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कॉकटेल 2 रिव्यू: शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सेनन का धमाकेदार जलवा — प्यार, दोस्ती और कमिटमेंट की आइकॉनिक कहानी!
Digital Desk
कॉकटेल 2 देखने बैठते ही लगेगा कि शायद वही पुरानी कहानी का नया पैग मिलेगा, खासकर अगर आपको पहली फिल्म पसंद आई हो। लेकिन यहाँ फिल्म शुरुआत में ही सरप्राइज़ दे देती है — ये दोबारा वही कॉकटेल बनाने नहीं आई है। हाँ, प्यार और दोस्ती का फ्लेवर बरकरार है, पर कहानी पूरी तरह नई है, अपनी अलग अंदाज़ के साथ। और सच कहें, यही इसकी सबसे बड़ी जीत है।
⭐️⭐️⭐️⭐️✨ (4.5/5)
दिल से देखें तो कॉकटेल 2 एक लव ट्रायंगल है, लेकिन यहाँ घिसे-पिटे ट्विस्ट की उम्मीद मत रखना। फिल्म आसान रास्ता छोड़कर इमोशन्स की गहराई में जाती है। कहानी बार-बार आपकोसोचने पर मजबूर करती है — आखिर किसके साथ खड़े हों? ये मॉडर्न है, थोड़ा कैआटिक है, और असल जिंदगी के रिश्तों जैसा है जहाँ कुछ भी सिर्फ काला या सफेद नहीं होता।
परफॉर्मेंसेज़
शाहिद कपूर ने (कुनाल) बनकर ऐसा परफॉर्म किया है जो बिना मेहनत दिखे भी गहराई से भरा है। उनका चार्म और वल्नरेबिलिटी दोनों दिल छू जाते हैं। कृति सेनन (एली) के रूप में स्ट्रॉन्ग, कॉन्फिडेंट और इमोशनली समझदार है — वो हर सीन में अपनी पकड़ बनाए रखती हैं। रश्मिका मंदाना की दिया सॉफ्टनेस लेकर आती हैं, बिना ओवरड्रामेटिक हुए भी असर छोड़ जाती हैं। तीनों की केमिस्ट्री कहानी को रियल और एंगेजिंग बना देती है।
राइटिंग और डायलॉग्स
यहीं फिल्म सच में चमकती है। लव रंजन और तरुण जैन ने ऐसे रिश्ते लिखे हैं जो असली लगते हैं — इम्परफेक्ट, थोड़े टूटे-फूटे, लेकिन डायलॉग्स सिंपल हैं, लेकिन सीधे दिल में बैठ जाते हैं। फिल्म समझती है कि आज का प्यार आसान नहीं है, और बिना जज किए उसे दिखाती है।
म्यूजिक और विजुअल्स
प्रीतम का म्यूजिक कहानी में ऐसे घुल जाता है जैसे चाय में अदरक। अमिताभ भट्टाचार्य के लिरिक्स इमोशन्स को और गहरा बना देते हैं। विजुअली फिल्म बेहद खूबसूरत है — सिसिली, इटली की लोकेशन्स हर फ्रेम को पोस्टकार्ड जैसा बना देती हैं। सिनेमैटोग्राफर संताना कृष्णन रविचंद्रन ने बड़े स्केल और छोटे पलों दोनों को खूबसूरती से कैद किया है।
क्या थोड़ा बेहतर हो सकता था
फिल्म कुछ जगहों पर थोड़ा स्लो हो जाती है, खासकर सेकंड हाफ में। अगर एडिटिंग थोड़ी टाइट होती तो इम्पैक्ट और भी जोरदार होता। कुछ सीन खिंचे हुए लगते हैं, लेकिन ओवरऑल मज़ा खराब नहीं करते।
फाइनल वर्डिक्ट
होमी अदजानिया के डायरेक्शन में कॉकटेल 2 इसलिए खास बनती है क्योंकि ये सिर्फ नॉस्टैल्जिया पर नहीं चलती। ये ओरिजिनल का सम्मान करती है, लेकिन अपनी अलग राह चुनती है। दिनेश विजान (मैडॉक फिल्म्स) और लव रंजन (लव फिल्म्स) के प्रोडक्शन में फिल्म एक साथ भव्य भी लगती है और पर्सनल भी।
आखिर में, ये फिल्म प्यार, दिल टूटने और उनके बीच के हर एहसास पर एक ताज़ा नज़र डालती है — अनप्रिडिक्टेबल, इमोशनल और पूरी तरह पैसा वसूल।
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कॉकटेल 2 रिव्यू: शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सेनन का धमाकेदार जलवा — प्यार, दोस्ती और कमिटमेंट की आइकॉनिक कहानी!
