते और केवल उन्हीं लोगों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हैं, जिन्हें वह अच्छी तरह जानते हैं।
एक इंटरव्यू में अरशद वारसी ने कहा कि उनकी आदत कभी भी किसी अजनबी व्यक्ति पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी से मजाक करना होता है तो वह केवल अपने दोस्तों के साथ करते हैं। उनके मुताबिक, वह यह अच्छी तरह जानते हैं कि किस व्यक्ति के सामने क्या कहना है और कितनी सीमा तक कहना है। अगर वह किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, तो उसके बारे में इस तरह की टिप्पणी करने से बचते हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले को जिस तरह पेश किया गया, उससे बात जरूरत से ज्यादा बढ़ गई।
अरशद वारसी ने यह भी कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया के कारण हर बयान का बहुत ज्यादा विश्लेषण किया जाता है। उनका मानना है कि लोगों को हल्के-फुल्के मजाक को उसी नजरिए से देखना चाहिए, जैसा वह कहा गया हो। उन्होंने कहा कि जिंदगी में थोड़ा हास्य भी जरूरी है और हर बात को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्मों में दिखाए जाने वाले संवाद और वास्तविक जीवन में बोले गए मजाक को भी संतुलित नजरिए से समझने की जरूरत है। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में उनका एक संवाद था, जिसमें उन्होंने एक चीनी पर्यटक को मजाकिया अंदाज में "हक्का नूडल्स" कहा था। उनके अनुसार उस समय किसी ने इसे आपत्तिजनक नहीं माना, लेकिन आज के दौर में शायद उस संवाद की भी अलग तरह से व्याख्या की जाती। उन्होंने कहा कि कई बार लोग दोस्तों के बीच मजाक में एक-दूसरे को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं, लेकिन उसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं होता।
हालांकि अरशद वारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद पर संयम रखने में विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि हर कलाकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति को अपनी बात कहते समय आत्मसंयम रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसी कॉमेडी पसंद नहीं है, जिसमें किसी व्यक्ति को नीचा दिखाया जाए या अपमानित किया जाए। इसी तरह डबल मीनिंग और अश्लील हास्य भी उनकी पसंद का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने लिए कुछ सीमाएं तय की हैं और उसी के अनुसार व्यवहार करने की कोशिश करते हैं। दरअसल यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब एक पॉडकास्ट में अरशद वारसी से हाल में देखी गई सबसे खराब फिल्म के बारे में पूछा गया था। जवाब में उन्होंने 'कल्कि 2898 AD' का नाम लिया और कहा कि उन्हें फिल्म पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन के अभिनय की खुलकर तारीफ की, लेकिन प्रभास के किरदार पर निराशा जताते हुए कहा कि वह उन्हें "जोकर" जैसे लगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह प्रभास को एक दमदार एक्शन हीरो के रूप में देखना चाहते थे और उन्हें लगा कि फिल्म में उनके किरदार के साथ न्याय नहीं हुआ।
यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे फिल्म की आलोचना मानने के बजाय अभिनेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी बताया। फिल्म के निर्देशक नाग अश्विन ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारतीय फिल्म उद्योग को उत्तर और दक्षिण जैसी बहसों से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अरशद वारसी को अपने शब्दों का चयन थोड़ा बेहतर करना चाहिए था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और भविष्य में 'कल्कि 2' के जरिए दर्शकों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे।
दक्षिण भारतीय अभिनेता सुधीर बाबू ने भी अरशद वारसी की टिप्पणी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि किसी फिल्म या अभिनय की रचनात्मक आलोचना करना पूरी तरह उचित है, लेकिन किसी कलाकार के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सुधीर बाबू का कहना था कि प्रभास का कद इतना बड़ा है कि इस तरह की टिप्पणियों से उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन सार्वजनिक मंच पर शब्दों का चयन हमेशा सोच-समझकर होना चाहिए। इस पूरे विवाद के बाद अरशद वारसी की नई सफाई को कई लोग उनके पक्ष को स्पष्ट करने की कोशिश मान रहे हैं। अभिनेता ने अपने बयान में यह दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था और वह व्यक्तिगत रिश्तों की मर्यादा को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है, क्योंकि कई बार छोटी-सी बात भी विवाद का रूप ले लेती है।
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प्रभास पर टिप्पणी विवाद में बोले अरशद वारसी, कहा- मजाक की भी एक सीमा होती है
बालीवुड डेस्क
