सरकारी आदेश के बाद ओटीटी से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज', विवाद गहराया

बालीवुड डेस्क

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आईटी रूल 2021 के तहत कार्रवाई का हवाला, फिल्म हटने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी, सेंसरशिप और पायरेसी को लेकर नई बहस तेज; अनुराग कश्यप समेत कई फिल्मी हस्तियों ने जताया समर्थन।

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 2 जुलाई को रिलीज हुई यह फिल्म 5 जुलाई को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दी गई, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई। फिल्म हटाए जाने के पीछे पहले कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई थी, लेकिन अब सामने आई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत सरकारी निर्देश के बाद की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट, सरकारी हस्तक्षेप, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिल्म के हटने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ, निर्देशक हनी त्रेहान और फिल्म से जुड़े लोगों को कई कलाकारों का समर्थन मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फिल्म का निर्माण पहले 'पंजाब 95' नाम से किया गया था। वर्ष 2022 में इसके निर्माताओं ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए आवेदन किया था। उस दौरान सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव और कुल 127 कट लगाने की सिफारिश की थी। बताया जाता है कि निर्माता इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हुए, जिसके बाद फिल्म को प्रमाणन नहीं मिल सका। बाद में फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। चूंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले कंटेंट का नियमन पारंपरिक फिल्म सेंसर प्रक्रिया के तहत नहीं होता, इसलिए मामला अलग कानूनी दायरे में पहुंच गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार जब फिल्म सरकार के संज्ञान में आई तो आईटी रूल 2021 के प्रावधानों के तहत संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म को इसे हटाने का निर्देश दिया गया।सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ सामग्री के संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी। सूत्रों के मुताबिक आशंका थी कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक तत्व अपने प्रचार के लिए कर सकते हैं। खासतौर पर पंजाब के राजनीतिक माहौल और आगामी चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए इस विषय को संवेदनशील माना गया। हालांकि सरकार की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यक कदम उठाना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

फिल्म हटाए जाने के बाद निर्देशक और कलाकारों के समर्थन में फिल्म जगत के कई लोग सामने आए हैं। फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्देशक हनी त्रेहान की तुलना ईरान के चर्चित फिल्मकार जाफर पनाही से की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारतीय फिल्मकारों को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जैसी पनाही ने अपने देश में की थी। जाफर पनाही लंबे समय से सरकारी प्रतिबंधों और सेंसरशिप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। अनुराग कश्यप की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई। इस बीच अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी फिल्म हटाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई दर्शकों ने फिल्म पहले ही डाउनलोड कर ली है और वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें। दिलजीत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर फिल्म की अनधिकृत प्रतियां तेजी से साझा की जाने लगीं। कई यूजर्स ने फिल्म के लिंक और वीडियो क्लिप अपलोड किए, जिससे पायरेसी का मामला भी चर्चा में आ गया।

ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर से बाद में आधिकारिक बयान जारी कर दर्शकों से पायरेसी का समर्थन नहीं करने की अपील की गई। प्लेटफॉर्म ने कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन किसी भी तरह की अवैध कॉपी साझा करना कानून का उल्लंघन है। डिजिटल कंटेंट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पायरेसी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि एक बार सामग्री इंटरनेट पर फैलने के बाद उसे पूरी तरह रोक पाना बेहद मुश्किल होता है। फिल्म 'सतलुज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' शीर्षक से तैयार हुई थी और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित की गई थी। इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय की विदेशों में सराहना हुई थी। बाद में शीर्षक बदलने और अन्य विवादों के बीच इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। अब फिल्म हटाए जाने के बाद इसकी कहानी से अधिक उस पर हुई कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।

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07 Jul 2026 By Vaishnavi.J

सरकारी आदेश के बाद ओटीटी से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज', विवाद गहराया

बालीवुड डेस्क

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 2 जुलाई को रिलीज हुई यह फिल्म 5 जुलाई को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दी गई, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई। फिल्म हटाए जाने के पीछे पहले कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई थी, लेकिन अब सामने आई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत सरकारी निर्देश के बाद की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट, सरकारी हस्तक्षेप, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिल्म के हटने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ, निर्देशक हनी त्रेहान और फिल्म से जुड़े लोगों को कई कलाकारों का समर्थन मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फिल्म का निर्माण पहले 'पंजाब 95' नाम से किया गया था। वर्ष 2022 में इसके निर्माताओं ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए आवेदन किया था। उस दौरान सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव और कुल 127 कट लगाने की सिफारिश की थी। बताया जाता है कि निर्माता इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हुए, जिसके बाद फिल्म को प्रमाणन नहीं मिल सका। बाद में फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। चूंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले कंटेंट का नियमन पारंपरिक फिल्म सेंसर प्रक्रिया के तहत नहीं होता, इसलिए मामला अलग कानूनी दायरे में पहुंच गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार जब फिल्म सरकार के संज्ञान में आई तो आईटी रूल 2021 के प्रावधानों के तहत संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म को इसे हटाने का निर्देश दिया गया।सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ सामग्री के संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी। सूत्रों के मुताबिक आशंका थी कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक तत्व अपने प्रचार के लिए कर सकते हैं। खासतौर पर पंजाब के राजनीतिक माहौल और आगामी चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए इस विषय को संवेदनशील माना गया। हालांकि सरकार की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यक कदम उठाना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

फिल्म हटाए जाने के बाद निर्देशक और कलाकारों के समर्थन में फिल्म जगत के कई लोग सामने आए हैं। फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्देशक हनी त्रेहान की तुलना ईरान के चर्चित फिल्मकार जाफर पनाही से की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारतीय फिल्मकारों को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जैसी पनाही ने अपने देश में की थी। जाफर पनाही लंबे समय से सरकारी प्रतिबंधों और सेंसरशिप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। अनुराग कश्यप की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई। इस बीच अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी फिल्म हटाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई दर्शकों ने फिल्म पहले ही डाउनलोड कर ली है और वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें। दिलजीत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर फिल्म की अनधिकृत प्रतियां तेजी से साझा की जाने लगीं। कई यूजर्स ने फिल्म के लिंक और वीडियो क्लिप अपलोड किए, जिससे पायरेसी का मामला भी चर्चा में आ गया।

ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर से बाद में आधिकारिक बयान जारी कर दर्शकों से पायरेसी का समर्थन नहीं करने की अपील की गई। प्लेटफॉर्म ने कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन किसी भी तरह की अवैध कॉपी साझा करना कानून का उल्लंघन है। डिजिटल कंटेंट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पायरेसी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि एक बार सामग्री इंटरनेट पर फैलने के बाद उसे पूरी तरह रोक पाना बेहद मुश्किल होता है। फिल्म 'सतलुज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' शीर्षक से तैयार हुई थी और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित की गई थी। इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय की विदेशों में सराहना हुई थी। बाद में शीर्षक बदलने और अन्य विवादों के बीच इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। अब फिल्म हटाए जाने के बाद इसकी कहानी से अधिक उस पर हुई कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/diljit-dosanjhs-film-satluj-removed-from-ott-after-government-order/article-58086

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