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'गजनी' और 'लगान' के दमदार विलेन प्रदीप रावत का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
बालीवुड न्यूज़
कैंसर से लंबी जंग के बाद अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा, महाभारत के अश्वत्थामा से लेकर गजनी के गजेंद्र तक निभाए यादगार किरदार
हिंदी सिनेमा और भारतीय टेलीविजन जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और खलनायक की सशक्त भूमिकाएं हमेशा याद की जाएंगी। 'लगान', 'गजनी', 'सरफरोश' और 'आवारापन' जैसी फिल्मों में अपनी खास पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का मंगलवार शाम 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। साथी कलाकारों, निर्देशकों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रदीप रावत पिछले काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ था, लेकिन हाल ही में बीमारी दोबारा लौट आई। पिछले एक महीने से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। आखिरकार मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने की।
प्रदीप रावत के निधन की जानकारी सबसे पहले अभिनेता यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने भावुक पोस्ट लिखते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पलों को याद किया। इसके बाद फिल्म जगत के कई कलाकारों ने भी शोक व्यक्त किया। अभिनेता सोनू सूद ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और वह हमेशा याद किए जाएंगे।
प्रदीप रावत का अभिनय सफर बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक महाभारत से की थी, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और दर्शकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया और धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद चरित्र कलाकारों और खलनायकों में अपनी जगह बना ली।
हिंदी फिल्मों में प्रदीप रावत ने कई यादगार किरदार निभाए। सरफरोश, लगान, गजनी, ग्रैंड मस्ती, आवारापन, बैजू बावरा और कई अन्य फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से अलग छाप छोड़ी। खासकर फिल्म गजनी में उनका निभाया गया विलेन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस फिल्म में उनका किरदार इतना प्रभावशाली था कि आज भी उन्हें कई लोग 'गजनी' के नाम से याद करते हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने पहले तमिल फिल्म गजनी में इसी किरदार को निभाया और बाद में उसके हिंदी रीमेक में भी वही भूमिका दोहराई। दोनों भाषाओं में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने समान रूप से सराहा। आमिर खान अभिनीत हिंदी गजनी में उनका किरदार कहानी का सबसे अहम हिस्सा था और फिल्म की सफलता में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रदीप रावत केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्होंने फिल्म Sye से कदम रखा और इसके बाद कई सुपरहिट फिल्मों में दमदार खलनायक के रूप में नजर आए। अलग-अलग भाषाओं में अभिनय कर उन्होंने खुद को बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया। उनकी आखिरी हिंदी फिल्म छावा थी, जो 14 फरवरी 2025 को रिलीज हुई थी। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अभिनय के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा। यही कारण है कि वे अंतिम समय तक फिल्मी दुनिया से जुड़े रहे।
कुछ महीने पहले अभिनेता सलमान खान ने भी प्रदीप रावत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था। फिल्म सिकंदर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलमान से पूछा गया कि क्या उन्हें आमिर खान से पहले गजनी का ऑफर मिला था। इस पर सलमान ने मुस्कुराते हुए कहा था कि यह बात उन्होंने खुद प्रदीप रावत से सुनी थी। उन्होंने बताया कि प्रदीप उनके अच्छे दोस्त थे और दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया था।
सलमान ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा था कि प्रदीप ने निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस से कहा था कि सलमान उनके अनुशासन वाले माहौल में काम नहीं कर पाएंगे। इस बात को याद करते हुए सलमान ने हंसते हुए कहा कि वह प्रदीप से पूछना चाहते थे कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। यह किस्सा दोनों कलाकारों की गहरी दोस्ती को भी दर्शाता है। सलमान खान और प्रदीप रावत ने बागी, पत्थर के फूल और संगदिल सनम जैसी फिल्मों में साथ काम किया था। उनके बीच वर्षों पुराना आत्मीय संबंध था और दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते थे।
प्रदीप रावत की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी और गहराई से निभाया। चाहे वह ऐतिहासिक पात्र हो, धार्मिक भूमिका हो या आधुनिक दौर का खलनायक, उन्होंने अपने अभिनय से हर चरित्र को जीवंत बना दिया। उनकी मजबूत आवाज, प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस और सधा हुआ अभिनय उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाता था। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि प्रदीप रावत उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने नायक से ज्यादा अपने खलनायक वाले किरदारों से लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने कभी अपने अभिनय को सीमित नहीं रखा और हर भाषा, हर शैली तथा हर माध्यम में खुद को साबित किया।
उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है, जिसने चार दशकों से अधिक समय तक अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनके निभाए गए किरदार आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की मिसाल बने रहेंगे। फिल्म इंडस्ट्री और उनके करोड़ों प्रशंसक उन्हें हमेशा उनकी दमदार भूमिकाओं, सादगी और अभिनय के प्रति समर्पण के लिए याद करेंगे।