अभिनेता अरशद वारसी ने फिल्म 'कल्कि 2898 AD' को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। कुछ समय पहले उन्होंने फिल्म की समीक्षा करते हुए कहा था कि इसमें प्रभास उन्हें "जोकर" की तरह लगे। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। फिल्म के निर्देशक नाग अश्विन समेत कई कलाकारों ने उनके बयान की आलोचना की थी। अब अरशद वारसी ने पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि वह किसी अनजान व्यक्ति का मजाक नहीं उड़ाते और केवल उन्हीं लोगों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हैं, जिन्हें वह अच्छी तरह जानते हैं।
एक इंटरव्यू में अरशद वारसी ने कहा कि उनकी आदत कभी भी किसी अजनबी व्यक्ति पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी से मजाक करना होता है तो वह केवल अपने दोस्तों के साथ करते हैं। उनके मुताबिक, वह यह अच्छी तरह जानते हैं कि किस व्यक्ति के सामने क्या कहना है और कितनी सीमा तक कहना है। अगर वह किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, तो उसके बारे में इस तरह की टिप्पणी करने से बचते हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले को जिस तरह पेश किया गया, उससे बात जरूरत से ज्यादा बढ़ गई।
अरशद वारसी ने यह भी कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया के कारण हर बयान का बहुत ज्यादा विश्लेषण किया जाता है। उनका मानना है कि लोगों को हल्के-फुल्के मजाक को उसी नजरिए से देखना चाहिए, जैसा वह कहा गया हो। उन्होंने कहा कि जिंदगी में थोड़ा हास्य भी जरूरी है और हर बात को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्मों में दिखाए जाने वाले संवाद और वास्तविक जीवन में बोले गए मजाक को भी संतुलित नजरिए से समझने की जरूरत है। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में उनका एक संवाद था, जिसमें उन्होंने एक चीनी पर्यटक को मजाकिया अंदाज में "हक्का नूडल्स" कहा था। उनके अनुसार उस समय किसी ने इसे आपत्तिजनक नहीं माना, लेकिन आज के दौर में शायद उस संवाद की भी अलग तरह से व्याख्या की जाती। उन्होंने कहा कि कई बार लोग दोस्तों के बीच मजाक में एक-दूसरे को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं, लेकिन उसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं होता।
हालांकि अरशद वारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद पर संयम रखने में विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि हर कलाकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति को अपनी बात कहते समय आत्मसंयम रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसी कॉमेडी पसंद नहीं है, जिसमें किसी व्यक्ति को नीचा दिखाया जाए या अपमानित किया जाए। इसी तरह डबल मीनिंग और अश्लील हास्य भी उनकी पसंद का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने लिए कुछ सीमाएं तय की हैं और उसी के अनुसार व्यवहार करने की कोशिश करते हैं। दरअसल यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब एक पॉडकास्ट में अरशद वारसी से हाल में देखी गई सबसे खराब फिल्म के बारे में पूछा गया था। जवाब में उन्होंने 'कल्कि 2898 AD' का नाम लिया और कहा कि उन्हें फिल्म पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन के अभिनय की खुलकर तारीफ की, लेकिन प्रभास के किरदार पर निराशा जताते हुए कहा कि वह उन्हें "जोकर" जैसे लगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह प्रभास को एक दमदार एक्शन हीरो के रूप में देखना चाहते थे और उन्हें लगा कि फिल्म में उनके किरदार के साथ न्याय नहीं हुआ।
यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे फिल्म की आलोचना मानने के बजाय अभिनेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी बताया। फिल्म के निर्देशक नाग अश्विन ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारतीय फिल्म उद्योग को उत्तर और दक्षिण जैसी बहसों से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अरशद वारसी को अपने शब्दों का चयन थोड़ा बेहतर करना चाहिए था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और भविष्य में 'कल्कि 2' के जरिए दर्शकों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे।
दक्षिण भारतीय अभिनेता सुधीर बाबू ने भी अरशद वारसी की टिप्पणी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि किसी फिल्म या अभिनय की रचनात्मक आलोचना करना पूरी तरह उचित है, लेकिन किसी कलाकार के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सुधीर बाबू का कहना था कि प्रभास का कद इतना बड़ा है कि इस तरह की टिप्पणियों से उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन सार्वजनिक मंच पर शब्दों का चयन हमेशा सोच-समझकर होना चाहिए। इस पूरे विवाद के बाद अरशद वारसी की नई सफाई को कई लोग उनके पक्ष को स्पष्ट करने की कोशिश मान रहे हैं। अभिनेता ने अपने बयान में यह दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था और वह व्यक्तिगत रिश्तों की मर्यादा को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है, क्योंकि कई बार छोटी-सी बात भी विवाद का रूप ले लेती है।