Digital Desk
⭐️⭐️⭐️⭐️✨ (4.5/5)
दिल से देखें तो कॉकटेल 2 एक लव ट्रायंगल है, लेकिन यहाँ घिसे-पिटे ट्विस्ट की उम्मीद मत रखना। फिल्म आसान रास्ता छोड़कर इमोशन्स की गहराई में जाती है। कहानी बार-बार आपकोसोचने पर मजबूर करती है — आखिर किसके साथ खड़े हों? ये मॉडर्न है, थोड़ा कैआटिक है, और असल जिंदगी के रिश्तों जैसा है जहाँ कुछ भी सिर्फ काला या सफेद नहीं होता।
परफॉर्मेंसेज़
शाहिद कपूर ने (कुनाल) बनकर ऐसा परफॉर्म किया है जो बिना मेहनत दिखे भी गहराई से भरा है। उनका चार्म और वल्नरेबिलिटी दोनों दिल छू जाते हैं। कृति सेनन (एली) के रूप में स्ट्रॉन्ग, कॉन्फिडेंट और इमोशनली समझदार है — वो हर सीन में अपनी पकड़ बनाए रखती हैं। रश्मिका मंदाना की दिया सॉफ्टनेस लेकर आती हैं, बिना ओवरड्रामेटिक हुए भी असर छोड़ जाती हैं। तीनों की केमिस्ट्री कहानी को रियल और एंगेजिंग बना देती है।
राइटिंग और डायलॉग्स
यहीं फिल्म सच में चमकती है। लव रंजन और तरुण जैन ने ऐसे रिश्ते लिखे हैं जो असली लगते हैं — इम्परफेक्ट, थोड़े टूटे-फूटे, लेकिन डायलॉग्स सिंपल हैं, लेकिन सीधे दिल में बैठ जाते हैं। फिल्म समझती है कि आज का प्यार आसान नहीं है, और बिना जज किए उसे दिखाती है।
म्यूजिक और विजुअल्स
प्रीतम का म्यूजिक कहानी में ऐसे घुल जाता है जैसे चाय में अदरक। अमिताभ भट्टाचार्य के लिरिक्स इमोशन्स को और गहरा बना देते हैं। विजुअली फिल्म बेहद खूबसूरत है — सिसिली, इटली की लोकेशन्स हर फ्रेम को पोस्टकार्ड जैसा बना देती हैं। सिनेमैटोग्राफर संताना कृष्णन रविचंद्रन ने बड़े स्केल और छोटे पलों दोनों को खूबसूरती से कैद किया है।
क्या थोड़ा बेहतर हो सकता था
फिल्म कुछ जगहों पर थोड़ा स्लो हो जाती है, खासकर सेकंड हाफ में। अगर एडिटिंग थोड़ी टाइट होती तो इम्पैक्ट और भी जोरदार होता। कुछ सीन खिंचे हुए लगते हैं, लेकिन ओवरऑल मज़ा खराब नहीं करते।
फाइनल वर्डिक्ट
होमी अदजानिया के डायरेक्शन में कॉकटेल 2 इसलिए खास बनती है क्योंकि ये सिर्फ नॉस्टैल्जिया पर नहीं चलती। ये ओरिजिनल का सम्मान करती है, लेकिन अपनी अलग राह चुनती है। दिनेश विजान (मैडॉक फिल्म्स) और लव रंजन (लव फिल्म्स) के प्रोडक्शन में फिल्म एक साथ भव्य भी लगती है और पर्सनल भी।
आखिर में, ये फिल्म प्यार, दिल टूटने और उनके बीच के हर एहसास पर एक ताज़ा नज़र डालती है — अनप्रिडिक्टेबल, इमोशनल और पूरी तरह पैसा वसूल।