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'गजनी' और 'लगान' के दमदार विलेन प्रदीप रावत का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
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हिंदी सिनेमा और भारतीय टेलीविजन जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और खलनायक की सशक्त भूमिकाएं हमेशा याद की जाएंगी। 'लगान', 'गजनी', 'सरफरोश' और 'आवारापन' जैसी फिल्मों में अपनी खास पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का मंगलवार शाम 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। साथी कलाकारों, निर्देशकों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रदीप रावत पिछले काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ था, लेकिन हाल ही में बीमारी दोबारा लौट आई। पिछले एक महीने से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। आखिरकार मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने की।
प्रदीप रावत के निधन की जानकारी सबसे पहले अभिनेता यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने भावुक पोस्ट लिखते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पलों को याद किया। इसके बाद फिल्म जगत के कई कलाकारों ने भी शोक व्यक्त किया। अभिनेता सोनू सूद ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और वह हमेशा याद किए जाएंगे।
प्रदीप रावत का अभिनय सफर बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक महाभारत से की थी, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और दर्शकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया और धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद चरित्र कलाकारों और खलनायकों में अपनी जगह बना ली।
हिंदी फिल्मों में प्रदीप रावत ने कई यादगार किरदार निभाए। सरफरोश, लगान, गजनी, ग्रैंड मस्ती, आवारापन, बैजू बावरा और कई अन्य फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से अलग छाप छोड़ी। खासकर फिल्म गजनी में उनका निभाया गया विलेन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस फिल्म में उनका किरदार इतना प्रभावशाली था कि आज भी उन्हें कई लोग 'गजनी' के नाम से याद करते हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने पहले तमिल फिल्म गजनी में इसी किरदार को निभाया और बाद में उसके हिंदी रीमेक में भी वही भूमिका दोहराई। दोनों भाषाओं में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने समान रूप से सराहा। आमिर खान अभिनीत हिंदी गजनी में उनका किरदार कहानी का सबसे अहम हिस्सा था और फिल्म की सफलता में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रदीप रावत केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्होंने फिल्म Sye से कदम रखा और इसके बाद कई सुपरहिट फिल्मों में दमदार खलनायक के रूप में नजर आए। अलग-अलग भाषाओं में अभिनय कर उन्होंने खुद को बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया। उनकी आखिरी हिंदी फिल्म छावा थी, जो 14 फरवरी 2025 को रिलीज हुई थी। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अभिनय के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा। यही कारण है कि वे अंतिम समय तक फिल्मी दुनिया से जुड़े रहे।
कुछ महीने पहले अभिनेता सलमान खान ने भी प्रदीप रावत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था। फिल्म सिकंदर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलमान से पूछा गया कि क्या उन्हें आमिर खान से पहले गजनी का ऑफर मिला था। इस पर सलमान ने मुस्कुराते हुए कहा था कि यह बात उन्होंने खुद प्रदीप रावत से सुनी थी। उन्होंने बताया कि प्रदीप उनके अच्छे दोस्त थे और दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया था।
सलमान ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा था कि प्रदीप ने निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस से कहा था कि सलमान उनके अनुशासन वाले माहौल में काम नहीं कर पाएंगे। इस बात को याद करते हुए सलमान ने हंसते हुए कहा कि वह प्रदीप से पूछना चाहते थे कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। यह किस्सा दोनों कलाकारों की गहरी दोस्ती को भी दर्शाता है। सलमान खान और प्रदीप रावत ने बागी, पत्थर के फूल और संगदिल सनम जैसी फिल्मों में साथ काम किया था। उनके बीच वर्षों पुराना आत्मीय संबंध था और दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते थे।
प्रदीप रावत की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी और गहराई से निभाया। चाहे वह ऐतिहासिक पात्र हो, धार्मिक भूमिका हो या आधुनिक दौर का खलनायक, उन्होंने अपने अभिनय से हर चरित्र को जीवंत बना दिया। उनकी मजबूत आवाज, प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस और सधा हुआ अभिनय उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाता था। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि प्रदीप रावत उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने नायक से ज्यादा अपने खलनायक वाले किरदारों से लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने कभी अपने अभिनय को सीमित नहीं रखा और हर भाषा, हर शैली तथा हर माध्यम में खुद को साबित किया।
उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है, जिसने चार दशकों से अधिक समय तक अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनके निभाए गए किरदार आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की मिसाल बने रहेंगे। फिल्म इंडस्ट्री और उनके करोड़ों प्रशंसक उन्हें हमेशा उनकी दमदार भूमिकाओं, सादगी और अभिनय के प्रति समर्पण के लिए याद करेंगे।
